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Barabanki News: विवेक को परिंदों से हमदर्दी, जहरीले जीवों से प्यार
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 23 Apr 2026 01:54 AM IST
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बाराबंकी। दौड़भाग भरी जिंदगी में खेत-बाग और जंगलों में रहने वाले जीव जंतुओं की सेवा करने वाले बिरले ही मिलते हैं। शिकारी तो भरे पड़े हैं। इसके उलट, रामसनेहीघाट के बड़ेला निवासी विवेक सिंह सूर्यवंशी ने अलग लकीर खींच दी है।
जी हां, वह न सिर्फ जीव जंतुओं की सेवा में लगे हैं, बल्कि शिकारियों को भी कानूनी मदद से सबक सिखा रहे हैं। उनको परिदों से हमदर्दी तो है ही, जहरीले जीवों से भी प्यार है। विवेक खेतों में मिलने वाले पक्षियों के लावारिस अंडों को इंक्यूबेटर मशीन में रखकर उनकी सुरक्षा और देखभाल कर रहे हैं। अंडे से जब चूजे निकलते हैं तो उनका भी तब तक ख्याल रखते हैं, जब तक की वे खुद समर्थ न हो जाएं। बाद में वे पक्षियों को जंगल में छोड़ देते हैं।
खुद बनाई मशीन
विवेक करीब 14 वर्षों से जीव जंतुओं की सेवा कर रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र वर्मा के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2023 में मशीन बनाई। मशीन का ढांचा थर्माकोल से तैयार किया गया है। अंडों को गर्मी देने के लिए 100 वॉट का बल्ब, तापमान नियंत्रित करने के लिए नमी निर्धारण मशीन और अंडों को प्राकृतिक वातावरण देने के लिए एक कटोरे में पानी रखा गया है।
साथ ही, ऑक्सीजन के संचार के लिए मशीन में दो छेद भी किए गए हैं। विवेक के अनुसार, कबूतर के अंडे को बच्चा बनने में 15 से 18 दिन, मोर व बतख के अंडों को 27 से 31 दिन, गौरैया को 10 से 13 दिन और मुर्गी को 18 से 22 दिन लगते हैं।
सोशल वर्क से किया स्नातक
विवेक ने लखनऊ विश्वविद्यालय से सोशल वर्क
में स्नातक और डीएलएड की शिक्षा प्राप्त की है। मौजूदा समय में वह प्लाईवुड का व्यवसाय करते हैं। पशु पक्षियों की सेवा के लिए वह समय निकालत लेते हैं। उन्होंने इस नेक काम के लिए गांव के ही 10 युवाओं को जोड़कर ज्योत्सना सेवा समिति बनाई है।
जंगली जानवरों का भी रखेंगे ध्यान
विवेक ने बताया कि जंगली जानवरों की देखरेख के लिए वह अपने खेत में आश्रय स्थल बनवा रहे हैं। घायल और बीमार जीवों को यहीं पर रखकर इलाज करेंगे। उन्होंने बताया कि वह अब तक करीब 1500 सांपों और जहरीले जीवों का रेस्क्यू कर चुके हैं। शिकारियों को सबक सिखाने के लिए वह कई बार कानूनी मदद ले चुके हैं।
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जी हां, वह न सिर्फ जीव जंतुओं की सेवा में लगे हैं, बल्कि शिकारियों को भी कानूनी मदद से सबक सिखा रहे हैं। उनको परिदों से हमदर्दी तो है ही, जहरीले जीवों से भी प्यार है। विवेक खेतों में मिलने वाले पक्षियों के लावारिस अंडों को इंक्यूबेटर मशीन में रखकर उनकी सुरक्षा और देखभाल कर रहे हैं। अंडे से जब चूजे निकलते हैं तो उनका भी तब तक ख्याल रखते हैं, जब तक की वे खुद समर्थ न हो जाएं। बाद में वे पक्षियों को जंगल में छोड़ देते हैं।
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खुद बनाई मशीन
विवेक करीब 14 वर्षों से जीव जंतुओं की सेवा कर रहे हैं। पशु चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र वर्मा के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2023 में मशीन बनाई। मशीन का ढांचा थर्माकोल से तैयार किया गया है। अंडों को गर्मी देने के लिए 100 वॉट का बल्ब, तापमान नियंत्रित करने के लिए नमी निर्धारण मशीन और अंडों को प्राकृतिक वातावरण देने के लिए एक कटोरे में पानी रखा गया है।
साथ ही, ऑक्सीजन के संचार के लिए मशीन में दो छेद भी किए गए हैं। विवेक के अनुसार, कबूतर के अंडे को बच्चा बनने में 15 से 18 दिन, मोर व बतख के अंडों को 27 से 31 दिन, गौरैया को 10 से 13 दिन और मुर्गी को 18 से 22 दिन लगते हैं।
सोशल वर्क से किया स्नातक
विवेक ने लखनऊ विश्वविद्यालय से सोशल वर्क
में स्नातक और डीएलएड की शिक्षा प्राप्त की है। मौजूदा समय में वह प्लाईवुड का व्यवसाय करते हैं। पशु पक्षियों की सेवा के लिए वह समय निकालत लेते हैं। उन्होंने इस नेक काम के लिए गांव के ही 10 युवाओं को जोड़कर ज्योत्सना सेवा समिति बनाई है।
जंगली जानवरों का भी रखेंगे ध्यान
विवेक ने बताया कि जंगली जानवरों की देखरेख के लिए वह अपने खेत में आश्रय स्थल बनवा रहे हैं। घायल और बीमार जीवों को यहीं पर रखकर इलाज करेंगे। उन्होंने बताया कि वह अब तक करीब 1500 सांपों और जहरीले जीवों का रेस्क्यू कर चुके हैं। शिकारियों को सबक सिखाने के लिए वह कई बार कानूनी मदद ले चुके हैं।

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