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Banda News: गेहूं का दाना पड़ने लगा काला, एक बीघा में ढाई क्विटंल तक सिमटा गेहूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 06 Apr 2026 12:56 AM IST
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पैलानी के खप्टिहाकलां गांव में फसल सुखाती महिला किसान। संवाद
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बांदा। आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। बारिश की वजह से बार-बार गेहूं की फसल भीगने से दाना भी अब काला पड़ने लगा है। एक बीघे में पांच से छह क्विंटल निकलने वाला गेहूं आधा होकर ढाई क्विंटल में सिमट गया है। रात में हुई तेज बारिश और आंधी के बाद सुबह से ही किसान खेतों में डेरा डाले रहे और बची फसल को समेटने में लगे रहे। वहीं रविवार को धूप निकलने पर किसानों ने अपनी फसल को खेत में बिखेर कर सुखाने की कवायद की। जनपद के पैलानी, जसपुरा, नरैनी, करतल, गिरवां, खत्रीपहाड़, तिंदवारी सभी जगह यह नजारे आम रहे। पेश है बारिश और आंधी से नुकसान की रिपोर्ट......
बार-बार भीग रही फसल
करतल। नरैनी तहसील क्षेत्र के नहरी गांव के मजरा बैदन पुरवा निवासी किसान इंद्रपाल मिश्रा, पप्पू मिश्रा, कमलेश प्रजापति आदि ने बताया कि खेतों में उनकी गेहूं की फसल कटी हुई पड़ी है। उसमें बारिश से भीगने की वजह से दीमक लग रही है। बार-बार फसल भीगने से गेहूं का दाना भी काला पड़ने लगा है। एक बीघे में सिंचाई, बीज, ट्रैक्टर से बोआई जोताई व थ्रेसिंग की कुल खर्चा 6800 रुपये के करीब पहुंचता है। जबकि पैदावार 6200 रुपये की हो रही है। इससे किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है। इसी तरह से बिहरल्का गांव के बहादुर सिंह, कुंवर सिंह, समर सिंह, वीरेंद्र सिंह, मान सिंह, अमर सिंह आदि ने बताया कि उनकी फसलों में ज्यादातर दीमक लग चुका है। चना, सरसों में फफूंद लग रहा है। पुंगरी गांव के किसान संतोष कुमार, सुरेश कुमार, अशोक कुमार, जयप्रकाश, सुमित द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल बोई थी, अब उनके सामने कर्ज उतारने की समस्या है। (संवाद)
आंधी से उड़ी चने की फसल, गेहूं भी भीगा
पैलानी। पैलानी क्षेत्र के खप्टिहा कलां गांव के किसान सत्ता गुप्ता ने बताया कि उनकी चने की फसल खेतों में पड़ी थी, तेज आंधी से उड़ गई। किसान बच्चू शुक्ला, रामकिशोर प्रजापति, विष्णु यादव, सुशील पांडेय आदि ने ने बताया कि रात में हुई बारिश से गेहूं की खड़ी फसल भीग गई हैं। इनकी कतराई के लिए इंतजार करना पड़ेगा। (संवाद)
आधी कटी फसल भीगी, शेष आंधी से चौपट
खत्री पहाड़। गिरवां क्षेत्र के खानपुर में 500 बीघे से भी ज्यादा में गेहूं की फसल को आंधी और बारिश से नुकसान हुआ है। खानपुर के किसान प्रीतम सिंह, राम प्रताप राजपूत, राजेश सिंह, छोटे लाल आदि ने बताया कि उन्हें बारिश से खासा नुकसान हुआ है। राजेश सिंह ने बताया कि उन्होंने 17 बीघा में गेहूं बोया था। पूरी फसल पानी से भीग गई। प्रीतम सिंह ने बताया कि उन्होंने 40 बीघा फसल में आधी काट पाए थे, शेष फसल तैयार खड़ी थी। आंधी में फसल बिछ गई, कटी फसल पानी में भीग गई। (संवाद)
तिरपाल से फसल ढकी वह भी उड़ गया
तिंदवारी। अप्रैल के पहले सप्ताह में मौसम की मार से परेशान मिरगहनी गांव के किसान विमल द्विवेदी, विनोद कुमार ,राम वर्मा, गया कुशवाहा, दिलीप, कैलाश सेंगर ने बताया कि अपनी कटी हुई फसलों को बचाने के लिए तिरपाल आदि से ढकने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेज हवाओं के कारण तिरपाल भी उड़ गए। जौहरपुर के किसान बिंदा सिंह ,शिवबरन निषाद, जय नारायण, रामस्वरूप, बाबादीन ने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल काटने के बाद कुटाई के लिए इकट्ठा करके रखी थी। शुक्रवार शाम से रविवार सुबह तक लगातार हुई बारिश से यह पूरी तरह भीग गई है।(संवाद)
नींबू और आम को भी हुआ नुकसान
