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Barabanki News: ठंड में कुत्तों का आतंक, एक दिन में 58 लोग बने शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 06 Jan 2026 12:31 AM IST
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रायबरेली। ठंड के मौसम ने जहां लोगों को कंपकंपा दिया है, वहीं दूसरी ओर कुत्तों का आतंक भी बढ़ गया है। सोमवार को जिला अस्पताल में एक ही दिन में कुत्तों के हमलों से घायल 58 से अधिक नए मरीज पहुंचे। उन्हें एंटी-रैबीज वेनम (एआरवी) की पहली डोज लगवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। हाल के दिनों में, विशेषकर ठंड बढ़ने के साथ ही, कुत्तों द्वारा लोगों पर हमले की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
जिला अस्पताल के ओपीडी (आउटपेशेंट डिपार्टमेंट) व इंजेक्शन कक्ष में एआरवी लगवाने के लिए अपरान्ह दो बजे के बाद भी भीड़ रही। दिनभर में नए व पुराने मरीजों को मिलाकर करीब 200 से अधिक लोगाें को एआरवी लगाई गई। इन मरीजों में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल थे, जिनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। कुछ प्रमुख मामलों में आशीष (27), सुरभि (3), मोहम्मद हम्माद (31), शंकर (17), अजीम (18), मो. आजम (28), राजा (32), विवेक (10), और श्रद्धा (50) जैसे लोग शामिल थे, जो कुत्तों के काटने या खरोंचने के बाद अस्पताल पहुंचे। भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें दिक्कतें उठानी पड़ीं।
72 घंटे में एआरवी का पहला टीका जरूरी
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को रैबीज संक्रमित किसी जानवर ने काट लिया हो तो उसे 72 घंटे के भीतर वैक्सीन की डोज अवश्य ले लेनी चाहिए। कुत्ता काटने वाले स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटॉल से अच्छे से धोकर साफ जरूर कर लें। उसके तुरंत बाद रैबीज की वैक्सीन लगवानी चाहिए। ठंड बढ़ने के कारण कुत्ते हिंसक व आक्रामक हैं। उनसे बचकर रहना रहें।
गर्मी की तुलना में ठंड में अधिक खतरा
यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है कि गर्मी के मौसम में जहां कुत्ते आमतौर पर अधिक हिंसक माने जाते हैं, वहीं ठंड बढ़ने के बाद भी उनका खतरा कम नहीं हुआ, बल्कि बढ़ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह संभव है कि ठंड से बचने के लिए वे भोजन या आश्रय की तलाश में अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में वे हिंसक हो जाते हैं।
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जिला अस्पताल के ओपीडी (आउटपेशेंट डिपार्टमेंट) व इंजेक्शन कक्ष में एआरवी लगवाने के लिए अपरान्ह दो बजे के बाद भी भीड़ रही। दिनभर में नए व पुराने मरीजों को मिलाकर करीब 200 से अधिक लोगाें को एआरवी लगाई गई। इन मरीजों में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल थे, जिनमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। कुछ प्रमुख मामलों में आशीष (27), सुरभि (3), मोहम्मद हम्माद (31), शंकर (17), अजीम (18), मो. आजम (28), राजा (32), विवेक (10), और श्रद्धा (50) जैसे लोग शामिल थे, जो कुत्तों के काटने या खरोंचने के बाद अस्पताल पहुंचे। भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें दिक्कतें उठानी पड़ीं।
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72 घंटे में एआरवी का पहला टीका जरूरी
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि अगर किसी भी व्यक्ति को रैबीज संक्रमित किसी जानवर ने काट लिया हो तो उसे 72 घंटे के भीतर वैक्सीन की डोज अवश्य ले लेनी चाहिए। कुत्ता काटने वाले स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटॉल से अच्छे से धोकर साफ जरूर कर लें। उसके तुरंत बाद रैबीज की वैक्सीन लगवानी चाहिए। ठंड बढ़ने के कारण कुत्ते हिंसक व आक्रामक हैं। उनसे बचकर रहना रहें।
गर्मी की तुलना में ठंड में अधिक खतरा
यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है कि गर्मी के मौसम में जहां कुत्ते आमतौर पर अधिक हिंसक माने जाते हैं, वहीं ठंड बढ़ने के बाद भी उनका खतरा कम नहीं हुआ, बल्कि बढ़ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह संभव है कि ठंड से बचने के लिए वे भोजन या आश्रय की तलाश में अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में वे हिंसक हो जाते हैं।
