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Barabanki News: 1250 परिवार बाढ़ से प्रभावित, 687 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न
Mon, 03 Aug 2026 02:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:04 AM IST
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गुनौली गांव में छप्परनुमा आशियानों के आपपास भरा पानी।
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बाराबंकी। सरयू नदी का जलस्तर रविवार दोपहर खतरे के निशान से सात सेमी स्थिर हो गया। लेकिन नदी लगातार गांवों की जमीन और खेतों को निगल रही है। तीन तहसीलों के करीब डेढ़ दर्जन गांवों में बाढ़ और कटान ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहीं खेत नदी में समा रहे हैं तो कहीं आबादी तक पानी पहुंचने लगा है। ग्रामीणों की निगाहें अब भी नदी के मिजाज पर टिकी हैं।
रविवार शाम सरयू का जलस्तर 106.010 मीटर दर्ज किया गया। जबकि खतरे का निशान 106.070 है। जलस्तर घटने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन कटान की रफ्तार कम नहीं हुई। रामसनेहीघाट, रामनगर और सिरौलीगौसपुर तहसील के कई गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं।
रामसनेहीघाट तहसील के कोटेदार पुरवा, गोड़ियनपुरवा, छपटनपुरवा, पाठक पुरवा, मास्टर पुरवा, कंगणनपुरवा, सहाई पुरवा और असवा गांवों के आसपास अब भी पानी भरा है। पाठक पुरवा में नदी कटान कर रही है, जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। रामनगर तहसील के सुंदरनगर गांव में कटान ने संपर्क मार्ग को खतरे में डाल दिया है।
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वहीं कोयलीपुरवा, मदरहा, सरसंडा और केदारीपुर समेत कई गांवों की ओर बाढ़ का पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। खेतों में पानी भरने से किसानों की खड़ी फसल पर संकट गहरा गया है। सिरौलीगौसपुर तहसील के टेपरा और सनावा गांव के पास सरयू खेतों का लगातार कटान कर रही है। कहारनपुरवा में नदी आबादी के बेहद करीब पहुंच गई है।
प्रशासन के अनुसार जिले में 1250 परिवारों के 6151 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित क्षेत्र में 2176 मवेशी भी हैं। अब तक 687 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जबकि कुल 1185 हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ है। प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, लेकिन ग्रामीणों की चिंता तब तक कम नहीं होगी, जब तक सरयू पूरी तरह शांत नहीं हो जाती।
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चारों ओर पानी से घिरे चार मजरे
सूरतगंज। सरयू नदी के उस पार स्थित सरसंडा ग्राम पंचायत के चार मजरे पूरनपुर, फाजीलपुर, जमका और परशुरामपुर में बाढ़ का संकट है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ इन मजरों के चारों ओर पानी फैल गया है और अब गांवों का मुख्य आबादी क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आने लगा है।
इससे ग्रामीणों के सामने आवागमन, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के उस पार बसे इन मजरों तक पहुंचना पहले ही कठिन था, लेकिन बारिश और बाढ़ के कारण रास्तों पर पानी भर जाने से संपर्क लगभग टूटने की स्थिति में है।
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रविवार शाम सरयू का जलस्तर 106.010 मीटर दर्ज किया गया। जबकि खतरे का निशान 106.070 है। जलस्तर घटने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन कटान की रफ्तार कम नहीं हुई। रामसनेहीघाट, रामनगर और सिरौलीगौसपुर तहसील के कई गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं।
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रामसनेहीघाट तहसील के कोटेदार पुरवा, गोड़ियनपुरवा, छपटनपुरवा, पाठक पुरवा, मास्टर पुरवा, कंगणनपुरवा, सहाई पुरवा और असवा गांवों के आसपास अब भी पानी भरा है। पाठक पुरवा में नदी कटान कर रही है, जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। रामनगर तहसील के सुंदरनगर गांव में कटान ने संपर्क मार्ग को खतरे में डाल दिया है।
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वहीं कोयलीपुरवा, मदरहा, सरसंडा और केदारीपुर समेत कई गांवों की ओर बाढ़ का पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। खेतों में पानी भरने से किसानों की खड़ी फसल पर संकट गहरा गया है। सिरौलीगौसपुर तहसील के टेपरा और सनावा गांव के पास सरयू खेतों का लगातार कटान कर रही है। कहारनपुरवा में नदी आबादी के बेहद करीब पहुंच गई है।
प्रशासन के अनुसार जिले में 1250 परिवारों के 6151 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित क्षेत्र में 2176 मवेशी भी हैं। अब तक 687 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है, जबकि कुल 1185 हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुआ है। प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, लेकिन ग्रामीणों की चिंता तब तक कम नहीं होगी, जब तक सरयू पूरी तरह शांत नहीं हो जाती।
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चारों ओर पानी से घिरे चार मजरे
सूरतगंज। सरयू नदी के उस पार स्थित सरसंडा ग्राम पंचायत के चार मजरे पूरनपुर, फाजीलपुर, जमका और परशुरामपुर में बाढ़ का संकट है। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ इन मजरों के चारों ओर पानी फैल गया है और अब गांवों का मुख्य आबादी क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आने लगा है।
इससे ग्रामीणों के सामने आवागमन, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी के उस पार बसे इन मजरों तक पहुंचना पहले ही कठिन था, लेकिन बारिश और बाढ़ के कारण रास्तों पर पानी भर जाने से संपर्क लगभग टूटने की स्थिति में है।