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Banda News: आवासीय विद्यालय में संदिग्ध हालात में दो छात्रों की मौत
Mon, 17 Aug 2026 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 17 Aug 2026 11:37 PM IST
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फोटो-6-मृतक नितिन। फाइल फोटो
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बांदा। शहर के झील का पुरवा स्थित बीएल विद्या मंदिर निजी आवासीय विद्यालय में रविवार रात दो छात्रों की हालत बिगड़ गई।
सोमवार को सुबह उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों को स्कूल स्टाफ अलग-अलग समय पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। परिजन का आरोप है कि छात्रों की मौत के बाद उन्हें सूचना दी गई। विद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन ने जमकर हंगामा काटा।
गिरवां थाना क्षेत्र के सरस्वाह गांव निवासी सुनील का बेटा नितिन (12) कक्षा छह में आवासीय छात्र था। रविवार रात करीब एक बजे उसे उल्टी और पेटदर्द की शिकायत हुई। स्टाफ उसे अस्पताल ले गया लेकिन कुछ देर बाद वापस विद्यालय ले आया। हालत में सुधार नहीं होने के बावजूद उसे सुबह करीब सात बजे जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हालांकि जिला अस्पताल में रात की कोई एंट्री नहीं है।
इसी तरह चिल्ला थाना क्षेत्र के महेंदु गांव निवासी पुष्कर उर्फ जयकिशोर का बेटा अरुण कुशवाहा (9) कक्षा दो में पढ़ता था। उसे सोमवार सुबह करीब चार बजे उल्टी और पेटदर्द हुआ। स्टाफ सुबह करीब छह बजे उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। रास्ते में उसने भी दम तोड़ दिया। सूचना पर तहसीलदार और बीएसए अव्यक्तराम जिला अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली।
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अधिकारियों ने विद्यालय पहुंचकर भी घटनाक्रम और व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई। वहीं विद्यालय प्रबंधक ओमप्रकाश का कहना था कि बच्चों के बीमार होने पर उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था। विद्यालय प्रशासन ने पूरी कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
उधर, सोमवार दोपहर करीब दो बजे विद्यालय के कक्षा चार के छात्र योगेश शिवहरे पुत्र चंद्रपाल सिंह निवासी गिरवां की भी हालत बिगड़ गई। स्टाफ उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां उसका उपचार चल रहा है। फिलहाल उसकी हालत में सुधार बताया गया है।
विद्यालय में रविवार शाम मोमोज और फिंगर चिप्स मंगाए गए थे। बताया जा रहा है कि अधिकांश बच्चों ने इसे खाया था। इसके बाद छात्रों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। विद्यालय का एक छात्र ही महाराणा प्रताप चौक से दोनों चीजें लेकर आया था। ऐसे में खाद्य पदार्थों से फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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रात में घर सूचना देने को कहते रहे बच्चे, नहीं कराई बात
नितिन के साथ उसका छोटा भाई हर्ष कक्षा एक में इसी विद्यालय में आवासीय छात्र है। वहीं अरुण का बड़ा भाई उत्कर्ष कक्षा पांच में पढ़ता है। दोनों के भाइयों ने परिजन को बताया कि उन्होंने रात में ही घर पर उनकी तबीयत खराब होने की सूचना देने को कहा था लेकिन स्कूल के बड़े सर ने बात नहीं कराई। सोमवार सुबह जिला अस्पताल से परिजन को बच्चों के बीमार होने की सूचना दी गई। परिजन अस्पताल पहुंचे तो दोनों बच्चों को मृत अवस्था में पाया। परिजन ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
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वर्जन
आवासीय विद्यालय में संदिग्ध हालात में दो बच्चों की मौत हुई है। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।-शिवराज, अपर पुलिस अधीक्षक
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दो बच्चों की मौत की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। बेसिक शिक्षा विभाग से विद्यालय को कक्षा 8 तक की मान्यता प्रदान की गई है। आवासीय संचालन के संबंध में भी जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और खाद्य पदार्थों की जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-अमित आसेरी, डीएम बांदा
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छटपटाया, नीचे गिरा और मौत की नींद सो गया नितिन
बांदा। बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की संदिग्ध हालात में मौत के बाद छात्रावास में रहने वाले अन्य बच्चे भी सहमे हुए हैं।
