UP News: 'वंदे मातरम को राजनीतिक नजरिए से देखें, धार्मिक नहीं', मदनी के बयान पर बोले मौलाना रजवी
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि वंदे मातरम को हमेशा से राजनीतिक नारे के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नारा अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान लोगों में उत्साह भरने का काम करता था। यह हिंदू और मुसलमानों को एकजुट करने का प्रतीक था।
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ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने मौलाना महमूद मदनी के वंदे मातरम के विरोध पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वंदे मातरम को धार्मिक के बजाय राजनीतिक नजरिए से देखने की अपील की है।
मौलाना रज़वी ने कहा कि केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम पढ़ने का सर्कुलर जारी किया है। उन्होंने वंदे मातरम का विरोध करने वालों से गुजारिश की कि वे इसे धार्मिक दृष्टिकोण से न देखें। रज़वी ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदू और मुसलमान मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे। उस समय यह नारा जनता में जोश भरने के लिए लगाया जाता था। यह नारा लोगों में देशभक्ति और एकजुटता की भावना भरता था।
मौलाना ने 'इंकलाब जिंदाबाद' नारे से इसकी तुलना की। रज़वी के अनुसार, यदि वंदे मातरम गीत को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो किसी को कोई आपत्ति हो सकती है। यह एक ऐसा नारा था जिसने एकजुटता को बढ़ावा दिया और संघर्ष को मजबूत किया।
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