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Bareilly News: आरामतलबी बना रही बीमार, 45% बच्चे फ्लैट फुट की चपेट में
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बरेली। घर से बाहर नहीं भेजना, नंगे पैर खेलने से मना करना, मोबाइल पर ही दिन गुजारना जैसी आदतों से पांच साल तक के बच्चे फ्लैट फुट की समस्या से जूझ रहे हैं। बरेली ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने हाल ही में एक स्कूल में कक्षा दो के सौ बच्चों की जांच की। इसमें 45 फीसदी फ्लैट फुट की चपेट में मिले।
आईएमए हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एसोसिएशन के सचिव डॉ. सुमित मेहरा ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व फ्लैट फुट (सपाट पैर) की समस्या 10 फीसदी तक सीमित थी। यह धीरे-धीरे दस वर्ष की आयु तक स्वत: समाप्त हो जाता है। अब पांच-सात वर्ष तक के करीब 45 फीसदी बच्चे इसकी चपेट में हैं। समय पर इलाज न हुआ तो 25-30 वर्ष की उम्र में ऐसे युवाओं के पैरों में स्थायी दर्द रहेगा। यह जीवनभर परेशान कर सकता है। रक्षा बल (सेना, अर्द्धसेना, पुलिस) भर्ती में अयोग्य हो जाएंगे। ऐसा ही रहा तो सैन्य जवानों की भर्ती संबंधी नए नियम बनाने होंगे।
जानिए, क्या होता है फ्लैट फुट
डॉ. सुमित के मुताबिक, इस स्थिति में पैर के निचले हिस्से में स्वाभाविक घुमाव (आर्च) नहीं बन पाता। आर्च का विकास तब होता है जब बच्चा मैदान में दौड़ता-भागता है, पैर पर शारीरिक दबाव पड़ता है। इसके बिना पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने से आर्च नहीं बनता।
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बच्चों को नंगे पैर भी चलाएं
डॉ. श्वेतांक अस्थाना के मुताबिक, नौ से 11 वर्ष की उम्र से पहले यदि बच्चों को नंगे पांव मैदान में खेलने, दौड़ने दिया जाए और शारीरिक व्यायाम कराया जाए तो समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। कंप्यूटर, लैपटॉप या कई घंटे लेटकर मोबाइल फोन चलाने से गर्दन, कमर और पिंडली में दर्द होता है। इससे निजात के लिए घंटेभर बाद पांच मिनट टहलने का सुझाव दिया। अध्यक्ष डॉ. आलोक शर्मा ने बताया कि बोन एंड ज्वॉइंट वीक-2026 के तहत सात दिन तक विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम हुए। सीपीआर प्रशिक्षण प्रत्येक व्यक्ति को सीखना चाहिए। हृदयाघात की स्थिति में अगर तत्काल सीपीआर मिल जाए तो जीवन प्रत्याशा बढ़ती है।
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आईएमए हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एसोसिएशन के सचिव डॉ. सुमित मेहरा ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व फ्लैट फुट (सपाट पैर) की समस्या 10 फीसदी तक सीमित थी। यह धीरे-धीरे दस वर्ष की आयु तक स्वत: समाप्त हो जाता है। अब पांच-सात वर्ष तक के करीब 45 फीसदी बच्चे इसकी चपेट में हैं। समय पर इलाज न हुआ तो 25-30 वर्ष की उम्र में ऐसे युवाओं के पैरों में स्थायी दर्द रहेगा। यह जीवनभर परेशान कर सकता है। रक्षा बल (सेना, अर्द्धसेना, पुलिस) भर्ती में अयोग्य हो जाएंगे। ऐसा ही रहा तो सैन्य जवानों की भर्ती संबंधी नए नियम बनाने होंगे।
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डॉ. सुमित के मुताबिक, इस स्थिति में पैर के निचले हिस्से में स्वाभाविक घुमाव (आर्च) नहीं बन पाता। आर्च का विकास तब होता है जब बच्चा मैदान में दौड़ता-भागता है, पैर पर शारीरिक दबाव पड़ता है। इसके बिना पैरों की मांसपेशियां कमजोर होने से आर्च नहीं बनता।
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बच्चों को नंगे पैर भी चलाएं
डॉ. श्वेतांक अस्थाना के मुताबिक, नौ से 11 वर्ष की उम्र से पहले यदि बच्चों को नंगे पांव मैदान में खेलने, दौड़ने दिया जाए और शारीरिक व्यायाम कराया जाए तो समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। कंप्यूटर, लैपटॉप या कई घंटे लेटकर मोबाइल फोन चलाने से गर्दन, कमर और पिंडली में दर्द होता है। इससे निजात के लिए घंटेभर बाद पांच मिनट टहलने का सुझाव दिया। अध्यक्ष डॉ. आलोक शर्मा ने बताया कि बोन एंड ज्वॉइंट वीक-2026 के तहत सात दिन तक विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम हुए। सीपीआर प्रशिक्षण प्रत्येक व्यक्ति को सीखना चाहिए। हृदयाघात की स्थिति में अगर तत्काल सीपीआर मिल जाए तो जीवन प्रत्याशा बढ़ती है।