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Banda News: स्कूली वाहनों में नियमों की अनेदखी, 10 पर कार्रवाई
Fri, 10 Jul 2026 11:58 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 10 Jul 2026 11:58 PM IST
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बांदा। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों के बीच शुक्रवार को ट्रैफिक पुलिस की जांच में कई स्कूल वाहनों में लापरवाही सामने आई। विशेष चेकिंग अभियान के दौरान आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में 10 स्कूली वाहनों का चालान किया गया, जबकि खामियां मिलने के बावजूद 20 वाहनों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। कार्रवाई के बाद स्कूल वाहनों की निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्षेत्राधिकारी यातायात सौरभ सिंह के नेतृत्व में चले अभियान के दौरान स्कूली वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी), बीमा समेत अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में कई वाहन निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद चालान की कार्रवाई की गई। पुलिस ने वाहन चालकों और परिचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को वाहन में न बैठाया जाए और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।
बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। क्षेत्राधिकारी यातायात सौरभ सिंह ने कहा कि स्कूल वाहन संचालकों को नियमों का हर हाल में पालन करना होगा। भविष्य में यदि बिना वैध दस्तावेज या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए वाहन संचालित मिले तो चेतावनी नहीं, बल्कि नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
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जिले में पंजीकृत स्कूली वाहन- 320
फिटनेस लायक पाए गए वाहन- 5
पहली जुलाई से चलाए अभियान में अब तक-15 वाहनों के चालान
स्कूली बसों के संचालन और सुरक्षा के लिए यह मानक होना जरूरी
बस का बाहरी रंग अनिवार्य रूप से सुनहरा-पीला होना चाहिए।
बस के आगे और पीछे स्पष्ट रूप से स्कूल बस लिखा होना चाहिए। यदि बस किराए पर ली गई है, तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना आवश्यक है।
बस के दोनों तरफ स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
बस की खिड़की के स्तर के चारों ओर 150 मिमी (15 सेमी) चौड़ी सुनहरे भूरे रंग की पट्टी होनी चाहिए।
सुरक्षा मानकों के अनुसार खिड़कियों में मजबूत क्षैतिज ग्रिल लगी होनी चाहिए।
यात्री दरवाजे सुरक्षित तालों से युक्त होने चाहिए।
सबसे निचले पायदान की ऊंचाई जमीन से 220 मिमी से अधिक नहीं होनी चाहिए।
बस में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होने चाहिए।
बस के अंदर एक अच्छी स्थिति में फर्स्ट-एड बॉक्स और अग्निशामक यंत्र होना अनिवार्य है।
सभी स्कूली बसों में स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए ताकि उनकी अधिकतम गति सीमा तय की जा सके।
बस के अंदर सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम का चालू हालत में होना अनिवार्य है।
खिड़कियों पर किसी भी तरह की रंगीन फिल्म या परदे लगाने की मनाही है।
पैनिक बटन और इमरजेंसी सायरन या अलार्म बेल की सुविधा भी होनी चाहिए।
बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का वैध लाइसेंस और कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
बस में स्कूल की तरफ से एक प्रशिक्षित अटेंडेंट (परिचारक) का होना अनिवार्य है।
चालक का नियमित मेडिकल फिटनेस टेस्ट होना चाहिए।
वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फिटनेस प्रमाणपत्र, वैध परमिट, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र, वाहन का व्यावसायिक बीमा
वर्जन
पहली जुलाई से स्कूली वाहनों की चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसमें जिले में पंजीकृत 320 स्कूली वाहनों में सिर्फ पांच की फिटनेस नहीं मिली थीं। दो ने करा ली हैं। तीन ने संचालन बंद कर उन्हें खड़ा करा दिया है। पहली जुलाई से शुरू हुए अभियान में अब तक मानक पूरे न करने वाले 15 वाहनों का चालान किया गया है।
श्यामलाल, एआरटीओ, बांदा।
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क्षेत्राधिकारी यातायात सौरभ सिंह के नेतृत्व में चले अभियान के दौरान स्कूली वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी), बीमा समेत अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में कई वाहन निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद चालान की कार्रवाई की गई। पुलिस ने वाहन चालकों और परिचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को वाहन में न बैठाया जाए और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।
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बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। क्षेत्राधिकारी यातायात सौरभ सिंह ने कहा कि स्कूल वाहन संचालकों को नियमों का हर हाल में पालन करना होगा। भविष्य में यदि बिना वैध दस्तावेज या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए वाहन संचालित मिले तो चेतावनी नहीं, बल्कि नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
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जिले में पंजीकृत स्कूली वाहन- 320
फिटनेस लायक पाए गए वाहन- 5
पहली जुलाई से चलाए अभियान में अब तक-15 वाहनों के चालान
स्कूली बसों के संचालन और सुरक्षा के लिए यह मानक होना जरूरी
बस का बाहरी रंग अनिवार्य रूप से सुनहरा-पीला होना चाहिए।
बस के आगे और पीछे स्पष्ट रूप से स्कूल बस लिखा होना चाहिए। यदि बस किराए पर ली गई है, तो उस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना आवश्यक है।
बस के दोनों तरफ स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए।
बस की खिड़की के स्तर के चारों ओर 150 मिमी (15 सेमी) चौड़ी सुनहरे भूरे रंग की पट्टी होनी चाहिए।
सुरक्षा मानकों के अनुसार खिड़कियों में मजबूत क्षैतिज ग्रिल लगी होनी चाहिए।
यात्री दरवाजे सुरक्षित तालों से युक्त होने चाहिए।
सबसे निचले पायदान की ऊंचाई जमीन से 220 मिमी से अधिक नहीं होनी चाहिए।
बस में कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार होने चाहिए।
बस के अंदर एक अच्छी स्थिति में फर्स्ट-एड बॉक्स और अग्निशामक यंत्र होना अनिवार्य है।
सभी स्कूली बसों में स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए ताकि उनकी अधिकतम गति सीमा तय की जा सके।
बस के अंदर सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम का चालू हालत में होना अनिवार्य है।
खिड़कियों पर किसी भी तरह की रंगीन फिल्म या परदे लगाने की मनाही है।
पैनिक बटन और इमरजेंसी सायरन या अलार्म बेल की सुविधा भी होनी चाहिए।
बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का वैध लाइसेंस और कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
बस में स्कूल की तरफ से एक प्रशिक्षित अटेंडेंट (परिचारक) का होना अनिवार्य है।
चालक का नियमित मेडिकल फिटनेस टेस्ट होना चाहिए।
वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फिटनेस प्रमाणपत्र, वैध परमिट, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र, वाहन का व्यावसायिक बीमा
वर्जन
पहली जुलाई से स्कूली वाहनों की चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसमें जिले में पंजीकृत 320 स्कूली वाहनों में सिर्फ पांच की फिटनेस नहीं मिली थीं। दो ने करा ली हैं। तीन ने संचालन बंद कर उन्हें खड़ा करा दिया है। पहली जुलाई से शुरू हुए अभियान में अब तक मानक पूरे न करने वाले 15 वाहनों का चालान किया गया है।
श्यामलाल, एआरटीओ, बांदा।