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Barabanki News: मखाना संग मत्स्य पालन से बढ़ेगी किसानों की आय
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 23 Apr 2026 01:50 AM IST
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बाराबंकी। कृषि विज्ञान केंद्र में मखाना की वैज्ञानिक खेती और रोजगार के अवसर विषय पर जागरुकता गोष्ठी बुधवार को हुई। वहीं जागरूकता के लिए किसानों को टीशर्ट बांटी गईं।
मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या के प्रसार निदेशक प्रोफेसर डॉ. आरबी सिंह रहे। उन्होंने किसानों को बताया कि मखाना केवल एक जलभराव वाली फसल नहीं है।
यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का एक अत्यंत सशक्त माध्यम है। मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण क्षेत्र में युवाओं और किसानों के लिए उद्यमिता के ढेरों अवसर मौजूद हैं। इससे किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ दूसरों को रोजगार भी दे सकते हैं।
मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड व कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालय संयुक्त और निरंतर प्रयास कर रहे हैं। किसान पारंपरिक खेती से एक कदम आगे बढ़कर मखाना की वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। विश्वविद्यालय से किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण की उन्नत तकनीकों के बारे में बताया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि केवीके अध्यक्ष वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अश्विनी सिंह ने किसानों को मखाना परियोजना में सक्रियता से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। केवीके द्वितीय सीतापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने मखाना आधारित उद्यमिता और बीज संरक्षण की जानकारी दी।
मत्स्य महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. एसके वर्मा ने मछली के साथ मखाना की सहफसली खेती के लाभ के बारे में बताया। कॉलेज फार्म पर मौजूद फील्ड सिस्टम, तालाब सिस्टम, फिश विद मखाना मॉडल्स पर चर्चा की। इस मौके पर उद्यान वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर, डॉ. रीमा,डॉ राजेश वर्मा, संतोष वर्मा और प्रिया वर्मा मौजूद रहीं।
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मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या के प्रसार निदेशक प्रोफेसर डॉ. आरबी सिंह रहे। उन्होंने किसानों को बताया कि मखाना केवल एक जलभराव वाली फसल नहीं है।
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यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने का एक अत्यंत सशक्त माध्यम है। मखाना उत्पादन और प्रसंस्करण क्षेत्र में युवाओं और किसानों के लिए उद्यमिता के ढेरों अवसर मौजूद हैं। इससे किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ दूसरों को रोजगार भी दे सकते हैं।
मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड व कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालय संयुक्त और निरंतर प्रयास कर रहे हैं। किसान पारंपरिक खेती से एक कदम आगे बढ़कर मखाना की वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। विश्वविद्यालय से किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण की उन्नत तकनीकों के बारे में बताया जा रहा है।
विशिष्ट अतिथि केवीके अध्यक्ष वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अश्विनी सिंह ने किसानों को मखाना परियोजना में सक्रियता से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। केवीके द्वितीय सीतापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने मखाना आधारित उद्यमिता और बीज संरक्षण की जानकारी दी।
मत्स्य महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. एसके वर्मा ने मछली के साथ मखाना की सहफसली खेती के लाभ के बारे में बताया। कॉलेज फार्म पर मौजूद फील्ड सिस्टम, तालाब सिस्टम, फिश विद मखाना मॉडल्स पर चर्चा की। इस मौके पर उद्यान वैज्ञानिक डॉ. शुभम सिंह राठौर, डॉ. रीमा,डॉ राजेश वर्मा, संतोष वर्मा और प्रिया वर्मा मौजूद रहीं।

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