{"_id":"6a2713fbf24e246c26074feb","slug":"the-farmers-were-exhausted-by-the-lack-of-wheat-procurement-banda-news-c-212-1-sknp1006-147906-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Banda News: गेहूं की बेदम खरीद ने निकाला किसानों का दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Banda News: गेहूं की बेदम खरीद ने निकाला किसानों का दम
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:41 AM IST
विज्ञापन
मंडी समिति में गेहूं बिक्री के लिए खड़े ट्रैक्टर। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बांदा। चार दिना हुई गै मंडी मा पड़े हन। एक दिना का ट्रैक्टर केर भाड़ा एक हजार और खानगी खुराकी 500 से 1000 रुपये खर्च हुई गए हैं। अब तक खरीद का नंबर नाई आओ है। फोटो 4- मंडी समिति में गेहूं बिक्री के लिए खड़े ट्रैक्टर। यह व्यथा उन किसानों की है जो शहर की मंडी समिति में खुले सात केंद्रों में डेरा डाले हैं। ट्रैक्टर में गेहूं लदा है। तिरपाल ओढ़ाकर उसकी सुरक्षा में माथे में बल भी पड़ रहे हैं। इस बार गेहूं खरीद में अव्यवस्था हावी है। जिसने किसानों का दम निकाल लिया है। अब तक 20 फीसदी भी खरीद पूरी नहीं हो सकी है। जबकि खरीद बंद होने में अब महज छह दिन बाकी हैं। मंडी के गोदाम में जगह और बारदाना न होने की वजह से खाद्य एवं रसद विभाग विपणन शाखा का केंद्र बंद है।
शहर के तिंदवारी सड़क स्थित मंडी समिति में गेहूं खरीद के लिए खाद्य एवं रसद विभाग विपणन शाखा के दो, उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड के दो, पीसीएफ का एक, डीसीडीएफ का एक, केंद्रीय उपभोक्ता के एक-एक केंद्र खोले गए थे। सोमवार को खाद्य एवं रसद विभाग विपणन शाखा के दोनों केंद्र बंद मिले। बताया गया कि बारदाने के अभाव में केंद्र बंद हैं। उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड में खरीद होती मिली। यहां किसान अपनी बारी के इंतजार में बैठे थे। भारतीय खाद्य निगम के केंद्र में भी यही नजारा रहा।
यहां भी किसानों के ट्रैक्टर खड़े मिले। क्रय केंद्रों में अभी भी किसानों की लंबी लाइन लगी है। केंद्रों में गेहूं का उठान न होने से खरीद प्रभावित है। क्रय केंद्र प्रभारियों का कहना है कि एक दो ट्रक गेहूं उठ भी गया तो इतना तो दो दिन में खरीद लिया जाता है। क्रय केंद्रों में गेहूं रखने की जगह न होने से खरीद प्रभावित है।
विज्ञापन
यह रही अव्यवस्था
एक माह तक बारदाने की समस्या तो दूसरे माह में उठान नहीं
बांदा। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद 15 अप्रैल से शुरू हो गई थी। शासन ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 32500 मीट्रिक टन निर्धारित किया था। गेहूं की खरीद 15 जून को बंद हो जाएगी लेकिन अभी तक एजेंसियां लक्ष्य की तुलना में 15 फीसदी ही गेहूं की खरीद कर सकी हैं। छह दिन में पांच फीसदी खरीद और हो जाएगी। सच तो यह है कि गेहूं की खरीद ही अव्यवस्थाओं के चलते शुरू हुई। एक माह तक क्रय केंद्रों में बोरे ही नहीं मिले थे। मिलर्स और जिला पूर्ति विभाग से राशन के पुराने बोरे लेकर काम चलाया गया। बोरे की समस्या हल हुई कि दूसरी समस्या क्रय केंद्रों से गेहूं के उठान की खड़ी हो गई। गेहूं का उठान न होने से कई केंद्रों में खरीद ही बंद करनी पड़ी।
बोले किसान
गोखरही के किसान उदयचंद्र ने बताया कि चार दिन से वह खरीद केंद्र में डेरा डाले हैं। भाड़े का ट्रैक्टर लेकर आए हैं। प्रतिदिन एक हजार रुपये के हिसाब से चार हजार रुपये सिर्फ भाड़ा देना पड़ेगा। ऊपर से खाना खुराकी के पांच से 1000 रुपये खर्च हो रहे हैं वह अलग। आज उनकी खरीद हो पाई है। इस बीच उनके चार हजार रुपये खर्च हो चुके हैं।
जौरही गांव के किसान अजय सिंह ने बताया कि दो दिन से वह मंडी में डेरा डाले हैं। खाना खुराकी अलग लग रही है। दो दिन में उनके तीन हजार खर्च हो चुके हैं। सोमवार को नंबर आया है। अब उनके गेहूं की तौल हो रही है। ट्रैक्टर का भाड़ा भी देना पड़ रहा है।
300 रुपये क्विंटल घाटे में बेच रहे गेहूं
मंडी समिति में आढ़तियों को गेहूं बेच रहे जमालपुर के किसान घनश्याम का कहना है कि चार दिन तक क्रय केंद्र गेहूं बेचने के लिए खड़े रहे। क्रय केंद्रों में गेहूं रखने की जगह न होने से प्रभारी रोजाना महज एक ट्रैक्टर गेहूं की खरीद कर रहे हैं। अभी वहां तो दो चार दिन और खड़े रहना पड़ता।
