{"_id":"6a5fbbd31aa89c4c2a0a341f","slug":"taps-run-dry-at-the-government-library-water-drips-from-cracks-in-the-walls-banda-news-c-12-1-knp1100-1594456-2026-07-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: राजकीय पुस्तकालय में नल सूखे, दीवारों की दरारों से टपकता पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: राजकीय पुस्तकालय में नल सूखे, दीवारों की दरारों से टपकता पानी
Wed, 22 Jul 2026 12:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Wed, 22 Jul 2026 12:04 AM IST
विज्ञापन
फोटो-16-लिंटर और दीवार में आईं दरारें दिखाता कर्मचारी। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। शहर के राजकीय पुस्तकालय में पढ़ने आने वाले प्रतियोगी छात्र और यहां कार्यरत कर्मचारी पिछले करीब पांच माह से पेयजल संकट की दोहरी मार झेल रहे हैं। फरवरी से नगर पालिका की पेयजल पाइपलाइन चोक होने से पुस्तकालय में पानी की आपूर्ति बंद है। दूसरी ओर जर्जर भवन की दीवारों और लिंटर में आईं दरारें बारिश के दौरान खतरे की आशंका बढ़ा रही हैं।
शहर के बीच स्थित राजकीय पुस्तकालय में प्रतिदिन 60 छात्र-छात्राएं आते हैं। वह दिन भर यहां रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं लेकिन फरवरी से लगातार यहां पेयजल संकट ने उनके लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। दरअसल सड़क निर्माण के दौरान पानी की पाइपलाइन चोक हो गई थी। इसके बाद से आज तक उसे सही नहीं कराया जा सका।
पुस्तकालय प्रशासन ने नगर पालिका को दो बार लिखित रूप से पाइपलाइन दुरुस्त कराने के लिए अवगत कराया। इसके बाद भी अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। पालिका की ओर से टैंकर से पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन 15 दिनों में केवल एक बार ही टैंकर भेजा जा रहा है। टैंकर से आए पानी को कर्मचारियों को मोटर लगाकर छत पर रखी टंकी तक पहुंचाना पड़ता है।
विज्ञापन
पुस्तकालय में नियमित रूप से आने वाले युवाओं का कहना है कि लंबे समय से पानी की समस्या बनी होने के कारण पढ़ाई के दौरान भी बार-बार बाहर जाना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत वॉशरूम के उपयोग में होती है।
उधर, पुस्तकालय का पुराना भवन भी चिंता का कारण है। दीवारों और लिंटर के बीच कई स्थानों पर चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। बारिश के दौरान इन्हीं दरारों से पानी रिसता है, जिससे भवन की स्थिति और कमजोर होने की आशंका बनी रहती है। छात्र और कर्मचारी हर दिन भय के साये में समय बिताने को मजबूर हैं।
पुस्तकालय प्रभारी उपेंद्र कुमार ने बताया कि पेयजल संकट और भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक तथा नगर पालिका को दी जा चुकी है। सोमवार को भी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिला है।
सबसे गर्म जिला रहा, तब भी नहीं मिली पानी की राहत
मई और जून में बांदा का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था और जिला देश के सबसे गर्म क्षेत्रों में शामिल रहा। भीषण गर्मी के बावजूद फरवरी से खराब पड़ी पाइपलाइन को दुरुस्त नहीं कराया गया। ऐसे में कर्मचारी और पुस्तकालय में पढ़ने आने वाले युवा भीषण गर्मी में भी पेयजल के लिए परेशान रहे। अब बरसात का मौसम शुरू होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
विज्ञापन
शहर के बीच स्थित राजकीय पुस्तकालय में प्रतिदिन 60 छात्र-छात्राएं आते हैं। वह दिन भर यहां रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं लेकिन फरवरी से लगातार यहां पेयजल संकट ने उनके लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। दरअसल सड़क निर्माण के दौरान पानी की पाइपलाइन चोक हो गई थी। इसके बाद से आज तक उसे सही नहीं कराया जा सका।
विज्ञापन
पुस्तकालय प्रशासन ने नगर पालिका को दो बार लिखित रूप से पाइपलाइन दुरुस्त कराने के लिए अवगत कराया। इसके बाद भी अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। पालिका की ओर से टैंकर से पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन 15 दिनों में केवल एक बार ही टैंकर भेजा जा रहा है। टैंकर से आए पानी को कर्मचारियों को मोटर लगाकर छत पर रखी टंकी तक पहुंचाना पड़ता है।
विज्ञापन
पुस्तकालय में नियमित रूप से आने वाले युवाओं का कहना है कि लंबे समय से पानी की समस्या बनी होने के कारण पढ़ाई के दौरान भी बार-बार बाहर जाना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत वॉशरूम के उपयोग में होती है।
उधर, पुस्तकालय का पुराना भवन भी चिंता का कारण है। दीवारों और लिंटर के बीच कई स्थानों पर चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। बारिश के दौरान इन्हीं दरारों से पानी रिसता है, जिससे भवन की स्थिति और कमजोर होने की आशंका बनी रहती है। छात्र और कर्मचारी हर दिन भय के साये में समय बिताने को मजबूर हैं।
पुस्तकालय प्रभारी उपेंद्र कुमार ने बताया कि पेयजल संकट और भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक तथा नगर पालिका को दी जा चुकी है। सोमवार को भी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक केवल आश्वासन ही मिला है।
सबसे गर्म जिला रहा, तब भी नहीं मिली पानी की राहत
मई और जून में बांदा का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया था और जिला देश के सबसे गर्म क्षेत्रों में शामिल रहा। भीषण गर्मी के बावजूद फरवरी से खराब पड़ी पाइपलाइन को दुरुस्त नहीं कराया गया। ऐसे में कर्मचारी और पुस्तकालय में पढ़ने आने वाले युवा भीषण गर्मी में भी पेयजल के लिए परेशान रहे। अब बरसात का मौसम शुरू होने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

फोटो-16-लिंटर और दीवार में आईं दरारें दिखाता कर्मचारी। संवाद