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Barabanki News: नंबर न नाम... बस चल रहा काम
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 09 Apr 2026 01:36 AM IST
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बाराबंकी। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन चाहे जितने दावे करे, जमीनी हकीकत डराने वाली है। बुधवार को पड़ताल में साफ हो गया कि स्कूली वाहन चालक नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। परिवहन विभाग की सख्ती के दावे सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं। सड़क पर बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
मानकों के मुताबिक हर स्कूली वाहन का रंग पीला होना चाहिए और उस पर चालक का नाम व नंबर, स्कूल का नाम, प्रधानाचार्य का मोबाइल नंबर और आपातकालीन नंबर साफ-साफ अंकित होना जरूरी है। शहर से लेकर गांव तक अधिकांश वाहन इन बुनियादी नियमों पर खरे नहीं उतर रहे।
पड़ताल में सामने आया कि कई निजी वाहनों से बच्चों को सफर कराया जा रहा है। जो पीले रंग में हैं, उनमें भी जरूरी सूचनाएं नदारद हैं। हैरानी की बात यह है कि न तो स्कूल प्रशासन को इसकी चिंता है और न ही जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करता दिख रहा है।
छाया चौराहा – बिना नंबर के दौड़ती जिम्मेदारी
शहर के व्यस्त छाया चौराहे के पास एक स्कूली वैन बच्चों से भरी हुई गुजरती दिखी। वैन पीले रंग की तो थी लेकिन उस पर चालक का मोबाइल नंबर दर्ज नहीं था। वैन पर प्रधानाचार्य का नंबर भी नहीं लिखा था। अगर शिकायत करनी हो तो संपर्क का कोई जरिया ही नहीं।
सिविल लाइन – बिना पहचान दौड़ती स्कूली वैन
सिविल लाइन स्थित एक स्कूल के पास से गुजर रही वैन ने तो नियमों की पूरी तरह धज्जियां उड़ा दीं। इस वाहन पर स्कूल का नाम ही नहीं लिखा था। ऐसे में यह पहचानना मुश्किल है कि वाहन किस स्कूल से संबंधित है। आपात स्थिति में वाहन की पहचान करना तक संभव नहीं रहेगा।
छाया चौराहा – आपातकालीन नंबर भी गायब
छाया चौराहे के पास ही एक और वैन मिली, जिसमें न स्कूल का नाम था और न ही कोई आपातकालीन नंबर। यह स्थिति और भी खतरनाक है, क्योंकि आपातकालीन नंबर बेहद जरूरी होता है। बिना किसी संपर्क विवरण के ऐसे वाहन बच्चों को जोखिम में डाल रहे हैं।
गन्ना दफ्तर के पास – पीले की जगह दौड़ रही सफेद रंग की वैन
शहर में गन्ना दफ्तर के पास तो हालात और भी चिंताजनक दिखे। यहां निजी सफेद रंग की वैन में स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा था। न तो वाहन पर कोई पहचान चिह्न था, न स्कूल का नाम और न ही कोई आपातकालीन नंबर।
होगी सख्त कार्रवाई
एआरटीओ प्रशासन अंकिता शुक्ला ने बताया कि स्कूली वाहनों का रंग पीला होना और उन पर आवश्यक संपर्क नंबर लिखा होना अनिवार्य है। सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मानक व नियमों का पालन करें। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गाइडलाइन
- सभी स्कूली बसों में रियल टाइम जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य है।
- बस की लोकेशन मोबाइल के माध्यम से देखने की सुविधा।
- बस रूट और समय की जानकारी अपडेट रहनी चाहिए।
- बस के अंदर बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य।
- रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिन तक सुरक्षित रखी जाए।
- केवल अधिकृत अधिकारियों को ही रिकॉर्डिंग देखने की अनुमति।
- बस में फर्स्ट एड बॉक्स रखना अनिवार्य।
- फर्स्ट एड किट में बैंडेज, एंटीसेप्टिक, थर्मामीटर, मास्क आदि होना चाहिए।
- चालक और परिचालक को फर्स्ट एड का बेसिक प्रशिक्षण होना चाहिए।
- बस में कम से कम एक अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
