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Barabanki News: सुपर-ग्रास से संवरेगी गोवंश की सेहत, मिलेगा हरा चारा
Thu, 06 Aug 2026 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:58 PM IST
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बाराबंकी। चरही में लबालब पौष्टिक चारा अब बेजुबानों को भरपूर पोषण करेगा। भूख से तड़पने वाले निराश्रित गोवंश को कुपोषण से बचाने के लिए अब सुपर-ग्रास के बतौर साल भर हरा चारा उगाया जाएगा। इसके लिए जिले के 108 चारागाहों का कायाकल्प किया जाएगा। इस संबंध में डीएम के निर्देश पर सभी विकास खंडों से सप्ताह भर में प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है।
प्रस्तावित कार्ययोजना के अमल में आने से जिले की गोशालाओं में आश्रय लेने वाले गोवंश को हर मौसम में पौष्टिक और हरा चारा नसीब होगा। इसके लिए प्रशासन ने जिले की आरक्षित चारागाह भूमियों को नए सिरे से संवारने का खाका तैयार किया है। विकसित भारत जी-राम-जी योजना (मनरेगा) के तहत जिले भर के 108 चिह्नित चारागाह स्थलों का भूमि विकास कराकर वहां बहुवर्षीय चारे की बोआई कराई जाएगी।
नेपियर व सहजन से मिलेगा भरपूर पोषण
आरक्षित चारागाह भूमि को विकसित कर वहां सुपर नेपियर घास, सहजन, सूबबूल और स्थानीय प्रजाति की पौष्टिक घासों की बोआई होगी। यह घास एक बार बोने के बाद सालों तक हरा चारा देती रहती है। इससे गोशालाओं में चारे की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को इस चारे की निशुल्क उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
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एक सप्ताह में मांगी प्रगति रिपोर्ट
इस संबंध में सभी एसडीएम को मनरेगा के तहत हो रहे समतलीकरण और भूमि विकास कार्यों (गाटा संख्या, क्षेत्रफल, लागत) का पूरा ब्योरा एक सप्ताह के भीतर उपायुक्त श्रम रोजगार को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त वीबीजी राम जी विकास मिश्रा ने बताया कि डीएम के निर्देश पर 108 चारागाह स्थलों को चिन्हित कर भूमि विकास का खाका तैयार किया गया है। गांवों का बजट आवंटित होते ही इस योजना का काम धरातल पर तेजी से शुरू कराया जाएगा, ताकि गोवंश के लिए पर्याप्त हरे चारे का बंदोबस्त हो सके।
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प्रस्तावित कार्ययोजना के अमल में आने से जिले की गोशालाओं में आश्रय लेने वाले गोवंश को हर मौसम में पौष्टिक और हरा चारा नसीब होगा। इसके लिए प्रशासन ने जिले की आरक्षित चारागाह भूमियों को नए सिरे से संवारने का खाका तैयार किया है। विकसित भारत जी-राम-जी योजना (मनरेगा) के तहत जिले भर के 108 चिह्नित चारागाह स्थलों का भूमि विकास कराकर वहां बहुवर्षीय चारे की बोआई कराई जाएगी।
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नेपियर व सहजन से मिलेगा भरपूर पोषण
आरक्षित चारागाह भूमि को विकसित कर वहां सुपर नेपियर घास, सहजन, सूबबूल और स्थानीय प्रजाति की पौष्टिक घासों की बोआई होगी। यह घास एक बार बोने के बाद सालों तक हरा चारा देती रहती है। इससे गोशालाओं में चारे की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को इस चारे की निशुल्क उपलब्धता सुनिश्चित कराने को कहा गया है।
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एक सप्ताह में मांगी प्रगति रिपोर्ट
इस संबंध में सभी एसडीएम को मनरेगा के तहत हो रहे समतलीकरण और भूमि विकास कार्यों (गाटा संख्या, क्षेत्रफल, लागत) का पूरा ब्योरा एक सप्ताह के भीतर उपायुक्त श्रम रोजगार को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त वीबीजी राम जी विकास मिश्रा ने बताया कि डीएम के निर्देश पर 108 चारागाह स्थलों को चिन्हित कर भूमि विकास का खाका तैयार किया गया है। गांवों का बजट आवंटित होते ही इस योजना का काम धरातल पर तेजी से शुरू कराया जाएगा, ताकि गोवंश के लिए पर्याप्त हरे चारे का बंदोबस्त हो सके।