अतर्रा। तहसील क्षेत्र के गांवों में शनिवार देर रात बेमौसम तेज आंधी और बारिश आम, नींबू को भी नुकसान हुआ है। तेज आंधी और बारिश होने से आम और नींबू के पेड़ों से छोटे-छोटे फल टूटकर गिर गए। इस बार नींबू और आम की फसल से बेहद आमदनी होने की उम्मीद थी। जिसे आंधी और बारिश ने उम्मीदों में पानी फेर दिया है। (संवाद)
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जिन किसानों का बीमा है वह किसान 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी को टोल फ्री नंबर से फोन करें और उनको अपना नुकसान बताएं। बीमा कंपनी के लोग आएंगे और उनकी स्थिति जानेंगे। जिनका बीमा नहीं है वह नरैनी ब्लॉक में जाकर संबंधित बीडीओ को लिखित रूप इस समस्या से अवगत कराएं। जिन किसानों का 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान है उनकी सहायता की जाएगी। उन्होंने बताया कि आगामी आठ अप्रैल को फिर मौसम खराब का अलर्ट है।
-संजय कुमार
जिला कृषि अधिकारी, बांदा।
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अप्रैल माह में आठ से 10 दिन मौसम खराब रहेगा। बेहतर है कि किसान अपनी फसल को बचाने का उपाय कर लें। आंधी और बारिश आने वाले दिनों में फिर हो सकती है।
-डॉ. दिनेश शाहा
मौसम एवं कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय, बांदा।
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फिर से हुई ओलावृष्टि, किसानों की कमर टूटी
फोटो 26- परसौंडा गांव में ओलावृष्टि से गिरी गेहूं की फसल। संवाद
तिंदवारी। रविवार की शाम पांच बजे के लगभग हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया। अचानक बदले मौसम ने किसानों को गहरा नुकसान पहुंचाया है। तेज बारिश के साथ गिरे बड़े ओलों ने खेतों में खड़ी रबी की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। बारिश और ओलावृष्टि के दौरान खेतों में चारों तरफ सफेद चादर बिछ गई। इससे चना, सरसों और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों को भारी क्षति हुई है। ओला का सबसे ज्यादा प्रभाव तिंदवारी, परसौंडा, मिरगहनी, बरेठी, बछेउरा, गजनी, मुंगूस सहित करीब एक दर्जन से गांवों में पड़ा है। परसौंडा गांव के किसान अरुण बिहारी मिश्रा, सुभाष मिश्रा, कल्लू, साकेत आदि ने बताया कि बीते पांच दिनों से लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलों से अब लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।
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बार-बार भीग रही फसल
करतल। नरैनी तहसील क्षेत्र के नहरी गांव के मजरा बैदन पुरवा निवासी किसान इंद्रपाल मिश्रा, पप्पू मिश्रा, कमलेश प्रजापति आदि ने बताया कि खेतों में उनकी गेहूं की फसल कटी हुई पड़ी है। उसमें बारिश से भीगने की वजह से दीमक लग रही है। बार-बार फसल भीगने से गेहूं का दाना भी काला पड़ने लगा है। एक बीघे में सिंचाई, बीज, ट्रैक्टर से बोआई जोताई व थ्रेसिंग की कुल खर्चा 6800 रुपये के करीब पहुंचता है। जबकि पैदावार 6200 रुपये की हो रही है। इससे किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है। इसी तरह से बिहरल्का गांव के बहादुर सिंह, कुंवर सिंह, समर सिंह, वीरेंद्र सिंह, मान सिंह, अमर सिंह आदि ने बताया कि उनकी फसलों में ज्यादातर दीमक लग चुका है। चना, सरसों में फफूंद लग रहा है। पुंगरी गांव के किसान संतोष कुमार, सुरेश कुमार, अशोक कुमार, जयप्रकाश, सुमित द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल बोई थी, अब उनके सामने कर्ज उतारने की समस्या है। (संवाद)
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आंधी से उड़ी चने की फसल, गेहूं भी भीगा
पैलानी। पैलानी क्षेत्र के खप्टिहा कलां गांव के किसान सत्ता गुप्ता ने बताया कि उनकी चने की फसल खेतों में पड़ी थी, तेज आंधी से उड़ गई। किसान बच्चू शुक्ला, रामकिशोर प्रजापति, विष्णु यादव, सुशील पांडेय आदि ने ने बताया कि रात में हुई बारिश से गेहूं की खड़ी फसल भीग गई हैं। इनकी कतराई के लिए इंतजार करना पड़ेगा। (संवाद)
