जेल से भागा कैदी दबोचा: पैर में लगी पुलिस की गोली, अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा
दिनेश पर वर्ष 2020 में अमरोहा के डिडोली थाने में प्राथमिकी दर्ज हुआ था। उस पर धारा 377 भादवि, पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 और एससी एसटी एक्ट की धारा 3(2)V लगाई गई थी। अदालत ने उसे गंभीर अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आजीवन कारावास की सजा काट रहा सिद्धदोष कैदी इज्जतनगर स्थित केंद्रीय कारागार से भाग गया था। चार दिन बाद पुलिस ने उसे परतापुर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी से बचने के लिए कैदी ने पुलिस पर फायरिंग भी की, जवाबी फायरिंग में कैदी के पैर में गोली लगी।
पुलिस की पूछताछ में बंदी दिनेश ने बताया कि वह अमरोहा के डिडोली थाना क्षेत्र का निवासी है। उसे वर्ष 2020 में दर्ज एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह मामला धारा 377 भादवि, पॉक्सो एक्ट और एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। अमरोहा की एडीजे/पॉक्सो एक्ट अदालत ने उसे नौ जनवरी 2026 को आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा दी थी।
इसके बाद उसको 19 अप्रैल 2026 को केंद्रीय कारागार बरेली स्थानांतरित किया गया था। दिनेश 22 जून 2026 को जेल के फार्म में काम कर रहा था। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे वह पानी पीने के बहाने ट्यूबवेल के पास गया। वहां से वह ढेचा के खेत से छिपते हुए दीवार कूदकर भाग निकला। भागने के बाद वह परतापुर निवासी नासिर कुरैशी के घर छिप गया था। नासिर से उसकी मुलाकात जेल की दीवार के पास काम करते समय हुई थी।
पुलिस मुठभेड़ और गिरफ्तारी
पुलिस को दिनेश के परतापुर में छिपे होने की सूचना मिली थी। रात में वह नासिर से तमंचा लेकर अपने घर अमरोहा निकलने वाला था। सड़क पर एक व्यक्ति को देखकर वह एक खंडहर मकान में छिप गया। पुलिस के सामने आने पर पकड़े जाने के डर से उसने पुलिस पर फायर कर दिया। हालांकि, पुलिस ने उसे तुरंत घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
आपराधिक पृष्ठभूमि
दिनेश पर वर्ष 2020 में अमरोहा के डिडोली थाने में प्राथमिकी दर्ज हुआ था। उस पर धारा 377 भादवि, पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 और एससी एसटी एक्ट की धारा 3(2)V लगाई गई थी। अदालत ने उसे गंभीर अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उसे बिजनौर जेल से बरेली की केंद्रीय कारागार में स्थानांतरित किया गया था।