UP: बरेली में बिक रहा नकली पान मसाला, अवैध कारोबार से राजस्व को लग रही चपत, जिम्मेदार बेखबर
बरेली में नकली पान मसाला का अवैध कारोबार चल रहा है। इसका खुलासा तब हुआ, जब जीएसटी टीम ने एक फर्म पर छापा मारा। तीन दिन चली जांच में नौ करोड़ से ज्यादा की कर चोरी पकड़ी गई थी।
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बरेली में धनश्री ब्रांड से पान मसाला के अवैध निर्माण का मामला नया नहीं है। साल 2021 में बारादरी पुलिस ने गगन ब्रांडनेम से नकली पान मसाला फैक्टरी का भंडाफोड़ किया था। अब चार साल बाद अब नोएडा ने खेल उजागर किया है। जिले के जिम्मेदार अवैध गतिविधि से बेखबर रहे।
कारोबारियों के मुताबिक नकली पान मसाला का अवैध कारोबार बढ़ता जा रहा है। शहर-देहात के कई इलाकों में चोरी-छिपे ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली पाउच बेचे जा रहे हैं। पूर्व में पुलिस ने जोगी नवादा में एक ब्रांडेड कंपनी के नाम से नकली पान मसाला फैक्टरी पकड़ी थी।
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यहां भारी मात्रा में रैपर, 12 क्विंटल से अधिक बीड़ी व अन्य तंबाकू उत्पाद बरामद हुए थे। इसकी आपूर्ति दूसरे जिले में थी। सीजीएसटी नोएडा एवेजन टीम ने ताज टोबैका, नूइश फर्म के जिन साझीदार जगदीश चंद्र अग्रवाल, अकाउंटेंट गोपाल सक्सेना को पकड़ा था, वे मूलरूप से बरेली निवासी नहीं हैं।
ये है मामला
सिटी स्टेशन के निकट जसौली रोड स्थित नुइश फॉरएवर, सीबीगंज के बिधौलिया की ताज टोबैको प्रोडक्ट कंपनी पर सीजीएसटी टीम ने छापा मारा था। तीन दिनों तक चली जांच के बाद 9.12 करोड़ रुपये की कर चोरी की पुष्टि हुई। टीम फर्म के साझीदार जगदीश चंद्र अग्रवाल व अकाउंटेंट गोपाल सक्सेना को शनिवार को साथ ले गई। इस फर्म में धनश्री ब्रांड से पान मसाला बनाया जा रहा था।
किराये के भवन में कर रहे थे धंधा
ये लोग किराये पर भवन लेकर नकली उत्पाद तैयार कर दूसरे जिलों व राज्यों में बिक्री के लिए भेजते थे। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच की जाती है। लोगों से बिना बिल और संदिग्ध पैकिंग वाले पान मसाला उत्पाद खरीदने से बचने अपील की है।
नकली उत्पाद के सेवन से स्वास्थ्य जोखिम की आशंका
जानकारों के मुताबिक नकली पान मसाला बनाने में घटिया तंबाकू, केमिकल और सिंथेटिक खुशबू का इस्तेमाल होता है। कई बार सड़े पदार्थ जैसे सुपारी और रंग मिलाकर उत्पाद तैयार करते हैं। मानक से अधिक रसायनों के इस्तेमाल से कैंसर, मुंह के छाले, दांतों की बीमारी और पाचन तंत्र पर गंभीर असर की आशंका होती है। ऐसे उत्पादों की पहचान आम लोग नहीं कर पाते, क्योंकि पैकिंग हूबहू असली ब्रांड जैसी दिखती है।
न बिल न कोई दस्तावेज
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली गुटखा का कारोबार सिर्फ स्वास्थ्य के लिए ही खतरनाक नहीं है। इससे सरकार को भी राजस्व का नुकसान होता है। टैक्स चोरी के जरिए अवैध कारोबार करोड़ों रुपये का खेल बन चुका है। थोक बाजारों और छोटे कस्बों की दुकानों तक माल आसानी से पहुंच रहा है। कम कीमत और अधिक मुनाफे की वजह से विक्रेता जाने-अनजाने इस धंधे से जुड़ जाते हैं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रथम अक्षय गोयल ने बताया कि पान मसाला का कोई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी नहीं है। फिर भी हम लोग एहतियात के तौर पर जांच के लिए नमूना लेकर भेजते हैं। रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना और अन्य विधिक कार्रवाई की जाती है।