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UP: शासन तक पहुंची बरेली की सेवइयों की मिठास, ओडीओसी में शामिल, सालाना पांच करोड़ रुपये का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 19 Jan 2026 12:05 PM IST
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सार
बरेली की सेवइयों का जायका और महक देशभर में फैलेगी। यहां की सेवइयों को एक जिला एक व्यंजन की सूची में शामिल किया गया है, जिससे इसका कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
सेवइयां तैयार करता कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली की सेवइयों की मिठास और महक शासन तक पहुंची तो इसे एक जिला एक व्यंजन (ओडीओसी) की सूची में शामिल कर लिया गया। जिले में सालाना करीब पांच करोड़ रुपये का सेवइयों का कारोबार हो रहा है। अब इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है।
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सेवईं कारोबारियों के मुताबिक, शहर के परसाखेड़ा, नकटिया, हार्टमन में सेवईं के कारखाने लगे हैं। पुराना शहर समेत देहात क्षेत्रों में कुटीर उद्योग की तर्ज पर सीजन के अनुसार सेवईं बनाई जाती है। खासकर रक्षाबंधन, दीपावली, होली, रमजान के मौके पर सेवईं की मांग और खपत बढ़ जाती है। तब कारोबार 50 लाख रुपये प्रतिमाह से ज्यादा हो जाता है।
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सामान्य दिनों में प्रतिमाह करीब 20 लाख रुपये का कारोबार होता है। घरों में किमामी, सूखी मीठी, लच्छा, नवाबी, दूध वाली, फेनी सेवईं तैयार करते हैं। हार्टमन निवासी सेवईं कारखाना संचालक इरफान अली ने बताया कि त्योहारों से माहभर पहले कारखाना चलाते हैं। कारोबारी मुशाहिद हुसैन भी सीजन पर ही काम करते हैं। शेष दिन अन्य पकवान बनाकर बेचते हैं।
ये उत्पाद हैं प्रस्तावित
उपायुक्त उद्योग विकास यादव के मुताबिक, ओडीओसी योजना में सेवईं समेत छोले-भठूरे, चाट, बर्फी भी शामिल किया जाना शासन की ओर से प्रस्तावित है। बर्फी की पहचान पूर्व में आई एक फिल्म से जुड़ी है।
ऐसे बनती हैं जायकेदार सेवइयां
- किमामी : घी में भुनी बारीक सेवईं में चाशनी, मेवे, इलायची, गुलाब जल डालकर तैयार करते हैं।
- शीर खुरमा : दूध पकाकर गाढ़ा करते हैं। तब भुनी सेवईं, खजूर, मेवे डालकर बनाते हैं।
- लच्छा : पतले लच्छों को चाशनी के साथ बनाते हैं।
- नवाबी : तली हुई सेवईं को खोआ, रबड़ी, मेवे के साथ पकाया जाता है।
- सूखी मीठी : दूध और घी में भुनी सेवईं डालकर बनाते हैं।
- दूध वाली : दूध, चीनी से बनी सेवईं सामान्य पर लोकप्रिय पकवान है।
- फेनी : मैदे, घी से बनने वाली महीन सेवईं है। इसे दूध के साथ खाते हैं।
आसपास के जिलों में भी खूब है सेवईं की मांग
कारोबारियों के मुताबिक, बरेली की सेवईं की मांग आसपास के जिलों में भी है। ऑनलाइन कारोबार शुरू होने से पड़ोसी जिलों से भी ऑर्डर आते हैं। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां जो नूडल्स बनाती हैं, वह सीजन में सेवईं भी बनाकर कई नामों से बाजार में बिक्री करती हैं। इनकी मांग भी अच्छी होती है। हालांकि, फुटकर बाजार में परंपरागत कारोबारियों के उत्पाद की मांग होती है।
कारोबारियों के मुताबिक, बरेली की सेवईं की मांग आसपास के जिलों में भी है। ऑनलाइन कारोबार शुरू होने से पड़ोसी जिलों से भी ऑर्डर आते हैं। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां जो नूडल्स बनाती हैं, वह सीजन में सेवईं भी बनाकर कई नामों से बाजार में बिक्री करती हैं। इनकी मांग भी अच्छी होती है। हालांकि, फुटकर बाजार में परंपरागत कारोबारियों के उत्पाद की मांग होती है।