जिले में गेहूं की लक्ष्य-32500 (एमटी)
खरीदा गया गेहूं-272 (एमटी)
गेहूं खरीद का प्रतिशत-15
वर्जन-
बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पैदावार कम होने से गेहूं बिकने के लिए नहीं आ रहा है। इस वजह से खरीद प्रभावित हुई है। लक्ष्य का पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
रामानंद
जिला विपणन अधिकारी, बांदा
शहर के तिंदवारी सड़क स्थित मंडी समिति में गेहूं खरीद के लिए खाद्य एवं रसद विभाग विपणन शाखा के दो, उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड के दो, पीसीएफ का एक, डीसीडीएफ का एक, केंद्रीय उपभोक्ता के एक-एक केंद्र खोले गए थे। सोमवार को खाद्य एवं रसद विभाग विपणन शाखा के दोनों केंद्र बंद मिले। बताया गया कि बारदाने के अभाव में केंद्र बंद हैं। उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड में खरीद होती मिली। यहां किसान अपनी बारी के इंतजार में बैठे थे। भारतीय खाद्य निगम के केंद्र में भी यही नजारा रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां भी किसानों के ट्रैक्टर खड़े मिले। क्रय केंद्रों में अभी भी किसानों की लंबी लाइन लगी है। केंद्रों में गेहूं का उठान न होने से खरीद प्रभावित है। क्रय केंद्र प्रभारियों का कहना है कि एक दो ट्रक गेहूं उठ भी गया तो इतना तो दो दिन में खरीद लिया जाता है। क्रय केंद्रों में गेहूं रखने की जगह न होने से खरीद प्रभावित है।
यह रही अव्यवस्था
एक माह तक बारदाने की समस्या तो दूसरे माह में उठान नहीं
बांदा। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद 15 अप्रैल से शुरू हो गई थी। शासन ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 32500 मीट्रिक टन निर्धारित किया था। गेहूं की खरीद 15 जून को बंद हो जाएगी लेकिन अभी तक एजेंसियां लक्ष्य की तुलना में 15 फीसदी ही गेहूं की खरीद कर सकी हैं। छह दिन में पांच फीसदी खरीद और हो जाएगी। सच तो यह है कि गेहूं की खरीद ही अव्यवस्थाओं के चलते शुरू हुई। एक माह तक क्रय केंद्रों में बोरे ही नहीं मिले थे। मिलर्स और जिला पूर्ति विभाग से राशन के पुराने बोरे लेकर काम चलाया गया। बोरे की समस्या हल हुई कि दूसरी समस्या क्रय केंद्रों से गेहूं के उठान की खड़ी हो गई। गेहूं का उठान न होने से कई केंद्रों में खरीद ही बंद करनी पड़ी।
बोले किसान
गोखरही के किसान उदयचंद्र ने बताया कि चार दिन से वह खरीद केंद्र में डेरा डाले हैं। भाड़े का ट्रैक्टर लेकर आए हैं। प्रतिदिन एक हजार रुपये के हिसाब से चार हजार रुपये सिर्फ भाड़ा देना पड़ेगा। ऊपर से खाना खुराकी के पांच से 1000 रुपये खर्च हो रहे हैं वह अलग। आज उनकी खरीद हो पाई है। इस बीच उनके चार हजार रुपये खर्च हो चुके हैं।
जौरही गांव के किसान अजय सिंह ने बताया कि दो दिन से वह मंडी में डेरा डाले हैं। खाना खुराकी अलग लग रही है। दो दिन में उनके तीन हजार खर्च हो चुके हैं। सोमवार को नंबर आया है। अब उनके गेहूं की तौल हो रही है। ट्रैक्टर का भाड़ा भी देना पड़ रहा है।
300 रुपये क्विंटल घाटे में बेच रहे गेहूं
मंडी समिति में आढ़तियों को गेहूं बेच रहे जमालपुर के किसान घनश्याम का कहना है कि चार दिन तक क्रय केंद्र गेहूं बेचने के लिए खड़े रहे। क्रय केंद्रों में गेहूं रखने की जगह न होने से प्रभारी रोजाना महज एक ट्रैक्टर गेहूं की खरीद कर रहे हैं। अभी वहां तो दो चार दिन और खड़े रहना पड़ता।
जिले में गेहूं की लक्ष्य-32500 (एमटी)
खरीदा गया गेहूं-272 (एमटी)
गेहूं खरीद का प्रतिशत-15
वर्जन-
बेमौसम बारिश से गेहूं की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। पैदावार कम होने से गेहूं बिकने के लिए नहीं आ रहा है। इस वजह से खरीद प्रभावित हुई है। लक्ष्य का पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है।
रामानंद
जिला विपणन अधिकारी, बांदा

मंडी समिति में गेहूं बिक्री के लिए खड़े ट्रैक्टर। संवाद

मंडी समिति में गेहूं बिक्री के लिए खड़े ट्रैक्टर। संवाद

मंडी समिति में गेहूं बिक्री के लिए खड़े ट्रैक्टर। संवाद