फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   The prisoner's condition deteriorated before his release; the police fled, leaving him in a coma.

Banda News: रिहाई से पहले बिगड़ी बंदी की हालत, कोमा की स्थिति में बंदी को छोड़ पुलिसकर्मी भागे

Tue, 02 Jun 2026 01:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Tue, 02 Jun 2026 01:29 AM IST
विज्ञापन
The prisoner's condition deteriorated before his release; the police fled, leaving him in a coma.
फोटो - 31 नीतीश पाल।
बांदा। जिला कारागार में बंद एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगड़ने के बाद उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह कोमा में पहुंच गया। हैरत की बात यह है कि जिस दिन कैदी को जमानत पर रिहा होना था, उसी दिन उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के एडवांस आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती कराना पड़ा। मामले में इलाज और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
विज्ञापन


पॉक्सो एक्ट के तहत जिला कारागार में बंद 25 वर्षीय नितीश पाल को न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी और सोमवार को उसकी रिहाई होनी थी। इसी बीच सुबह अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। मेडिकल कॉलेज के कैजुअल्टी रिकॉर्ड के अनुसार जेल में तैनात चिकित्सक ने बताया कि बंदी को दौरा पड़ा था, जिससे वह जमीन पर गिर गया और उसकी हालत गंभीर हो गई। मामले में सबसे बड़ा सवाल इलाज संबंधी दस्तावेजों को लेकर खड़ा हो रहा है।
विज्ञापन

जिला पुरुष चिकित्सालय के डिस्चार्ज पर्चे में सुबह 7:51 बजे मरीज के भर्ती होने का उल्लेख है। पर्चे में दौरे की शिकायत तथा जीवन रक्षक दवाएं दिए जाने का भी जिक्र है। हालांकि डॉ. हृदेश पटेल ने मरीज को देखने अथवा उसका इलाज करने से इन्कार किया है। बताया गया कि जिला अस्पताल में मरीज को सबसे पहले डॉ. आकाश ने देखा था और प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

उधर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के अभिलेखों में दर्ज है कि बंदी को पुलिसकर्मी राकेश और आशीष पांडेय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। सुबह करीब 11:20 बजे गंभीर हालत में मरीज को एआईसीयू में भर्ती कराने के बाद दोनों पुलिसकर्मी वहां से चले गए। इसके बाद मरीज के साथ कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने जेल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलाज से जुड़े अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास सामने आने से मामला और भी संदिग्ध हो गया है। फिलहाल बंदी की हालत नाजुक बनी हुई है और वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।

इस मामले में जेलर रामरति का कहना है कि रिहाई के कागज में थाने का नाम गलत था, जिसे संशोधन करने के लिए भेजा गया। सुबह बंदी नहाते समय फिसल गया था, जिसके बाद उसे चोट आई और अस्पताल में भर्ती कराया गया। कोई पुलिसकर्मी बंदी को छोड़कर नहीं भागे हैं, हालांकि उसे रिहाई के बाद परिजनों को सौंप दिया गया था।

फोटो - 31 नीतीश पाल।

फोटो - 31 नीतीश पाल।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed