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Barabanki News: कागजों पर विशेषज्ञों की डिग्री, काम में झोलाछाप
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 25 Mar 2026 01:55 AM IST
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बाराबंकी। बाराबंकी में संचालित निजी अस्पतालों का सच रूह कंपा देने वाला है। यहां विशेषज्ञों की डिग्रियां सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ा रही हैं, जबकि ऑपरेशन थियेटर में उन हाथों में कैंची है, जिन्होंने कभी मेडिकल कॉलेज की दहलीज तक नहीं देखी। सरकारी अस्पतालों से मरीजों का सौदा करने वाले दलालों और इन फर्जी संचालकों के गठबंधन ने पूरे जिले को एक ऐसे खतरे में डाल दिया है, जहां मरीज इलाज के लिए नहीं, बल्कि अपनी बलि चढ़ने के लिए पहुंच रहा है।
जिले में संचालित करीब 325 पंजीकृत अस्पतालों में से 100 से अधिक केंद्र ऐसे हैं, जो स्वास्थ्य मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए केवल वसूली केंद्र बनकर रह गए हैं। इनका संचालन फर्जी तरीके से किया जा रहा है।
दरियाबाद, कोटवाधाम और रानीकटरा जैसे इलाकों में संचालित राज हॉस्पिटल, जान्हवी और जन्नत हॉस्पिटल जैसे केंद्रों का पंजीकरण तो विशेषज्ञों के नाम पर है, लेकिन वे डॉक्टर यहां कभी नजर नहीं आते। इन अस्पतालों का संचालन अप्रशिक्षितों द्वारा किया जाता है, जिसकी वजह से गलत इलाज से आए दिन किसी न किसी की मौत हो जाती है।
g जच्चा बच्चा की मौत के बाद चल रहा अस्पताल : भिटरिया-दरियाबाद मार्ग पर संचालित न्यू जीवन धारा हॉस्पिटल का पंजीकरण ही नहीं है। जच्चा बच्चा की मौत के बाद भी अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। संचालक केके सिंह का कहना है कि अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं। इसी प्रकार रामनगर के कटियारा स्थित ग्रीन हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद भी अस्पताल का संचालन हो रहा है। जिनके नाम से अस्पताल का पंजीकरण है, वह यहां पर आते ही नहीं हैं।
नोडल अधिकारी (चिकित्सा एवं पंजीयन) डॉ. एलबी गुप्ता का कहना है कि पंजीकरण कागजी प्रक्रिया पूरी होने पर ही दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कागजों को नत्थी करने तक सीमित है? धरातल पर संचालकों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे सरेआम कानून का मजाक उड़ा रहे हैं।
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जिले में संचालित करीब 325 पंजीकृत अस्पतालों में से 100 से अधिक केंद्र ऐसे हैं, जो स्वास्थ्य मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए केवल वसूली केंद्र बनकर रह गए हैं। इनका संचालन फर्जी तरीके से किया जा रहा है।
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दरियाबाद, कोटवाधाम और रानीकटरा जैसे इलाकों में संचालित राज हॉस्पिटल, जान्हवी और जन्नत हॉस्पिटल जैसे केंद्रों का पंजीकरण तो विशेषज्ञों के नाम पर है, लेकिन वे डॉक्टर यहां कभी नजर नहीं आते। इन अस्पतालों का संचालन अप्रशिक्षितों द्वारा किया जाता है, जिसकी वजह से गलत इलाज से आए दिन किसी न किसी की मौत हो जाती है।
g जच्चा बच्चा की मौत के बाद चल रहा अस्पताल : भिटरिया-दरियाबाद मार्ग पर संचालित न्यू जीवन धारा हॉस्पिटल का पंजीकरण ही नहीं है। जच्चा बच्चा की मौत के बाद भी अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। संचालक केके सिंह का कहना है कि अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं। इसी प्रकार रामनगर के कटियारा स्थित ग्रीन हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के बाद भी अस्पताल का संचालन हो रहा है। जिनके नाम से अस्पताल का पंजीकरण है, वह यहां पर आते ही नहीं हैं।
नोडल अधिकारी (चिकित्सा एवं पंजीयन) डॉ. एलबी गुप्ता का कहना है कि पंजीकरण कागजी प्रक्रिया पूरी होने पर ही दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कागजों को नत्थी करने तक सीमित है? धरातल पर संचालकों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे सरेआम कानून का मजाक उड़ा रहे हैं।