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Bareilly News: रामगंगा में बिना शोधन के गिर रहे 35 नाले, एसटीपी के मानक अधूरे
Sat, 01 Aug 2026 02:45 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 01 Aug 2026 02:45 AM IST
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बरेली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट बताती है कि रामगंगा नदी में प्रदूषण की स्थिति अभी भी गंभीर है। रिपोर्ट के अनुसार, रामगंगा और उसकी सहायक नदियों में कुल 56 नाले गिरते हैं। इनमें 35 नाले बिना शोधन के नदी में मिल रहे हैं।
बरेली के सरायतल्फी, गिरधारीपुर, चौबारी, हरुनगला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं, लेकिन फरवरी में हुई निगरानी में मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। नगर निकायों और औद्योगिक इकाइयों से बिना शोधित सीवेज व कचरा बहाया जा रहा है। अभिषेक कुसुम गुप्ता की याचिका पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में सुनवाई चल रही है। इसके तहत सीपीसीबी ने यह रिपोर्ट सौंपी है। वर्ष 2025 में कन्नौज, शेरकोट और कालागढ़ बैराज के नमूने भी मानकों पर खरे नहीं पाए गए। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की रिपोर्ट के अनुसार, रामगंगा बेसिन में 205 सकल प्रदूषणकारी उद्योग हैं। इनमें से 17 ने प्रदूषण मानकों का उल्लंघन किया।
15 को कारण बताओ और दो को बंद करने का नोटिस
उल्लंघनकारी 17 उद्योगों में से 15 को कारण बताओ नोटिस और दो को बंद करने का नोटिस दिया गया। प्रदूषण नियंत्रण के लिए कुछ उद्योगों के बिजली कनेक्शन भी काटे गए। नगर निगम ने 31,100 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया है। 31 एमएलडी क्षमता के चार एसटीपी संचालित हैं, जबकि 200 टीपीडी क्षमता का ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र निर्माणाधीन है। उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी ने 14 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान कर कार्रवाई की जानकारी न्यायालय को दी।
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रामगंगा को स्वच्छ बनाने के लिए चल रहे प्रयास
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट में स्वच्छ रामगंगा के प्रयासों का उल्लेख है। बरेली और मुरादाबाद में 1,171.08 करोड़ रुपये की लागत से 226 एमएलडी क्षमता की सीवेज परियोजनाएं संचालित हैं। मुरादाबाद में 80 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी निर्माणाधीन है। उत्तराखंड में भी 413.76 करोड़ रुपये की 59.8 एमएलडी क्षमता की तीन परियोजनाएं संचालित हैं। रामनगर, कोटद्वार और उधमसिंह नगर में 21 एमएलडी क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
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बरेली के सरायतल्फी, गिरधारीपुर, चौबारी, हरुनगला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील हैं, लेकिन फरवरी में हुई निगरानी में मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। नगर निकायों और औद्योगिक इकाइयों से बिना शोधित सीवेज व कचरा बहाया जा रहा है। अभिषेक कुसुम गुप्ता की याचिका पर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में सुनवाई चल रही है। इसके तहत सीपीसीबी ने यह रिपोर्ट सौंपी है। वर्ष 2025 में कन्नौज, शेरकोट और कालागढ़ बैराज के नमूने भी मानकों पर खरे नहीं पाए गए। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की रिपोर्ट के अनुसार, रामगंगा बेसिन में 205 सकल प्रदूषणकारी उद्योग हैं। इनमें से 17 ने प्रदूषण मानकों का उल्लंघन किया।
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15 को कारण बताओ और दो को बंद करने का नोटिस
उल्लंघनकारी 17 उद्योगों में से 15 को कारण बताओ नोटिस और दो को बंद करने का नोटिस दिया गया। प्रदूषण नियंत्रण के लिए कुछ उद्योगों के बिजली कनेक्शन भी काटे गए। नगर निगम ने 31,100 मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया है। 31 एमएलडी क्षमता के चार एसटीपी संचालित हैं, जबकि 200 टीपीडी क्षमता का ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र निर्माणाधीन है। उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी ने 14 प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान कर कार्रवाई की जानकारी न्यायालय को दी।
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रामगंगा को स्वच्छ बनाने के लिए चल रहे प्रयास
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की एनजीटी को सौंपी रिपोर्ट में स्वच्छ रामगंगा के प्रयासों का उल्लेख है। बरेली और मुरादाबाद में 1,171.08 करोड़ रुपये की लागत से 226 एमएलडी क्षमता की सीवेज परियोजनाएं संचालित हैं। मुरादाबाद में 80 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी निर्माणाधीन है। उत्तराखंड में भी 413.76 करोड़ रुपये की 59.8 एमएलडी क्षमता की तीन परियोजनाएं संचालित हैं। रामनगर, कोटद्वार और उधमसिंह नगर में 21 एमएलडी क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।