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Banda News: संकल्प लिया.... पूरा नहीं किया, अब वन विभाग भी मान रहा 25 फीसदी पौधे हुए नष्ट
Sat, 06 Jun 2026 11:46 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 06 Jun 2026 11:46 PM IST
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बांदा। संकल्प लिया, रक्षा करेंगे लेकिन पूरा नहीं किया गया। देखरेख के अभाव में पौधे दम तोड़ गए। यह सिर्फ एक साल की बानगी है। पौधे रोप दिए गए, बाद में उनकी तरफ मुड़कर भी नहीं देखा गया। कहीं पानी के अभाव, तो कहीं सुरक्षात्मक जाली न लगे होने से पौधे पनप नहीं पाए। गत वर्ष वन विभाग और सरकारी विभागों ने 64 लाख पौधे लगाने का दंभ तो भरा था लेकिन उनमें से 50 फीसदी पौधे धरातल से नदारद हैं। हालांकि वन विभाग अपनी फौरी रिपोर्ट में 25 फीसदी पौधे नष्ट होना मान रहा है। इसका सर्वे भी कराया जा रहा है।
जिले के पौधरोपण के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2025 में 64 लाख, वर्ष 2024 में 62 लाख व वर्ष 2023 में 63 लाख पौधों का रोपण किया गया था। गत वर्ष 64 लाख पौधों में वन विभाग ने 25 लाख 51 हजार, पर्यावरण विभाग ने 1390 लाख, ग्राम्य विकास विभाग 2234 लाख, पुलिस विभाग 1652 हजार, आवास विकास 13 हजार, औद्योगिक विकास विभाग 20 हजार, उद्योग विभाग 22 हजार, पशुपालन विभाग 19 हजार समेत 26 विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी गई थी।
जिम्मेदारों ने पौधरोपण कराकर फिर पौधों की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा। सबसे ज्यादा पौधों का नुकसान ग्राम्य विकास विभाग को दिए गए पौधों का आकलन किया जा रहा है। वन विभाग की फौरी रिपोर्ट के आकलन में 25 फीसदी पौधों के नष्ट होने का आकलन किया जा रहा है। जबकि वास्तविक आकलन धरातल पर किया जाए तो 50 फीसदी पौधे सूख गए। वन विभाग ने बताया कि पौधों के नष्ट होने के पीछे पानी न मिलना, तो तालाबों के किनारे कराए गए पौधरोपण में जाली आदि की सुरक्षा न होने से पशुओं के चरने, पौधे रोपने के लिए मानक के अनुसार गड्ढा न किए जाने का आकलन किया है।
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वन विभाग ने नष्ट हुए पौधों की जांच के लिए जिलास्तरीय वृक्षारोपण समिति का भी गठन किया है। यह समिति अपनी जांच कर रही है। जांच पूरी होने में अभी एक पखवाड़े का समय लग सकता है। हालांकि अब तक वन विभाग 25 फीसदी ही पौधों का नुकसान मान रही है।
गत वर्ष हुए पौधरोपण में 25 फीसदी पौधे नष्ट होने का आकलन है। अभी जांच चल रही है। पौधों के नष्ट होने की बड़ी वजह यह कि पौधों को ऐसी जगह पर रोप दिया गया जहां न तो पानी का इंतजाम था और न ही सुरक्षात्मक प्रबंध किए गए थे। कहीं-कहीं तो मानक के अनुसार पौधरोपण के गड्ढे भी तैयार नहीं किए गए थे। सर्वे पूरा होने पर ही वह किस विभाग द्वारा लगाए गए पौधों ज्यादा नष्ट हुए बता सकते हैं।
अरविंद कुमार
डीएफओ, बांदा।
मेडिकल कॉलेज में हेलीपैड में लगे थे 100 पौधे, 50 ही बचे
बांदा। शहर के मेडिकल कॉलेज में लगातार तीन वर्षों से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। गत वर्ष मेडिकल कॉलेज को 1500 पौधे लगाने को दिए गए थे। मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक भवन और हेलीपैड पर पौधे रोपित किए गए। प्रशासनिक भवन में लगाए गए 50 में से 20 ने दम तोड़ दिया, जबकि हेलीपैड पर लगाए गए 100 पौधों में 50 पौधे नष्ट हो चुके हैं। शेष 50 ही लहलहा रहे हैं। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कौशल ने बताया कि पौधरोपण कराया गया था, कुछ पौधे पानी और देखरेख के अभाव में दम तोड़ दिए हैं, हालांकि दम तोड़ने वाले पौधों की संख्या काफी कम है। इस वर्ष भी पौधरोपण कराया है, उनमें बराबर खाद और पानी दिया जा रहा है।
शेखू पहाड़ में छह हजार रोपे गए थे पौधे एक भी नहीं बचा
