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Bareilly News: 30 वर्ष से ऊपर की आबादी की एनसीडी, स्क्रीनिंग में गैप, 64 फीसदी जांच से दूर
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बरेली। गैर संचारी रोगों (एनसीडी) की पहचान और इलाज के लिए चल रहे स्क्रीनिंग अभियान की रिपोर्ट से सेहत के प्रति लोगों की जागरूकता और विभागीय मुस्तैदी पर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार करीब 36 फीसदी आबादी की जांच हुई, जबकि 64 फीसदी स्क्रीनिंग से बाहर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार जिले में 19,53,348 लोगों को स्क्रीनिंग के लिए चिह्नित किया गया था। इनमें से 6,99,054 लोगों की पूरी स्क्रीनिंग हुई। 14,465 लोग संदिग्ध मिलने पर जांच को रेफर हुए। इनमें से 8,083 ही चिकित्साधिकारी से परामर्श के लिए पहुंचे। ब्लॉकवार देखें तो मीरगंज में सबसे अधिक 53 फीसदी स्क्रीनिंग हुई। यहां 75,339 चिह्नित लोगों में 39,649 की स्क्रीनिंग हुई। मझगवां में 42, फरीदपुर में 39 फीसदी स्क्रीनिंग हुई। क्यारा में सबसे कम 28 फीसदी, शेरगढ़ में 31, बिथरी चैनपुर में 33, भोजीपुरा, रामनगर में 34-34, शहर में 35 फीसदी लोगों की स्क्रीनिंग हुई।
स्क्रीनिंग के बाद संदिग्ध मिलने के मामले में भुता सबसे ऊपर रहा। यहां 1,437 लोग संदिग्ध मिलने पर रेफर हुए, जो स्क्रीनिंग के हिसाब से 4.5 फीसदी है। शेरगढ़ में 1,354 (चार फीसदी), भदपुरा में 1,061 (3.5 फीसदी), भोजीपुरा में 877 (2.7 फीसदी) लोग संदिग्ध पाए गए।
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शहरी क्षेत्र में 35 फीसदी ही पूरी स्क्रीनिंग
नगर निगम क्षेत्र की 6,19,866 लक्षित आबादी में से 2,14,384 लोगों की स्क्रीनिंग हुई, जो करीब 35 फीसदी रही। 4,679 संदिग्ध लोगों को आगे की जांच के लिए रेफर किया गया। इनमें 3,026 की चिकित्साधिकारी ने जांच की। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) के आंकड़ों में सीबीगंज क्षेत्र में सर्वाधिक 55.87 फीसदी, इज्जतनगर में 54.76 फीसदी, नदौसी में 51.16 फीसदी, कालीबाड़ी में 22.22 फीसदी, सिविल लाइंस में 23.92 फीसदी रहा। संदिग्ध मिलने की दर गंगापुरम में 10.8 फीसदी, जाटवपुरा में 8.2 फीसदी रही।
साइलेंट किलर हैं बीपी, शुगर
इंतजार न करें, जांच कराएं
जिला अस्पताल एनजीडी क्लीनिक प्रभारी डॉ. मयंक गुप्ता के मुताबिक एनसीडी में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह की स्क्रीनिंग प्राथमिकता पर होती है, ताकि शुरुआती दौर में ही संदिग्ध मिलने पर जरूरी जांच कराई जा सके। कहा कि बीपी, शुगर साइलेंट किलर की तरह हैं। स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते और व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ समझता रहता है। जबकि बीमारी धीरे-धीरे फैलती रहती है। इसलिए इंतजार के बजाय जांच कराएं।
वर्जन, एनसीडी जांच बढ़ाने के लिए सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिन केंद्रों की प्रगति लक्ष्य के सापेक्ष नहीं हैं, उन्हें सुधार के लिए कहा जा रहा है। 30 वर्ष की आयु के बाद बीपी, शुगर की जांच सभी को करानी चाहिए। जो स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क होती है।- डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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रिपोर्ट के अनुसार जिले में 19,53,348 लोगों को स्क्रीनिंग के लिए चिह्नित किया गया था। इनमें से 6,99,054 लोगों की पूरी स्क्रीनिंग हुई। 14,465 लोग संदिग्ध मिलने पर जांच को रेफर हुए। इनमें से 8,083 ही चिकित्साधिकारी से परामर्श के लिए पहुंचे। ब्लॉकवार देखें तो मीरगंज में सबसे अधिक 53 फीसदी स्क्रीनिंग हुई। यहां 75,339 चिह्नित लोगों में 39,649 की स्क्रीनिंग हुई। मझगवां में 42, फरीदपुर में 39 फीसदी स्क्रीनिंग हुई। क्यारा में सबसे कम 28 फीसदी, शेरगढ़ में 31, बिथरी चैनपुर में 33, भोजीपुरा, रामनगर में 34-34, शहर में 35 फीसदी लोगों की स्क्रीनिंग हुई।
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स्क्रीनिंग के बाद संदिग्ध मिलने के मामले में भुता सबसे ऊपर रहा। यहां 1,437 लोग संदिग्ध मिलने पर रेफर हुए, जो स्क्रीनिंग के हिसाब से 4.5 फीसदी है। शेरगढ़ में 1,354 (चार फीसदी), भदपुरा में 1,061 (3.5 फीसदी), भोजीपुरा में 877 (2.7 फीसदी) लोग संदिग्ध पाए गए।
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शहरी क्षेत्र में 35 फीसदी ही पूरी स्क्रीनिंग
नगर निगम क्षेत्र की 6,19,866 लक्षित आबादी में से 2,14,384 लोगों की स्क्रीनिंग हुई, जो करीब 35 फीसदी रही। 4,679 संदिग्ध लोगों को आगे की जांच के लिए रेफर किया गया। इनमें 3,026 की चिकित्साधिकारी ने जांच की। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) के आंकड़ों में सीबीगंज क्षेत्र में सर्वाधिक 55.87 फीसदी, इज्जतनगर में 54.76 फीसदी, नदौसी में 51.16 फीसदी, कालीबाड़ी में 22.22 फीसदी, सिविल लाइंस में 23.92 फीसदी रहा। संदिग्ध मिलने की दर गंगापुरम में 10.8 फीसदी, जाटवपुरा में 8.2 फीसदी रही।
साइलेंट किलर हैं बीपी, शुगर
इंतजार न करें, जांच कराएं
जिला अस्पताल एनजीडी क्लीनिक प्रभारी डॉ. मयंक गुप्ता के मुताबिक एनसीडी में हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह की स्क्रीनिंग प्राथमिकता पर होती है, ताकि शुरुआती दौर में ही संदिग्ध मिलने पर जरूरी जांच कराई जा सके। कहा कि बीपी, शुगर साइलेंट किलर की तरह हैं। स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते और व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ समझता रहता है। जबकि बीमारी धीरे-धीरे फैलती रहती है। इसलिए इंतजार के बजाय जांच कराएं।
वर्जन, एनसीडी जांच बढ़ाने के लिए सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिन केंद्रों की प्रगति लक्ष्य के सापेक्ष नहीं हैं, उन्हें सुधार के लिए कहा जा रहा है। 30 वर्ष की आयु के बाद बीपी, शुगर की जांच सभी को करानी चाहिए। जो स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क होती है।- डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