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Bareilly News: परसाखेड़ा आवासीय योजना के लिए जमीन देने से किसानों का इन्कार, बोले- तीन साल से धोखा दे रहे अफसर

संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 26 Jan 2026 10:42 AM IST
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सार

बरेली में आवास विकास परिषद की परसाखेड़ा आवासीय योजना सात गांवों की जमीन पर विकसित होनी है, लेकिन इन गांवों के कई किसानों ने जमीन देने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने अफसरों पर गुमराह करने और धोखा देने का आरोप लगाया है।  

Farmers refuse to give land for Parsakhera awas vikas yojana in Bareilly
लैंड पूलिंग स्कीम के तहत इन्हीं खेत पर बनानी हैं कॉलोनी - फोटो : संवाद
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विस्तार
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बरेली में आवास एवं विकास परिषद की परसाखेड़ा आवासीय योजना में जमीन देने से किसानों ने इन्कार कर दिया है। लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन देने की सहमति देने वाले किसानों ने अब रजिस्टर्ड एग्रीमेंट से हाथ पीछे खींच लिए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी तीन साल से किसानों के साथ धोखा कर रहे हैं। अब वह रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराकर किसानों की फसल मुआवजा भी बंद करना चाहते हैं।

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परसाखेड़ा आवासीय योजना गांव टियूलिया, धंतिया, हमीरपुर, वोहित, फरीदापुर रामचरण, बल्लिया, मिलक इमामगंज की 522 हेक्टेयर जमीन पर कॉलोनी विकसित होनी है। योजना वर्ष 2011 से प्रस्तावित है। दो नवंबर 2022 को लैंड पुलिंग स्कीम के तहत 149 हेक्टेयर जमीन पर योजना स्वीकृत हुई थी। बाद में परिषद ने सातों गांव की जमीन पर आवासीय योजना विकसित करने का निर्णय लिया था। दो सौ से अधिक किसानों ने लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 68 हेक्टेयर जमीन देने की सहमति दी थी।
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अप्रैल 2023 में आवास एवं विकास परिषद ने जमीन पर काम कराने के लिए किसानों से तीन वर्ष का लिखित समझौता किया। इसके मुताबिक, परिषद जब तक किसानों को उनकी जमीन पर प्लॉट  विकसित करके नहीं देता, तब तक पांच हजार रुपये प्रति हेक्टेयर प्रति  माह की दर से फसल का मुआवजा देगा। अब किसानों का कहना है कि तीन वर्ष बीतने को हैं, मगर अभी तक उनकी जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ। अधिकारी किसानों को गुमराह कर रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि परिषद मुआवजा देकर उनकी जमीन का अधिग्रहण करे, तभी किसान रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराएंगे।

जानिए, क्या है लैंड पूलिंग स्कीम
लैंड पूलिंग स्कीम का मतलब सहभागिता से है। इसके तहत अगर कोई किसान अपनी छह बीघा भूमि आवास एवं विकास परिषद को देगा तो इसके 50 फीसदी हिस्से यानी तीन बीघे पर सड़कें, लाइटें, पार्क आदि विकसित किए जाएंगे। 1.5 बीघा भूमि किसान को लौटाई जाएगी, जबकि शेष 1.5 बीघा भूमि पर परिषद कॉलोनी विकसित करेगा।
 

किसान बोले- जमीन हड़पना चाहते हैं अधिकारी 
किसान तोताराम ने बताया कि आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराकर किसानों की जमीन हड़पना चाहते हैं। हम ऐसा नहीं होने देंगे। वह हमारी जमीन पर काम शुरू कराएं, तभी हम रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराएंगे। वीरेंद्र कुमार ने कहा कि आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी पहले हमारी जमीन पर काम शुरू कराएं। किसानों व परिषद के बीच इसका लिखित एग्रीमेंट किया गया है। अब किसान उनके बहकावे में नहीं आएंगे। 

किसान अंगन लाल ने कहा कि आवास एवं विकास परिषद बड़ा बाइपास से किसानों की जमीन तक पहले सड़क बनवाए, फिर उनकी जमीन पर काम शुरू कराए। तभी वह परिषद के नाम अपनी जमीन का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराएंगे। किसान सर्वेश कुमार ने कहा कि परिषद हाईवे के बजाय नहर की तरफ से काम शुरू करने की योजना बना रहा है। हमारी जमीन का बैनामा कराकर हमें नक्शे पर प्लॉट आवंटित कर फसल मुआवजा बंद करना चाहता है। हम इसके लिए तैयार नहीं। 

आवास एवं विकास परिषद के अधिशासी अभियंता राजेंद्र नाथ राम ने बताया कि योजना का काम तेजी से चल रहा है। लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन देने वाले किसानों से रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराने की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू कर दी जाएगी। किसानों को नक्शे पर प्लॉट आवंटित कर दिए जाएंगे। चार सेक्टरों का लेआउट मुख्यालय से स्वीकृत होकर उन्हें प्राप्त हो गया है।

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