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Barabanki News: बहन की गर्दन काटकर हत्या करने वाले भाई को उम्रकैद
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 08 Jan 2026 12:22 AM IST
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बाराबंकी। करीब डेढ़ साल पहले सफदरगंज कस्बे में हुई युवती की नृशंस हत्या के मामले में सत्र न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने सगे भाई उस्मान को हत्या का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 80 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली वारदात 28 जून 2024 की सुबह सफदरगंज थाना क्षेत्र के नई बस्ती मोहल्ले में हुई थी। जमीला बानो (30) पिछले ढाई महीने से अपने मायके में रह रही थी। उसके सगे भाई उस्मान ने कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। घर में मौजूद परिजनों ने जब शोर मचाया, तब तक आरोपी बहन पर ताबड़तोड़ वार कर चुका था।
घटना के बाद मृतका की मां जोहरा बानो ने अपने ही बेटे उस्मान के खिलाफ तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि बीच-बचाव करने पर उस्मान ने उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर तत्कालीन थाना प्रभारी सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली थी। विवेचना पूरी होने के बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष ने सात महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। करीब डेढ़ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने उस्मान को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अपराध न केवल क्रूर है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के भी खिलाफ है। फैसला आने के बाद मृतका के परिजनों की आंखें नम हो गईं।
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अदालत में बयान दर्ज कराते हुए मृतका की मां जोहरा बानो ने घटना का आंखों देखा हाल सुनाया। उन्होंने बताया कि उनका पुत्र उस्मान घर के ही एक अलग कमरे में रहता था और अपनी बहन जमीला बानो के चरित्र पर शक करता था। इसी चलते 28 जून की सुबह करीब पांच बजे, जब वह घर के आंगन में बैठी थीं, तभी उस्मान अचानक हाथ में कुल्हाड़ी लेकर आया और सो रही जमीला पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। मां की इस भावुक और प्रत्यक्षदर्शी गवाही ने मामले को साबित करने में मुख्य भूमिका निभाई।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली वारदात 28 जून 2024 की सुबह सफदरगंज थाना क्षेत्र के नई बस्ती मोहल्ले में हुई थी। जमीला बानो (30) पिछले ढाई महीने से अपने मायके में रह रही थी। उसके सगे भाई उस्मान ने कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। घर में मौजूद परिजनों ने जब शोर मचाया, तब तक आरोपी बहन पर ताबड़तोड़ वार कर चुका था।
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घटना के बाद मृतका की मां जोहरा बानो ने अपने ही बेटे उस्मान के खिलाफ तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि बीच-बचाव करने पर उस्मान ने उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर तत्कालीन थाना प्रभारी सुधीर कुमार सिंह के नेतृत्व में जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली थी। विवेचना पूरी होने के बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां अभियोजन पक्ष ने सात महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। करीब डेढ़ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह ने उस्मान को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अपराध न केवल क्रूर है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के भी खिलाफ है। फैसला आने के बाद मृतका के परिजनों की आंखें नम हो गईं।
अदालत में बयान दर्ज कराते हुए मृतका की मां जोहरा बानो ने घटना का आंखों देखा हाल सुनाया। उन्होंने बताया कि उनका पुत्र उस्मान घर के ही एक अलग कमरे में रहता था और अपनी बहन जमीला बानो के चरित्र पर शक करता था। इसी चलते 28 जून की सुबह करीब पांच बजे, जब वह घर के आंगन में बैठी थीं, तभी उस्मान अचानक हाथ में कुल्हाड़ी लेकर आया और सो रही जमीला पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। मां की इस भावुक और प्रत्यक्षदर्शी गवाही ने मामले को साबित करने में मुख्य भूमिका निभाई।