नितिन की मौत के बाद उसके खाली पड़े बेड को देखकर साथी छात्रों के चेहरों पर डर साफ नजर आ रहा। कक्षा छह का छात्र विपिन रात में नितिन की तबीयत बिगड़ने से लेकर उसकी मौत तक का घटनाक्रम बता रहा है। उसके अनुसार छटपटाते हुए नितिन तख्त से नीचे गिरा और हमेशा के लिए मौत की नींद सो गया।
विपिन के मुताबिक रात में नितिन को उल्टी और पेट दर्द हुआ था। इसके बाद बड़े सर के साथ उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। कुछ देर बाद नितिन को वापस छात्रावास लाया गया। इस दौरान उसकी हालत ठीक नहीं थी। वह कभी ऐंठता तो कभी हाथ-पैर पटकता रहा। विपिन और उसके साथियों ने कई बार उससे पूछा लेकिन नितिन कुछ बोल नहीं पाया। उसने केवल पानी पिलाने का इशारा किया।
यह भी बताया कि कुछ देर बाद नितिन अचानक छटपटाते हुए तख्त से नीचे गिर गया। साथी छात्रों ने उसे उठाकर दोबारा तख्त पर लिटाया। इसके बाद वह सो गया। बच्चों को तब यह अंदाजा नहीं था कि नितिन हमेशा के लिए सो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नितिन का छोटा भाई हर्ष भी वहीं मौजूद था। हर्ष कक्षा एक में पढ़ता है। दोनों भाई बीते वर्ष से विद्यालय में पढ़ रहे थे।
सोमवार को दिनभर जांच-पड़ताल के दौरान भी बच्चे डरे-सहमे नजर आए। वहीं बच्चों के इन बयानों के बाद विद्यालय में रात के समय बच्चों की निगरानी, उपचार और परिजनों को सूचना देने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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अरुण का भाई बोला, बड़े सर ने नहीं करने दिया फोन
कक्षा दो के छात्र अरुण की मौत के बाद उसके परिजन विद्यालय पहुंचे। उनके साथ अरुण का भाई उत्कर्ष भी था, जो इसी विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ता है। उत्कर्ष ने बताया कि रात में अरुण की हालत बिगड़ने पर वह उसके साथ था। उसने वार्डन से घर पर बात कराने के लिए कहा था लेकिन आरोप है कि बड़े सर ने फोन कराने से मना कर दिया।
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अरुण के परिजन ने किया हंगामा
रविवार को मेडिकल कॉलेज में अरुण का शव देखने के बाद परिजन का सब्र जवाब दे गया। इसके बाद वे सीधे विद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने हंगामा काटा। उनका आरोप था कि आखिर क्यों उन्हें सही समय पर सूचना नहीं दी गई। उनके परिवार के कई सदस्य बांदा में ही रहते हैं, अगर समय पर उपचार मिल जाता तो उनके बेटे की जान बच जाती। हालांकि यहां उनके सवालों का जवाब देने के लिए कोई नहीं मिला।
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सोमवार को सुबह उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों को स्कूल स्टाफ अलग-अलग समय पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। परिजन का आरोप है कि छात्रों की मौत के बाद उन्हें सूचना दी गई। विद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन ने जमकर हंगामा काटा।
गिरवां थाना क्षेत्र के सरस्वाह गांव निवासी सुनील का बेटा नितिन (12) कक्षा छह में आवासीय छात्र था। रविवार रात करीब एक बजे उसे उल्टी और पेटदर्द की शिकायत हुई। स्टाफ उसे अस्पताल ले गया लेकिन कुछ देर बाद वापस विद्यालय ले आया। हालत में सुधार नहीं होने के बावजूद उसे सुबह करीब सात बजे जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हालांकि जिला अस्पताल में रात की कोई एंट्री नहीं है।
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इसी तरह चिल्ला थाना क्षेत्र के महेंदु गांव निवासी पुष्कर उर्फ जयकिशोर का बेटा अरुण कुशवाहा (9) कक्षा दो में पढ़ता था। उसे सोमवार सुबह करीब चार बजे उल्टी और पेटदर्द हुआ। स्टाफ सुबह करीब छह बजे उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। रास्ते में उसने भी दम तोड़ दिया। सूचना पर तहसीलदार और बीएसए अव्यक्तराम जिला अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली।
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अधिकारियों ने विद्यालय पहुंचकर भी घटनाक्रम और व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई। वहीं विद्यालय प्रबंधक ओमप्रकाश का कहना था कि बच्चों के बीमार होने पर उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया था। विद्यालय प्रशासन ने पूरी कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
