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Banda News: मोटर खराब होने जलापूर्ति बाधित, 30 हजार लोग पानी को परेशान
Sat, 20 Jun 2026 11:43 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 20 Jun 2026 11:43 PM IST
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शेरपुर गांव में पानी के लिए हैंडपंप पर इंतजार करते ग्रामीण। संवाद
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खत्री पहाड़। मोटर खराब होने से क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांवों में बीते एक सप्ताह से जलापूर्ति ठप है। इससे ग्रामीण परेशान हैं। भीषण गर्मी में पेयजल के लिए उन्हें भटकना पड़ता है। कई गांवों में हैंडपंपों पर भीड़ जुटती है, जिससे पानी भरने के लिए लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
क्षेत्र के देवीजी, शेरपुर, पिथौराबाद, काजीपुर, मुरादपुर, खानपुर सहित अन्य गांवों में करीब 30 हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बीते एक सप्ताह से गांवों में जलापूर्ति बाधित है। जल जीवन मिशन के ट्यूबवेल की मोटर खराब होने से यह हालात हुए हैं। शेरपुर, देवीजी गांव के सुरेंद्र गौतम, मोनू शुक्ला आदि ने एक-दो दिन में यदि आपूर्ति हुई भी तो 10 से 15 मिनट ही पानी मिल पाता है। पानी न आने से हैंडपंप पर लाइन लगानी पड़ती है।
खानपुर के उत्तम सिंह, छोटा, प्रीतम ने बताया कि कुछ लोग अपने खर्च पर पानी के टैंकर मंगाकर काम चलाते हैं। शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी कोई जवाब नहीं देते। वहीं जल निगम के जेई अमित शुक्ला ने बताया कि बोर की मोटर खराब है। उसे निकालकर बनवाने के लिए भेजा गया है। यमुना नदी से पानी आता था, लेकिन बिजली आपूर्ति सही न होने से वहां से भी पानी आना बंद है।
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एक माह से नहीं हुई जलापूर्ति, लोगों के हलक सूखे
बदौसा। भीषण गर्मी के बीच बदौसा व दुबरिया गांवों में पेयजल संकट भयावह रूप ले चुका है। हालात इतने गंभीर हैं कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों ने जल संस्थान और जल जीवन मिशन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि विभागीय अव्यवस्था से करीब 30 हजार से अधिक आबादी जल संकट झेलने को मजबूर है। बदौसा के शिवमोहन शुक्ला, रामजियावन सिंह ने बताया कि पहले सुबह नियमित जलापूर्ति होती थी, लेकिन पिछले कई माह से सप्लाई पूरी तरह से बंद है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के अधिकारियों ने तुर्रा पुल के पास बदौसा की मुख्य पाइप लाइन से अपनी अलग लाइन जोड़ दी है, इससे बदौसा क्षेत्र के हिस्से का पानी दूसरी तरफ चला जाता है। क्षेत्र में मीठे पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। ऐसे में सरकारी जलापूर्ति ही लोगों का सहारा है, लेकिन उसकी स्थिति भी चरमराई है।
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वर्जन
15 दिन पूर्व बोर में 40 एचपी का मोटर गिरने से आपूर्ति बाधित हुई थी। मोटर को निकालकर मरम्मत के लिए भेजा गया है। ऐसे क्षेत्र जहां पाइप लाइन का पानी नहीं पहुंच रहा, वहां टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति की जाती है। - जानकी शरण त्रिपाठी, जेई, जल संस्थान।
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क्षेत्र के देवीजी, शेरपुर, पिथौराबाद, काजीपुर, मुरादपुर, खानपुर सहित अन्य गांवों में करीब 30 हजार की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीणों ने बताया कि बीते एक सप्ताह से गांवों में जलापूर्ति बाधित है। जल जीवन मिशन के ट्यूबवेल की मोटर खराब होने से यह हालात हुए हैं। शेरपुर, देवीजी गांव के सुरेंद्र गौतम, मोनू शुक्ला आदि ने एक-दो दिन में यदि आपूर्ति हुई भी तो 10 से 15 मिनट ही पानी मिल पाता है। पानी न आने से हैंडपंप पर लाइन लगानी पड़ती है।
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खानपुर के उत्तम सिंह, छोटा, प्रीतम ने बताया कि कुछ लोग अपने खर्च पर पानी के टैंकर मंगाकर काम चलाते हैं। शिकायत करने पर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी कोई जवाब नहीं देते। वहीं जल निगम के जेई अमित शुक्ला ने बताया कि बोर की मोटर खराब है। उसे निकालकर बनवाने के लिए भेजा गया है। यमुना नदी से पानी आता था, लेकिन बिजली आपूर्ति सही न होने से वहां से भी पानी आना बंद है।
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एक माह से नहीं हुई जलापूर्ति, लोगों के हलक सूखे
बदौसा। भीषण गर्मी के बीच बदौसा व दुबरिया गांवों में पेयजल संकट भयावह रूप ले चुका है। हालात इतने गंभीर हैं कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों ने जल संस्थान और जल जीवन मिशन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि विभागीय अव्यवस्था से करीब 30 हजार से अधिक आबादी जल संकट झेलने को मजबूर है। बदौसा के शिवमोहन शुक्ला, रामजियावन सिंह ने बताया कि पहले सुबह नियमित जलापूर्ति होती थी, लेकिन पिछले कई माह से सप्लाई पूरी तरह से बंद है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के अधिकारियों ने तुर्रा पुल के पास बदौसा की मुख्य पाइप लाइन से अपनी अलग लाइन जोड़ दी है, इससे बदौसा क्षेत्र के हिस्से का पानी दूसरी तरफ चला जाता है। क्षेत्र में मीठे पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। ऐसे में सरकारी जलापूर्ति ही लोगों का सहारा है, लेकिन उसकी स्थिति भी चरमराई है।
वर्जन
15 दिन पूर्व बोर में 40 एचपी का मोटर गिरने से आपूर्ति बाधित हुई थी। मोटर को निकालकर मरम्मत के लिए भेजा गया है। ऐसे क्षेत्र जहां पाइप लाइन का पानी नहीं पहुंच रहा, वहां टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति की जाती है। - जानकी शरण त्रिपाठी, जेई, जल संस्थान।