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Banda News: नहर चली पर नहीं भराए गए तालाब, पानी को भटक रहे गोवंशी
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:34 AM IST
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फोटो - 20 पानी की तलाश में भटकते संरक्षित गोवंशी। संवाद
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करतल। मुख्य नहर चलने के बाद जिम्मेदारों की लापरवाही से तालाबों में पानी नहीं भर पाया। इससे करीब 14 गांवों और 24 मजरों में मवेशियों के सामने जलसंकट बना हुआ है। पशुपालकों का कहना है कि पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर संरक्षित गोवंशों पर पड़ रहा है। वह पानी की तलाश में भटकते रहते हैं और जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
बीते दिनों मुख्य नहर को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य था कि गांवों के तालाबों को भर लिए जाएं, जिससे भीषण गर्मी में मवेशियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से तालाबों को भराया नहीं जा सका। इससे क्षेत्र के करीब 14 गांवों और 24 मजरों में मवेशियों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर संरक्षित गोवंशों पर पड़ रहा है। वह पानी की तलाश में दिनभर भटकते हैं, लेकिन उन्हें एक बूंद पानी नसीब नहीं होता।
नहरी गांव के दिनेश कुमार, अवध कुमार, संत प्रसाद, लवलेश, मातादीन ने बताया कि लगभग 40 हजार आबादी के क्षेत्र करतल में मवेशियों के लिए पानी की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। बताया कि पूर्व के वर्षों में मुख्य नहर चलने से तालाबों को भर लिया जाता था लेकिन इस वर्ष तालाबों में पानी नहीं भर पाया, जिससे भारी समस्या सामने आ गई है। मुख्य नहर नहरी कोठी, बरौली पुल के नीचे थोड़ा पानी बचा है। इसी के पास स्थित नहरी, करतल, रगौली, भटपुरा गोशाला के गोवंश पानी की तलाश में भटकते आ जाते हैं। कहा कि गोशाला से गोवंशों को छोड़ दिया जाता है, जिससे वह पानी की तलाश में भटक रहे हैं।
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बीते माह बरियारपुर बांध हेड से मुख्य नहर का संचालन रोस्टर के अनुसार किया गया था। तालाबों की भरने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व कर्मचारियों की होती है। नहर मानसून आने के बाद संचालित की जाएंगी।
प्रेम प्रकाश, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग प्रखंड तृतीय
बीते दिनों मुख्य नहर को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य था कि गांवों के तालाबों को भर लिए जाएं, जिससे भीषण गर्मी में मवेशियों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से तालाबों को भराया नहीं जा सका। इससे क्षेत्र के करीब 14 गांवों और 24 मजरों में मवेशियों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो गई है। इसका सबसे ज्यादा असर संरक्षित गोवंशों पर पड़ रहा है। वह पानी की तलाश में दिनभर भटकते हैं, लेकिन उन्हें एक बूंद पानी नसीब नहीं होता।
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नहरी गांव के दिनेश कुमार, अवध कुमार, संत प्रसाद, लवलेश, मातादीन ने बताया कि लगभग 40 हजार आबादी के क्षेत्र करतल में मवेशियों के लिए पानी की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। बताया कि पूर्व के वर्षों में मुख्य नहर चलने से तालाबों को भर लिया जाता था लेकिन इस वर्ष तालाबों में पानी नहीं भर पाया, जिससे भारी समस्या सामने आ गई है। मुख्य नहर नहरी कोठी, बरौली पुल के नीचे थोड़ा पानी बचा है। इसी के पास स्थित नहरी, करतल, रगौली, भटपुरा गोशाला के गोवंश पानी की तलाश में भटकते आ जाते हैं। कहा कि गोशाला से गोवंशों को छोड़ दिया जाता है, जिससे वह पानी की तलाश में भटक रहे हैं।
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प्रेम प्रकाश, अवर अभियंता, सिंचाई विभाग प्रखंड तृतीय