उधर, सोमवार दोपहर करीब दो बजे विद्यालय के कक्षा चार के छात्र योगेश शिवहरे पुत्र चंद्रपाल सिंह निवासी गिरवां की भी हालत बिगड़ गई। स्टाफ उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां उसका उपचार चल रहा है। फिलहाल उसकी हालत में सुधार बताया गया है।
विद्यालय में रविवार शाम मोमोज और फिंगर चिप्स मंगाए गए थे। बताया जा रहा है कि अधिकांश बच्चों ने इसे खाया था। इसके बाद छात्रों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। विद्यालय का एक छात्र ही महाराणा प्रताप चौक से दोनों चीजें लेकर आया था। ऐसे में खाद्य पदार्थों से फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
रात में घर सूचना देने को कहते रहे बच्चे, नहीं कराई बात
नितिन के साथ उसका छोटा भाई हर्ष कक्षा एक में इसी विद्यालय में आवासीय छात्र है। वहीं अरुण का बड़ा भाई उत्कर्ष कक्षा पांच में पढ़ता है। दोनों के भाइयों ने परिजन को बताया कि उन्होंने रात में ही घर पर उनकी तबीयत खराब होने की सूचना देने को कहा था लेकिन स्कूल के बड़े सर ने बात नहीं कराई। सोमवार सुबह जिला अस्पताल से परिजन को बच्चों के बीमार होने की सूचना दी गई। परिजन अस्पताल पहुंचे तो दोनों बच्चों को मृत अवस्था में पाया। परिजन ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
वर्जन
आवासीय विद्यालय में संदिग्ध हालात में दो बच्चों की मौत हुई है। दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।-शिवराज, अपर पुलिस अधीक्षक
दो बच्चों की मौत की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। बेसिक शिक्षा विभाग से विद्यालय को कक्षा 8 तक की मान्यता प्रदान की गई है। आवासीय संचालन के संबंध में भी जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और खाद्य पदार्थों की जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-अमित आसेरी, डीएम बांदा
छटपटाया, नीचे गिरा और मौत की नींद सो गया नितिन
बांदा। बीएल विद्या मंदिर आवासीय विद्यालय में दो छात्रों की संदिग्ध हालात में मौत के बाद छात्रावास में रहने वाले अन्य बच्चे भी सहमे हुए हैं।
नितिन की मौत के बाद उसके खाली पड़े बेड को देखकर साथी छात्रों के चेहरों पर डर साफ नजर आ रहा। कक्षा छह का छात्र विपिन रात में नितिन की तबीयत बिगड़ने से लेकर उसकी मौत तक का घटनाक्रम बता रहा है। उसके अनुसार छटपटाते हुए नितिन तख्त से नीचे गिरा और हमेशा के लिए मौत की नींद सो गया।
विपिन के मुताबिक रात में नितिन को उल्टी और पेट दर्द हुआ था। इसके बाद बड़े सर के साथ उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। कुछ देर बाद नितिन को वापस छात्रावास लाया गया। इस दौरान उसकी हालत ठीक नहीं थी। वह कभी ऐंठता तो कभी हाथ-पैर पटकता रहा। विपिन और उसके साथियों ने कई बार उससे पूछा लेकिन नितिन कुछ बोल नहीं पाया। उसने केवल पानी पिलाने का इशारा किया।
यह भी बताया कि कुछ देर बाद नितिन अचानक छटपटाते हुए तख्त से नीचे गिर गया। साथी छात्रों ने उसे उठाकर दोबारा तख्त पर लिटाया। इसके बाद वह सो गया। बच्चों को तब यह अंदाजा नहीं था कि नितिन हमेशा के लिए सो गया है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नितिन का छोटा भाई हर्ष भी वहीं मौजूद था। हर्ष कक्षा एक में पढ़ता है। दोनों भाई बीते वर्ष से विद्यालय में पढ़ रहे थे।
सोमवार को दिनभर जांच-पड़ताल के दौरान भी बच्चे डरे-सहमे नजर आए। वहीं बच्चों के इन बयानों के बाद विद्यालय में रात के समय बच्चों की निगरानी, उपचार और परिजनों को सूचना देने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अरुण का भाई बोला, बड़े सर ने नहीं करने दिया फोन
कक्षा दो के छात्र अरुण की मौत के बाद उसके परिजन विद्यालय पहुंचे। उनके साथ अरुण का भाई उत्कर्ष भी था, जो इसी विद्यालय में कक्षा पांच में पढ़ता है। उत्कर्ष ने बताया कि रात में अरुण की हालत बिगड़ने पर वह उसके साथ था। उसने वार्डन से घर पर बात कराने के लिए कहा था लेकिन आरोप है कि बड़े सर ने फोन कराने से मना कर दिया।
अरुण के परिजन ने किया हंगामा
रविवार को मेडिकल कॉलेज में अरुण का शव देखने के बाद परिजन का सब्र जवाब दे गया। इसके बाद वे सीधे विद्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने हंगामा काटा। उनका आरोप था कि आखिर क्यों उन्हें सही समय पर सूचना नहीं दी गई। उनके परिवार के कई सदस्य बांदा में ही रहते हैं, अगर समय पर उपचार मिल जाता तो उनके बेटे की जान बच जाती। हालांकि यहां उनके सवालों का जवाब देने के लिए कोई नहीं मिला।

फोटो-6-मृतक नितिन। फाइल फोटो

फोटो-6-मृतक नितिन। फाइल फोटो

फोटो-6-मृतक नितिन। फाइल फोटो

फोटो-6-मृतक नितिन। फाइल फोटो