- चालक को अग्निशमन यंत्र के इस्तेमाल का प्रशिक्षण।
- यंत्र का प्रकार और उपयोग की तारीख नियमित जांच के लिए मार्क किया होना चाहिए।
- बस में इमरजेंसी एग्जिट और इमरजेंसी हैंडल की सुविधा।
- बस ड्राइवर और हेल्पर के लिए नियमित स्वास्थ्य और ड्राइविंग फिटनेस जांच।
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मानकों के मुताबिक हर स्कूली वाहन का रंग पीला होना चाहिए और उस पर चालक का नाम व नंबर, स्कूल का नाम, प्रधानाचार्य का मोबाइल नंबर और आपातकालीन नंबर साफ-साफ अंकित होना जरूरी है। शहर से लेकर गांव तक अधिकांश वाहन इन बुनियादी नियमों पर खरे नहीं उतर रहे।
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पड़ताल में सामने आया कि कई निजी वाहनों से बच्चों को सफर कराया जा रहा है। जो पीले रंग में हैं, उनमें भी जरूरी सूचनाएं नदारद हैं। हैरानी की बात यह है कि न तो स्कूल प्रशासन को इसकी चिंता है और न ही जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करता दिख रहा है।
छाया चौराहा – बिना नंबर के दौड़ती जिम्मेदारी
शहर के व्यस्त छाया चौराहे के पास एक स्कूली वैन बच्चों से भरी हुई गुजरती दिखी। वैन पीले रंग की तो थी लेकिन उस पर चालक का मोबाइल नंबर दर्ज नहीं था। वैन पर प्रधानाचार्य का नंबर भी नहीं लिखा था। अगर शिकायत करनी हो तो संपर्क का कोई जरिया ही नहीं।
सिविल लाइन – बिना पहचान दौड़ती स्कूली वैन
सिविल लाइन स्थित एक स्कूल के पास से गुजर रही वैन ने तो नियमों की पूरी तरह धज्जियां उड़ा दीं। इस वाहन पर स्कूल का नाम ही नहीं लिखा था। ऐसे में यह पहचानना मुश्किल है कि वाहन किस स्कूल से संबंधित है। आपात स्थिति में वाहन की पहचान करना तक संभव नहीं रहेगा।
छाया चौराहा – आपातकालीन नंबर भी गायब
छाया चौराहे के पास ही एक और वैन मिली, जिसमें न स्कूल का नाम था और न ही कोई आपातकालीन नंबर। यह स्थिति और भी खतरनाक है, क्योंकि आपातकालीन नंबर बेहद जरूरी होता है। बिना किसी संपर्क विवरण के ऐसे वाहन बच्चों को जोखिम में डाल रहे हैं।
गन्ना दफ्तर के पास – पीले की जगह दौड़ रही सफेद रंग की वैन
शहर में गन्ना दफ्तर के पास तो हालात और भी चिंताजनक दिखे। यहां निजी सफेद रंग की वैन में स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा था। न तो वाहन पर कोई पहचान चिह्न था, न स्कूल का नाम और न ही कोई आपातकालीन नंबर।
होगी सख्त कार्रवाई
एआरटीओ प्रशासन अंकिता शुक्ला ने बताया कि स्कूली वाहनों का रंग पीला होना और उन पर आवश्यक संपर्क नंबर लिखा होना अनिवार्य है। सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मानक व नियमों का पालन करें। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गाइडलाइन
- सभी स्कूली बसों में रियल टाइम जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य है।
- बस की लोकेशन मोबाइल के माध्यम से देखने की सुविधा।
- बस रूट और समय की जानकारी अपडेट रहनी चाहिए।
- बस के अंदर बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य।
- रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिन तक सुरक्षित रखी जाए।
- केवल अधिकृत अधिकारियों को ही रिकॉर्डिंग देखने की अनुमति।
- बस में फर्स्ट एड बॉक्स रखना अनिवार्य।
- फर्स्ट एड किट में बैंडेज, एंटीसेप्टिक, थर्मामीटर, मास्क आदि होना चाहिए।
- चालक और परिचालक को फर्स्ट एड का बेसिक प्रशिक्षण होना चाहिए।
- बस में कम से कम एक अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
- चालक को अग्निशमन यंत्र के इस्तेमाल का प्रशिक्षण।
- यंत्र का प्रकार और उपयोग की तारीख नियमित जांच के लिए मार्क किया होना चाहिए।
- बस में इमरजेंसी एग्जिट और इमरजेंसी हैंडल की सुविधा।
- बस ड्राइवर और हेल्पर के लिए नियमित स्वास्थ्य और ड्राइविंग फिटनेस जांच।