करतल। ग्राम पंचायत नहरी का शेखू पहाड़ पर छह हजार पौधों का रोपण किया गया था। इसका नामों-निशान बाकी नहीं है। यह पौधरोपण ग्राम पंचायत नहरी और वन विभाग ने मिलकर किया था। वन विभाग की चौकी करतल क्षेत्र 2024-25 में करतल वन क्षेत्र के अंतर्गत 30 हेक्टेयर वन भूमि में पौधरोपण किया गया। वनरक्षक करतल अंकित कुमार ने बताया कि 10 फीसदी पौधे अधिक तापमान और पानी की कमी या प्राकृतिक आपदा के कारण मर जाते हैं। जिसकी कमी जुलाई माह में पूरी कर दी जाती है।
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जिले के पौधरोपण के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2025 में 64 लाख, वर्ष 2024 में 62 लाख व वर्ष 2023 में 63 लाख पौधों का रोपण किया गया था। गत वर्ष 64 लाख पौधों में वन विभाग ने 25 लाख 51 हजार, पर्यावरण विभाग ने 1390 लाख, ग्राम्य विकास विभाग 2234 लाख, पुलिस विभाग 1652 हजार, आवास विकास 13 हजार, औद्योगिक विकास विभाग 20 हजार, उद्योग विभाग 22 हजार, पशुपालन विभाग 19 हजार समेत 26 विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी गई थी।
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जिम्मेदारों ने पौधरोपण कराकर फिर पौधों की तरफ मुड़कर भी नहीं देखा। सबसे ज्यादा पौधों का नुकसान ग्राम्य विकास विभाग को दिए गए पौधों का आकलन किया जा रहा है। वन विभाग की फौरी रिपोर्ट के आकलन में 25 फीसदी पौधों के नष्ट होने का आकलन किया जा रहा है। जबकि वास्तविक आकलन धरातल पर किया जाए तो 50 फीसदी पौधे सूख गए। वन विभाग ने बताया कि पौधों के नष्ट होने के पीछे पानी न मिलना, तो तालाबों के किनारे कराए गए पौधरोपण में जाली आदि की सुरक्षा न होने से पशुओं के चरने, पौधे रोपने के लिए मानक के अनुसार गड्ढा न किए जाने का आकलन किया है।
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वन विभाग ने नष्ट हुए पौधों की जांच के लिए जिलास्तरीय वृक्षारोपण समिति का भी गठन किया है। यह समिति अपनी जांच कर रही है। जांच पूरी होने में अभी एक पखवाड़े का समय लग सकता है। हालांकि अब तक वन विभाग 25 फीसदी ही पौधों का नुकसान मान रही है।
गत वर्ष हुए पौधरोपण में 25 फीसदी पौधे नष्ट होने का आकलन है। अभी जांच चल रही है। पौधों के नष्ट होने की बड़ी वजह यह कि पौधों को ऐसी जगह पर रोप दिया गया जहां न तो पानी का इंतजाम था और न ही सुरक्षात्मक प्रबंध किए गए थे। कहीं-कहीं तो मानक के अनुसार पौधरोपण के गड्ढे भी तैयार नहीं किए गए थे। सर्वे पूरा होने पर ही वह किस विभाग द्वारा लगाए गए पौधों ज्यादा नष्ट हुए बता सकते हैं।
अरविंद कुमार
डीएफओ, बांदा।
मेडिकल कॉलेज में हेलीपैड में लगे थे 100 पौधे, 50 ही बचे
बांदा। शहर के मेडिकल कॉलेज में लगातार तीन वर्षों से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। गत वर्ष मेडिकल कॉलेज को 1500 पौधे लगाने को दिए गए थे। मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक भवन और हेलीपैड पर पौधे रोपित किए गए। प्रशासनिक भवन में लगाए गए 50 में से 20 ने दम तोड़ दिया, जबकि हेलीपैड पर लगाए गए 100 पौधों में 50 पौधे नष्ट हो चुके हैं। शेष 50 ही लहलहा रहे हैं। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कौशल ने बताया कि पौधरोपण कराया गया था, कुछ पौधे पानी और देखरेख के अभाव में दम तोड़ दिए हैं, हालांकि दम तोड़ने वाले पौधों की संख्या काफी कम है। इस वर्ष भी पौधरोपण कराया है, उनमें बराबर खाद और पानी दिया जा रहा है।
शेखू पहाड़ में छह हजार रोपे गए थे पौधे एक भी नहीं बचा
करतल। ग्राम पंचायत नहरी का शेखू पहाड़ पर छह हजार पौधों का रोपण किया गया था। इसका नामों-निशान बाकी नहीं है। यह पौधरोपण ग्राम पंचायत नहरी और वन विभाग ने मिलकर किया था। वन विभाग की चौकी करतल क्षेत्र 2024-25 में करतल वन क्षेत्र के अंतर्गत 30 हेक्टेयर वन भूमि में पौधरोपण किया गया। वनरक्षक करतल अंकित कुमार ने बताया कि 10 फीसदी पौधे अधिक तापमान और पानी की कमी या प्राकृतिक आपदा के कारण मर जाते हैं। जिसकी कमी जुलाई माह में पूरी कर दी जाती है।