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Banda News: गेहूं खरीद ने 10 वर्षों का तोड़ा रिकॉर्ड
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फोटो - 14 मंडी समिति में यूपीएसएस के क्रय केंद्र में पसरा सन्नाटा।
- सात हजार किसानों ने बेचा 88.44 करोड़ का गेहूं, क्रय केंद्रों में किसानों का 18 करोड़ रुपये बकाया
अव्यवस्थाओं के बावजूद खरीद लक्ष्य से 104 फीसदी रही
- संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। जिले में इस वर्ष गेहूं की सरकारी खरीद ने 10 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद खरीद लक्ष्य से 104 फीसदी अधिक रही। कुल 7415 किसानों ने 88 करोड़ 44 लाख रुपये का गेहूं बेचा जिसमें से 70 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
गेहूं की सरकारी खरीद पहली मार्च से शुरू हुई थी जो सोमवार को बंद हो गई। खरीद के शुरुआती दौर में बोरों की कमी जैसी समस्याएं आईं लेकिन बाद में गेहूं के उठान में देरी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी। जिला विपणन अधिकारी रामानंद के अनुसार जिले में 32,500 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 33,952 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया जोकि 104 फीसदी है। यह खरीद पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है।
भुगतान प्रक्रिया और बकाया
अधिकांश किसानों को अधिकतम दो दिनों के भीतर भुगतान कर दिया गया है। समर्थन मूल्य 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सात हजार से अधिक किसानों ने अपना गेहूं बेचा है। कुल 88 करोड़ 44 लाख रुपये के गेहूं की खरीद हुई। शेष किसानों का भुगतान एक-दो दिनों में डीबीटी से उनके खातों में भेज दिया जाएगा। कुछ किसानों के भुगतान में देरी का कारण उनके बैंक खातों का अपडेट न होना बताया जा रहा है। गेहूं क्रय एजेंसियों ने ऐसे किसानों से अपने खातों को अपडेट कराने का आग्रह किया है ताकि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
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मुख्य बिंदु
कुल खरीद : 33952 मीट्रिक टन (लक्ष्य का 104%)
किसानों की संख्या : 7415
कुल मूल्य : 88.44 करोड़ रुपये
भुगतान किया : 70 करोड़ रुपये से अधिक
समर्थन मूल्य : 2625 रुपये प्रति क्विंटल
पल्लेदारी : 20 रुपये प्रति क्विंटल
भुगतान अवधि : अधिकतम 2 दिन
- सात हजार किसानों ने बेचा 88.44 करोड़ का गेहूं, क्रय केंद्रों में किसानों का 18 करोड़ रुपये बकाया
अव्यवस्थाओं के बावजूद खरीद लक्ष्य से 104 फीसदी रही
- संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। जिले में इस वर्ष गेहूं की सरकारी खरीद ने 10 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद खरीद लक्ष्य से 104 फीसदी अधिक रही। कुल 7415 किसानों ने 88 करोड़ 44 लाख रुपये का गेहूं बेचा जिसमें से 70 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।
गेहूं की सरकारी खरीद पहली मार्च से शुरू हुई थी जो सोमवार को बंद हो गई। खरीद के शुरुआती दौर में बोरों की कमी जैसी समस्याएं आईं लेकिन बाद में गेहूं के उठान में देरी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी। जिला विपणन अधिकारी रामानंद के अनुसार जिले में 32,500 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 33,952 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया जोकि 104 फीसदी है। यह खरीद पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है।
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भुगतान प्रक्रिया और बकाया
अधिकांश किसानों को अधिकतम दो दिनों के भीतर भुगतान कर दिया गया है। समर्थन मूल्य 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सात हजार से अधिक किसानों ने अपना गेहूं बेचा है। कुल 88 करोड़ 44 लाख रुपये के गेहूं की खरीद हुई। शेष किसानों का भुगतान एक-दो दिनों में डीबीटी से उनके खातों में भेज दिया जाएगा। कुछ किसानों के भुगतान में देरी का कारण उनके बैंक खातों का अपडेट न होना बताया जा रहा है। गेहूं क्रय एजेंसियों ने ऐसे किसानों से अपने खातों को अपडेट कराने का आग्रह किया है ताकि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य बिंदु
कुल खरीद : 33952 मीट्रिक टन (लक्ष्य का 104%)
किसानों की संख्या : 7415
कुल मूल्य : 88.44 करोड़ रुपये
भुगतान किया : 70 करोड़ रुपये से अधिक
समर्थन मूल्य : 2625 रुपये प्रति क्विंटल
पल्लेदारी : 20 रुपये प्रति क्विंटल
भुगतान अवधि : अधिकतम 2 दिन