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Banda News: घरों के ऊपर झूल रहे बिजली के तार तो अपनी सुरक्षा खुद करें
Mon, 10 Aug 2026 10:34 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 10 Aug 2026 10:34 PM IST
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फोटो 10- तिंदवारी के माटा गांव में मकानों के ऊपर से निकला बिजली की तार। संवाद
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बांदा। अगर आपके मोहल्ले में बिजली के तार छत के ऊपर झूल रहे हैं तो अपनी सुरक्षा खुद ही करें। बिजली निगम का कहना है कि इन्हें हटाने के लिए उनके पास अलग से कोई बजट नहीं है।
रविवार की रात शहर के गायत्री नगर में मकान की छत को लगभग छू रहे तारों से करंट उतर आया। जिससे कि एक-एक कर दर्जनों घरों में उपकरण फुंक गए। यह बानगी भर है। कमोबेश हर मोहल्ले में बिजली के जर्जर हो चुके तार काफी नीचे तक लटक गए हैं।
उधर, घरों के ऊपर से निकली एलटी और एचटी लाइनें शिफ्ट नहीं की जा रही हैं। निगम का कहना है कि उनके पास इसके लिए कोई अलग से बजट नहीं है। किसी को निजी तौर पर लाइन शिफ्ट करानी है तो खुद खर्च वहन करे। सामूहिक मामलों में उपभोक्ता जनप्रतिनिधियों से मदद मांग सकते हैं। निगम का कार्य प्रस्ताव बनाने व फाइल को आगे बढ़ाने तक सीमित है। व्यवस्था के बीच उपभोक्ता पिस रहे हैं।
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बांदा के गायत्री नगर में नरोत्तम कुशवाहा के मकान में शनिवार-रविवार रात करंट उतर आया। इससे बेड, अलमारी और वाशिंग मशीन जैसे उपकरण जल गए। नरोत्तम 2023 से शिकायत कर रहे हैं। गायत्री नगर में रश्मि गुप्ता समेत करीब 150 मकान इन तारों के नीचे हैं। परशुराम तालाब मोहल्ले में इरशाद, सबीना, मुन्ना, इमाम अली और मेहंदी हसन समेत 100 मकान एचटी लाइन के नीचे हैं।
इरशाद 2019 से और इमाम अली 2022 से शिकायतें कर रहे हैं। तिंदवारी के प्रेम नगर में 26 साल पहले कनेक्शन लेने वाले 30 परिवारों को खंभे नहीं मिले। माटा गांव में 11000 की लाइन से पांच साल पहले तार टूट गया था। इससे दो बकरियां और एक छप्पर जल गया। अतर्रा के शिवपुरी में एक मकान के अंदर बिजली का खंभा समा गया है।
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पेड़ के सहारे टिकी घरों की लाइन
खत्री पहाड़ के बरई मानपुर में 12-13 परिवारों के घरों तक बिजली के तार पेड़ के सहारे हैं। उपभोक्ताओं ने खंभे लगाने के लिए पत्र लिखे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पैलानी के सांडी गांव में अनुसूचित जाति की बस्ती से गुजरी हाईटेंशन लाइन हटाने की शिकायतें 2018 से हो रही हैं। ग्राम प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि बजट की कमी बताकर अधिकारी टाल रहे हैं।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी खतरे में
नरैनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में हाईटेंशन लाइन के खुले तार हादसे का कारण बन सकते हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 300 रोगी इलाज कराने आते हैं। अस्पताल परिसर में डॉक्टर और कर्मचारियों के आवास भी हैं। सीएचसी अधीक्षक विकास यादव ने बिजली निगम को लिखित रूप से अवगत कराया है। हालांकि, तारों को बदलने की प्रक्रिया अब तक नहीं हुई है।
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वर्जन
गायत्री नगर में हुए हादसे की जानकारी है और इसकी जांच के लिए एसई व एक्सईएन को निर्देश दिए गए हैं। लाइन शिफ्टिंग के लिए निगम के पास कोई बजट नहीं होता है। अगर लाइन शिफ्ट करानी है तो इसके लिए उपभोक्ताओं को ही नियमानुसार आगे आना पड़ेगा।-मुनीश चोपड़ा, मुख्य अभियंता बिजली निगम बांदा।
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लाइन शिफ्ट कराने का यह है नियम
- उपभोक्ता लाइन शिफ्ट कराने के लिए निगम में प्रार्थना पत्र देते हैं।
- क्षेत्रीय जेई, दूसरी जगह का सर्वे करता है, जहां से नई लाइन निकाली जानी होती है।
- नई जगह का चयन होने पर स्थानीय लोगों से आपत्तियां मांगी जाती है।
- आपत्ति नहीं होने पर जगह का चयन सुनिश्चित कर लिया जाता है।
- जेई खंभे, तार व अन्य उपकरणों का प्रस्ताव तैयार करते हैं और फाइल आगे भेजते हैं।
- प्रस्ताव में सभी उपकरण व मजदूरी का खर्च भी लिखा जाता है।
- प्रस्ताव में लाइन किन-किन स्थानों से निकलेगी, उसका नक्शा होता है।
