UP News: रेलवे के तत्काल काउंटर टिकटों में भी दलालों की सेंधमारी, इस तरह करते हैं कालाबाजारी
रेलवे की टीम ने तत्काल टिकटों की कालाबाजारी में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। बरेली से जुबैर और कासगंज से ताजुद्दीन को पकड़ा। पूछताछ में दोनों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
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रेलवे पीआरएस (कंप्यूटरीकृत यात्री आरक्षण) में सुधार के बाद दलालों के निशाने पर तत्काल टिकटों की कालाबाजारी के लिए काउंटर निशाना बन गए हैं। दलाल इसमें लगातार सेंधमारी कर तत्काल में ऑफलाइन काउंटर टिकट हासिल कर रहे हैं। इसके अलावा अनाधिकृत आईआरसीटीसी की आईडी का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।
बरेली सिटी स्टेशन से शनिवार को एजाजनगर गौटिया निवासी जुबैर और कासगंज स्टेशन से सुल्तानपुर के थाना तुलसीपुर के नई बाजार बैरागी पुरवा निवासी ताजुद्दीन उर्फ ताजू की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे हुए हैं। दोनों को रेलवे की विशेष जांच शाखा और आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया।
प्रति टिकट मिलते थे 500 से 800 रुपये
मामले में कासगंज आरपीएफ पोस्ट पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। पूछताछ में जुबैर ने बताया है कि ताजुद्दीन उसको व्हाट्सएप के जरिये यात्रियों का विवरण भेजता था। इसी विवरण के आधार पर वह रेलवे आरक्षण केंद्रों पर जाकर आरक्षण मांगपत्र भरकर रात में ही नंबर लगा देता था और सुबह आसानी से तत्काल काउंटर आरक्षित टिकट बनवाने के बाद ताजुद्दीन को भेज देता था। उसे प्रति टिकट 500 से 800 रुपये मिलते थे। ताजुद्दीन और उसके खिलाफ यूपी व उत्तराखंड में पहले से भी टिकट की कालाबाजारी के मामले दर्ज हैं।
इज्जतनगर मंडल के सहायक सुरक्षा आयुक्त मोहम्मद असलम ने बताया कि जुबैर की निजी आईडी से एक यात्रा टिकट, 12 यात्रा समाप्ति टिकट मिले हैं। इसके अलावा लखनऊ से बांद्रा के बीच लखनऊ के कृष्णानगर निवासी संजय, सलमान, आरिफ के नाम के तत्काल काउंटर टिकट और दो आरक्षण मांगपत्र मिले हैं।
इस तरह करते हैं टिकटों की कालाबाजारी
टिकटों की कालाबाजारी करने वाले मुख्य दलाल काउंटर पर खुद लाइन में नहीं लगते। वह जगह-जगह स्टेशनों पर इसके लिए स्थानीय युवकों या किशोरों को कुछ रुपये देकर रात से ही काउंटरों के बाहर लाइन में खड़ा कर देते हैं। सुबह आरक्षित टिकट काउंटर खुलते ही पहले से भरे हुए कई फॉर्म और विभिन्न पहचान पत्रों के जरिये लंबी दूरी के तत्काल टिकट हासिल कर लेते हैं। मुंबई, कोलकाता, पूर्वांचल, दक्षिण भारत के स्टेशनों के टिकटों को फिर यह यात्रियों को 500 से लेकर 1500 रुपये तक अतिरिक्त में बेचते हैं।
अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध
रेलवे ने बीते दिनों ऑनलाइन टिकट प्रणाली में कई बदलाव करते हुए इसे ज्यादा सुरक्षित बनाया था। आधार वेरिफिकेशन और ओटीपी व्यवस्था को भी लागू किया गया। यह नियम भी लागू किया कि तत्काल टिकट बुकिंग खुलने के बाद अगले 30 मिनट तक एजेंट टिकट बुक नहीं कर सकेंगे।
इसके बाद से ही टिकटों की कालाबाजारी करने वालों के निशाने पर तत्काल काउंटर टिकट हैं। कई बार रेलवे के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पिछले दिनों ही बरेली के पीतांबरपुर स्टेशन पर तैनात रेलवे के मुख्य वाणिज्य सह आरक्षण पर्यवेक्षक शैलेंद्र दुबे को काउंटर टिकटों की कालाबाजारी में गिरफ्तार किया गया था।