आधी कटी फसल भीगी, शेष आंधी से चौपट
खत्री पहाड़। गिरवां क्षेत्र के खानपुर में 500 बीघे से भी ज्यादा में गेहूं की फसल को आंधी और बारिश से नुकसान हुआ है। खानपुर के किसान प्रीतम सिंह, राम प्रताप राजपूत, राजेश सिंह, छोटे लाल आदि ने बताया कि उन्हें बारिश से खासा नुकसान हुआ है। राजेश सिंह ने बताया कि उन्होंने 17 बीघा में गेहूं बोया था। पूरी फसल पानी से भीग गई। प्रीतम सिंह ने बताया कि उन्होंने 40 बीघा फसल में आधी काट पाए थे, शेष फसल तैयार खड़ी थी। आंधी में फसल बिछ गई, कटी फसल पानी में भीग गई। (संवाद)
तिरपाल से फसल ढकी वह भी उड़ गया
तिंदवारी। अप्रैल के पहले सप्ताह में मौसम की मार से परेशान मिरगहनी गांव के किसान विमल द्विवेदी, विनोद कुमार ,राम वर्मा, गया कुशवाहा, दिलीप, कैलाश सेंगर ने बताया कि अपनी कटी हुई फसलों को बचाने के लिए तिरपाल आदि से ढकने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेज हवाओं के कारण तिरपाल भी उड़ गए। जौहरपुर के किसान बिंदा सिंह ,शिवबरन निषाद, जय नारायण, रामस्वरूप, बाबादीन ने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल काटने के बाद कुटाई के लिए इकट्ठा करके रखी थी। शुक्रवार शाम से रविवार सुबह तक लगातार हुई बारिश से यह पूरी तरह भीग गई है।(संवाद)
नींबू और आम को भी हुआ नुकसान
अतर्रा। तहसील क्षेत्र के गांवों में शनिवार देर रात बेमौसम तेज आंधी और बारिश आम, नींबू को भी नुकसान हुआ है। तेज आंधी और बारिश होने से आम और नींबू के पेड़ों से छोटे-छोटे फल टूटकर गिर गए। इस बार नींबू और आम की फसल से बेहद आमदनी होने की उम्मीद थी। जिसे आंधी और बारिश ने उम्मीदों में पानी फेर दिया है। (संवाद)
जिन किसानों का बीमा है वह किसान 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी को टोल फ्री नंबर से फोन करें और उनको अपना नुकसान बताएं। बीमा कंपनी के लोग आएंगे और उनकी स्थिति जानेंगे। जिनका बीमा नहीं है वह नरैनी ब्लॉक में जाकर संबंधित बीडीओ को लिखित रूप इस समस्या से अवगत कराएं। जिन किसानों का 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान है उनकी सहायता की जाएगी। उन्होंने बताया कि आगामी आठ अप्रैल को फिर मौसम खराब का अलर्ट है।
-संजय कुमार
जिला कृषि अधिकारी, बांदा।
अप्रैल माह में आठ से 10 दिन मौसम खराब रहेगा। बेहतर है कि किसान अपनी फसल को बचाने का उपाय कर लें। आंधी और बारिश आने वाले दिनों में फिर हो सकती है।
-डॉ. दिनेश शाहा
मौसम एवं कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालय, बांदा।
फिर से हुई ओलावृष्टि, किसानों की कमर टूटी
फोटो 26- परसौंडा गांव में ओलावृष्टि से गिरी गेहूं की फसल। संवाद
तिंदवारी। रविवार की शाम पांच बजे के लगभग हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया। अचानक बदले मौसम ने किसानों को गहरा नुकसान पहुंचाया है। तेज बारिश के साथ गिरे बड़े ओलों ने खेतों में खड़ी रबी की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। बारिश और ओलावृष्टि के दौरान खेतों में चारों तरफ सफेद चादर बिछ गई। इससे चना, सरसों और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों को भारी क्षति हुई है। ओला का सबसे ज्यादा प्रभाव तिंदवारी, परसौंडा, मिरगहनी, बरेठी, बछेउरा, गजनी, मुंगूस सहित करीब एक दर्जन से गांवों में पड़ा है। परसौंडा गांव के किसान अरुण बिहारी मिश्रा, सुभाष मिश्रा, कल्लू, साकेत आदि ने बताया कि बीते पांच दिनों से लगातार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलों से अब लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

पैलानी के खप्टिहाकलां गांव में फसल सुखाती महिला किसान। संवाद

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पैलानी के खप्टिहाकलां गांव में फसल सुखाती महिला किसान। संवाद

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