- व्यक्तिगत मामलों में उपभोक्ता इस खर्च को निगम को जमा करता है। इसके बाद लाइन शिफ्ट होती है।
- सामूहिक मामलों में उपभोक्ता जनप्रतिनिधियों से मदद मांग सकते हैं।
- अन्यथा की स्थिति में उन्हें ही खर्च वहन करना पड़ता है।
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रविवार की रात शहर के गायत्री नगर में मकान की छत को लगभग छू रहे तारों से करंट उतर आया। जिससे कि एक-एक कर दर्जनों घरों में उपकरण फुंक गए। यह बानगी भर है। कमोबेश हर मोहल्ले में बिजली के जर्जर हो चुके तार काफी नीचे तक लटक गए हैं।
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उधर, घरों के ऊपर से निकली एलटी और एचटी लाइनें शिफ्ट नहीं की जा रही हैं। निगम का कहना है कि उनके पास इसके लिए कोई अलग से बजट नहीं है। किसी को निजी तौर पर लाइन शिफ्ट करानी है तो खुद खर्च वहन करे। सामूहिक मामलों में उपभोक्ता जनप्रतिनिधियों से मदद मांग सकते हैं। निगम का कार्य प्रस्ताव बनाने व फाइल को आगे बढ़ाने तक सीमित है। व्यवस्था के बीच उपभोक्ता पिस रहे हैं।
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बांदा के गायत्री नगर में नरोत्तम कुशवाहा के मकान में शनिवार-रविवार रात करंट उतर आया। इससे बेड, अलमारी और वाशिंग मशीन जैसे उपकरण जल गए। नरोत्तम 2023 से शिकायत कर रहे हैं। गायत्री नगर में रश्मि गुप्ता समेत करीब 150 मकान इन तारों के नीचे हैं। परशुराम तालाब मोहल्ले में इरशाद, सबीना, मुन्ना, इमाम अली और मेहंदी हसन समेत 100 मकान एचटी लाइन के नीचे हैं।
इरशाद 2019 से और इमाम अली 2022 से शिकायतें कर रहे हैं। तिंदवारी के प्रेम नगर में 26 साल पहले कनेक्शन लेने वाले 30 परिवारों को खंभे नहीं मिले। माटा गांव में 11000 की लाइन से पांच साल पहले तार टूट गया था। इससे दो बकरियां और एक छप्पर जल गया। अतर्रा के शिवपुरी में एक मकान के अंदर बिजली का खंभा समा गया है।
पेड़ के सहारे टिकी घरों की लाइन
खत्री पहाड़ के बरई मानपुर में 12-13 परिवारों के घरों तक बिजली के तार पेड़ के सहारे हैं। उपभोक्ताओं ने खंभे लगाने के लिए पत्र लिखे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पैलानी के सांडी गांव में अनुसूचित जाति की बस्ती से गुजरी हाईटेंशन लाइन हटाने की शिकायतें 2018 से हो रही हैं। ग्राम प्रधान विनोद कुमार ने बताया कि बजट की कमी बताकर अधिकारी टाल रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी खतरे में
नरैनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में हाईटेंशन लाइन के खुले तार हादसे का कारण बन सकते हैं। यहां प्रतिदिन लगभग 300 रोगी इलाज कराने आते हैं। अस्पताल परिसर में डॉक्टर और कर्मचारियों के आवास भी हैं। सीएचसी अधीक्षक विकास यादव ने बिजली निगम को लिखित रूप से अवगत कराया है। हालांकि, तारों को बदलने की प्रक्रिया अब तक नहीं हुई है।
वर्जन
गायत्री नगर में हुए हादसे की जानकारी है और इसकी जांच के लिए एसई व एक्सईएन को निर्देश दिए गए हैं। लाइन शिफ्टिंग के लिए निगम के पास कोई बजट नहीं होता है। अगर लाइन शिफ्ट करानी है तो इसके लिए उपभोक्ताओं को ही नियमानुसार आगे आना पड़ेगा।-मुनीश चोपड़ा, मुख्य अभियंता बिजली निगम बांदा।
लाइन शिफ्ट कराने का यह है नियम
- उपभोक्ता लाइन शिफ्ट कराने के लिए निगम में प्रार्थना पत्र देते हैं।
- क्षेत्रीय जेई, दूसरी जगह का सर्वे करता है, जहां से नई लाइन निकाली जानी होती है।
- नई जगह का चयन होने पर स्थानीय लोगों से आपत्तियां मांगी जाती है।
- आपत्ति नहीं होने पर जगह का चयन सुनिश्चित कर लिया जाता है।
- जेई खंभे, तार व अन्य उपकरणों का प्रस्ताव तैयार करते हैं और फाइल आगे भेजते हैं।
- प्रस्ताव में सभी उपकरण व मजदूरी का खर्च भी लिखा जाता है।
- प्रस्ताव में लाइन किन-किन स्थानों से निकलेगी, उसका नक्शा होता है।
- व्यक्तिगत मामलों में उपभोक्ता इस खर्च को निगम को जमा करता है। इसके बाद लाइन शिफ्ट होती है।
- सामूहिक मामलों में उपभोक्ता जनप्रतिनिधियों से मदद मांग सकते हैं।
- अन्यथा की स्थिति में उन्हें ही खर्च वहन करना पड़ता है।

फोटो 10- तिंदवारी के माटा गांव में मकानों के ऊपर से निकला बिजली की तार। संवाद

फोटो 10- तिंदवारी के माटा गांव में मकानों के ऊपर से निकला बिजली की तार। संवाद

फोटो 10- तिंदवारी के माटा गांव में मकानों के ऊपर से निकला बिजली की तार। संवाद

फोटो 10- तिंदवारी के माटा गांव में मकानों के ऊपर से निकला बिजली की तार। संवाद