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Banda News: जर्जर स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

Sat, 18 Jul 2026 11:46 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sat, 18 Jul 2026 11:46 PM IST
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Young children forced to study in dilapidated school buildings.
फोटो-15-जर्जर भवन पर अंकित निष्प्रयोज्य और नीचे ही बैठे बच्चे।
बांदा। स्कूल भवन बड़ी संख्या में जर्जर हैं। अभियंताओं ने जांच के बाद इन भवनों को जर्जर व निष्प्रयोज्य घोषित किया है। यह कभी भी गिर सकते हैं, यह पता होने के बाद भी मासूमों को इसमें बैठाया जा रहा है।
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बारिश का मौसम शुरू होते ही जिले के दर्जनों परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। कहीं बच्चे जर्जर और कंडम घोषित भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं तो कहीं खुले मैदान या निजी भवनों में पाठशाला चल रही है। बेसिक शिक्षा विभाग वर्षों बाद भी नए भवन उपलब्ध नहीं करा सका है। ऐसे में हर बारिश के साथ किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
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जिले में 1725 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 126 विद्यालय भवन निष्प्रयोज्य घोषित किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक केवल 45 भवनों का पुनर्निर्माण हो सका है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि एक भी भवन की मरम्मत नहीं कराई गई है। नतीजा यह है कि शिक्षक और छात्र जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को विवश हैं।
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दृश्य एक: मौत के साये में पाठशाला
नरैनी ब्लॉक के बरछा बी स्थित पूर्व माध्यमिक कन्या विद्यालय का भवन निष्प्रयोज्य घोषित होने के बावजूद वहीं पढ़ाई हो रही है। विद्यालय में सौ से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। बरसात में छत टपकती है। दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। दीवार पर निष्प्रयोज्य भी लिखा गया है, लेकिन ठीक उसी के नीचे बैठे बच्चों की तस्वीर व्यवस्था को आईना दिखा रही।



दृश्य दो: पैलानी ब्लॉक के रेंहुटा गांव के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। प्राथमिक विद्यालय में 166 छात्र हैं, लेकिन भवन असुरक्षित होने से तीन कक्षाओं में सभी बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। कुछ बच्चों को कार्यालय कक्ष में बैठाना पड़ता है। बरसात में छत टपकती है और शौचालय भी बदहाल हैं। प्रधानाध्यापक शिव विलास के अनुसार भवन को ध्वस्त कराने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी।



दृश्य तीन: ग्रामीणों के रहमो करम पर चल रही पाठशाला
नरैनी ब्लॉक के धोबिन पुरवा का प्राथमिक विद्यालय तीन वर्ष पहले क्षतिग्रस्त होने के बाद बंद हो गया। विभाग ने इसे ढाई किमी दूर दूसरे विद्यालय से संबद्ध कर दिया, लेकिन बीच में नाला होने से छोटे बच्चों के लिए वहां पहुंचना जोखिम भरा है। ऐसे में ग्रामीणों और ग्राम प्रधान ने गांव के एक व्यक्ति के खाली मकान में विद्यालय संचालित कराना शुरू कर दिया। तीन साल बाद भी नया भवन नहीं बन सका।



दृश्य चार: जर्जर भवन दे रहा हादसों को दावत
तिंदवारी ब्लॉक के परसौड़ा कंपोजिट विद्यालय का भवन 1982 में बना था और अब कंडम घोषित हो चुका है। भवन पर निष्प्रयोज्य लिख दिया गया है, लेकिन उसे ध्वस्त नहीं कराया गया। 297 बच्चों की पढ़ाई अतिरिक्त कमरों में कराई जा रही है। भवन गिराने की नीलामी कम बोली के कारण निरस्त हो गई, जिसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बच्चे अनजाने में जर्जर भवन की तरफ भी चले जाते हैं। ऐसे में बारिश में इस भवन से बच्चों को खतरा बढ़ गया है।

एक नजर में स्थिति

कुल परिषदीय विद्यालय : 1725
निष्प्रयोज्य घोषित भवन : 126

पुनर्निर्मित भवन : 45

मरम्मत कराए गए भवन : 0

जिले में 126 विद्यालय भवन पुनर्निर्माण के लिए चिह्नित किए गए थे। इनमें से 45 भवन बन चुके हैं। बजट आने पर शेष का निर्माण कराया जाएगा। कहीं भी बच्चों को जर्जर या निष्प्रयोज्य भवन में न बैठाने के सख्त आदेश दिए गए हैं।


-अव्यक्त राम तिवारी, बीएसए बांदा।

फोटो-15-जर्जर भवन पर अंकित निष्प्रयोज्य और नीचे ही बैठे बच्चे।

फोटो-15-जर्जर भवन पर अंकित निष्प्रयोज्य और नीचे ही बैठे बच्चे।

फोटो-15-जर्जर भवन पर अंकित निष्प्रयोज्य और नीचे ही बैठे बच्चे।

फोटो-15-जर्जर भवन पर अंकित निष्प्रयोज्य और नीचे ही बैठे बच्चे।

फोटो-15-जर्जर भवन पर अंकित निष्प्रयोज्य और नीचे ही बैठे बच्चे।

फोटो-15-जर्जर भवन पर अंकित निष्प्रयोज्य और नीचे ही बैठे बच्चे।

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