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Banda News: दो महीने में दब गए थे गद्दे, अब कंपनी को नए देने होंगे
Mon, 17 Aug 2026 11:44 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 17 Aug 2026 11:44 PM IST
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बांदा। कर्लोन के दो गद्दे खरीदने के महज दो महीने में बीच में दब जाने को लेकर ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग में गुहार लगाई थी। इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है कि कंपनी गद्दे की पूरी रकम ब्याज सहित लौटाए या नया गद्दा दे।
शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला हुसैनगंज निवासी कलीम मोहसिन उर्फ कलीम भाई ने 13 जनवरी 2022 में छावनी स्थित राजाराम कारपोरेशन (विजय कुमार) से 17,003 रुपये में 12 महीने की वारंटी के साथ दो कर्लोन गद्दे खरीदे थे। महज दो महीने में ही गद्दे बीच से दब गए। पीड़ित ने दुकानदार समेत कंपनी के कस्टमर केयर और व्हाट्स एप पर लगातार शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन कंपनी ने गद्दे बदलने में आनाकानी की।
इसके बाद 17 दिसंबर 2022 को उपभोक्ता आयोग में गुहार लगाई। नोटिस के बाद भी कंपनी और डीलर में से कोई कोर्ट नहीं पहुंचा जिसके बाद आयोग ने एक पक्षीय सुनवाई की। आयोग ने पाया कि शिकायत वारंटी अवधि के भीतर थी इसलिए कंपनी सेवा में त्रुटि की दोषी है। आदेश दिया है कि कंपनी 30 दिनों के भीतर पीड़ित को नए गद्दे दे।
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गद्दे न दे पाने की स्थिति में अधिकतम 45 दिनों के अंदर गद्दों की मूल कीमत (17,003 रुपये) परिवाद दायर करने की तिथि से सात प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी। इसके अलावा मानसिक व अदालती खर्च के लिए तीन हजार का भुगतान करना होगा। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र और सदस्य गीतांजलि भारती की पीठ ने सुनाया है।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला हुसैनगंज निवासी कलीम मोहसिन उर्फ कलीम भाई ने 13 जनवरी 2022 में छावनी स्थित राजाराम कारपोरेशन (विजय कुमार) से 17,003 रुपये में 12 महीने की वारंटी के साथ दो कर्लोन गद्दे खरीदे थे। महज दो महीने में ही गद्दे बीच से दब गए। पीड़ित ने दुकानदार समेत कंपनी के कस्टमर केयर और व्हाट्स एप पर लगातार शिकायतें दर्ज कराईं लेकिन कंपनी ने गद्दे बदलने में आनाकानी की।
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इसके बाद 17 दिसंबर 2022 को उपभोक्ता आयोग में गुहार लगाई। नोटिस के बाद भी कंपनी और डीलर में से कोई कोर्ट नहीं पहुंचा जिसके बाद आयोग ने एक पक्षीय सुनवाई की। आयोग ने पाया कि शिकायत वारंटी अवधि के भीतर थी इसलिए कंपनी सेवा में त्रुटि की दोषी है। आदेश दिया है कि कंपनी 30 दिनों के भीतर पीड़ित को नए गद्दे दे।
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गद्दे न दे पाने की स्थिति में अधिकतम 45 दिनों के अंदर गद्दों की मूल कीमत (17,003 रुपये) परिवाद दायर करने की तिथि से सात प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटानी होगी। इसके अलावा मानसिक व अदालती खर्च के लिए तीन हजार का भुगतान करना होगा। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र और सदस्य गीतांजलि भारती की पीठ ने सुनाया है।