{"_id":"6a0cc468280ec0f1990f479e","slug":"ramnath-maurya-acquitted-in-the-case-of-distributing-dupattas-at-the-sp-office-barabanki-news-c-315-1-brp1006-168243-2026-05-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: सपा कार्यालय पर दुपट्टा बांटने के मामले में रामनाथ मौर्य बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: सपा कार्यालय पर दुपट्टा बांटने के मामले में रामनाथ मौर्य बरी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 20 May 2026 01:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बाराबंकी। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के एक मामले में आरोपी बनाए गए रामनाथ मौर्य को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। रामनाथ मौर्य भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष होने के साथ राममंदिर आंदोलन में शामिल हुए थे। बीच में कुछ दिन के लिए सपा में जाने बाद फिर भाजपा में हैं।
मामला सात मार्च 2014 का है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद समाजवादी पार्टी कार्यालय में समाजवादी महिला सभा की बैठक आयोजित की गई थी। आरोप था कि बैठक के दौरान महिलाओं को दुपट्टे बांटे गए। इस संबंध में तत्कालीन तहसीलदार नवाबगंज संजय कुमार यादव ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एफआईआर में तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष मौलाना मेराज, सचिव अनिल कुमार यादव और रामनाथ मौर्य को आरोपी बनाया गया था। मुकदमे के दौरान मौलाना मेराज और अनिल यादव की मृत्यु हो जाने पर उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान वर्तमान में घोसी तहसील में तैनात तहसीलदार उमेश कुमार सिंह ने अदालत में बताया कि वह केवल नामजद गवाह थे और उन्होंने घटना अपनी आंखों से नहीं देखी थी। उनके सामने किसी को दुपट्टा नहीं बांटा गया। अदालत में यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि उस समय रामनाथ मौर्य समाजवादी पार्टी में किस पद पर थे। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर रामनाथ मौर्य को दोषमुक्त कर दिया।
.........................
चालक दोषी, 3000 रुपये जुर्माना
लापरवाही से वाहन चलाकर एक व्यक्ति को घायल करने में चालक को दोषी पाया गया। मामला वर्ष 2015 में शहर कोतवाली में दर्ज किया गया था। कोर्ट-15 ने कानपुर देहात जिले के दशहरा सुजानपुर थाना रसूलाबाद रमाबाई निवासी साकेन्द्र सिंह राठौर को न्यायालय उठने तक की सजा दी। इन पर 3000 रुपये जुर्माना भी लगाया गया।
.....................
नाली गिराने के मामले में आरोपी बरी
नाली गिराने के मामले में आरोपी बुजुर्ग हाफिज को अदालत ने लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम में दोषमुक्त कर दिया। मामला सफदरगंज के चौखंडी गांव से जुड़ा है। इस गांव के जाबिर के खिलाफ नाली गिराने के आरोप में वर्ष 2008 में दर्ज किया गया था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर कुमार ने सबूतों के अभाव में हाफिज को बरी कर दिया।
मामला सात मार्च 2014 का है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद समाजवादी पार्टी कार्यालय में समाजवादी महिला सभा की बैठक आयोजित की गई थी। आरोप था कि बैठक के दौरान महिलाओं को दुपट्टे बांटे गए। इस संबंध में तत्कालीन तहसीलदार नवाबगंज संजय कुमार यादव ने शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
एफआईआर में तत्कालीन सपा जिलाध्यक्ष मौलाना मेराज, सचिव अनिल कुमार यादव और रामनाथ मौर्य को आरोपी बनाया गया था। मुकदमे के दौरान मौलाना मेराज और अनिल यादव की मृत्यु हो जाने पर उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
Trending Videos
सुनवाई के दौरान वर्तमान में घोसी तहसील में तैनात तहसीलदार उमेश कुमार सिंह ने अदालत में बताया कि वह केवल नामजद गवाह थे और उन्होंने घटना अपनी आंखों से नहीं देखी थी। उनके सामने किसी को दुपट्टा नहीं बांटा गया। अदालत में यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि उस समय रामनाथ मौर्य समाजवादी पार्टी में किस पद पर थे। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर रामनाथ मौर्य को दोषमुक्त कर दिया।
.........................
चालक दोषी, 3000 रुपये जुर्माना
लापरवाही से वाहन चलाकर एक व्यक्ति को घायल करने में चालक को दोषी पाया गया। मामला वर्ष 2015 में शहर कोतवाली में दर्ज किया गया था। कोर्ट-15 ने कानपुर देहात जिले के दशहरा सुजानपुर थाना रसूलाबाद रमाबाई निवासी साकेन्द्र सिंह राठौर को न्यायालय उठने तक की सजा दी। इन पर 3000 रुपये जुर्माना भी लगाया गया।
.....................
नाली गिराने के मामले में आरोपी बरी
नाली गिराने के मामले में आरोपी बुजुर्ग हाफिज को अदालत ने लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम में दोषमुक्त कर दिया। मामला सफदरगंज के चौखंडी गांव से जुड़ा है। इस गांव के जाबिर के खिलाफ नाली गिराने के आरोप में वर्ष 2008 में दर्ज किया गया था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर कुमार ने सबूतों के अभाव में हाफिज को बरी कर दिया।