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Banda News: 13 साल पुराने चोरी के मामले में दो आरोपी बरी
Fri, 19 Jun 2026 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 19 Jun 2026 12:16 AM IST
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बांदा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम) संजय कुमार सिंह (प्रथम) बांदा ने वर्ष 2013 के ट्रांसफार्मर चोरी के मामले में आरोपी महेश यादव और रज्जब खां उर्फ हुकमा को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने माना कि अभियोजन आरोपों को सिद्ध करने में असफल रहा।
अभियोजन के अनुसार तिंदवारी थानाक्षेत्र के ग्राम गोखरही निवासी रामभवन यादव ने आरोप लगाया था कि 8-9 मार्च 2013 की रात उनके निजी नलकूप पर लगे ट्रांसफार्मर से एल्युमिनियम तार और प्लेटें चोरी हुई थीं। मामले में 28 मार्च 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के दौरान महेश यादव निवासी जसईपुर और रज्जब खां उर्फ हुकमा निवासी सिंहपुर को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से ट्रांसफार्मर की सामग्री बरामद करने का दावा किया था।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि घटना के लगभग 18-20 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जिसका संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। वहीं, अभियोजन के प्रमुख गवाह कंचन यादव और अखिलेश गुप्ता ने अदालत में घटना का समर्थन नहीं किया और अभियोजन के कथन से मुकर गए। न्यायालय ने यह भी माना कि बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, बरामद सामान की विधिवत पहचान नहीं कराई गई और यह भी साबित नहीं हो सका कि बरामद सामग्री वही थी जो वादी के ट्रांसफार्मर से चोरी हुई थी।
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जांच में कई महत्वपूर्ण खामियां और विरोधाभास पाए गए। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को विद्युत अधिनियम की धारा 136(1) व 137 के आरोपों से बरी कर दिया।
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अभियोजन के अनुसार तिंदवारी थानाक्षेत्र के ग्राम गोखरही निवासी रामभवन यादव ने आरोप लगाया था कि 8-9 मार्च 2013 की रात उनके निजी नलकूप पर लगे ट्रांसफार्मर से एल्युमिनियम तार और प्लेटें चोरी हुई थीं। मामले में 28 मार्च 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के दौरान महेश यादव निवासी जसईपुर और रज्जब खां उर्फ हुकमा निवासी सिंहपुर को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से ट्रांसफार्मर की सामग्री बरामद करने का दावा किया था।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि घटना के लगभग 18-20 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई, जिसका संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। वहीं, अभियोजन के प्रमुख गवाह कंचन यादव और अखिलेश गुप्ता ने अदालत में घटना का समर्थन नहीं किया और अभियोजन के कथन से मुकर गए। न्यायालय ने यह भी माना कि बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, बरामद सामान की विधिवत पहचान नहीं कराई गई और यह भी साबित नहीं हो सका कि बरामद सामग्री वही थी जो वादी के ट्रांसफार्मर से चोरी हुई थी।
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जांच में कई महत्वपूर्ण खामियां और विरोधाभास पाए गए। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को विद्युत अधिनियम की धारा 136(1) व 137 के आरोपों से बरी कर दिया।