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Bareilly News: बिजली बिल की मार, बचत पर नहीं ध्यान... दिन में जल रही स्ट्रीट लाइट
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 18 Mar 2026 06:20 AM IST
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बरेली। रात में राहगीरों को रोशनी दिखाने के लिए लगी स्ट्रीट लाइटें दिन में भी जल रही हैं। न तो इन्हें कोई बंद करने वाला है और न ही इन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 24 घंटे लाइटें जलने से एक ओर निगम को बिल का भारी भरकम भुगतान करना पड़ता है तो दूसरी ओर लाइट जल्द ही खराब हो जाती है। आलम यह है कि सूरज चढ़ने के बावजूद पुराना शहर, सैलानी, सीबीगंज और किला जैसे इलाकों में खंभों पर लगी लाइटें जगमगाती रहती हैं, जिससे हर महीने राजस्व को करोड़ों रुपये की चपत लग रही है।
नगर निगम के आंकड़ों पर बात करें तो स्ट्रीट लाइट के बिल पर ही हर महीने करीब दो से ढाई करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। दिन में लाइटें जलने के कारण यह बिल और भी भारी-भरकम हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि प्रकाश विभाग में 10 स्थाई कर्मचारियों की तैनाती होने के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह संविदा कर्मियों के भरोसे चल रही है। निगम ने भले ही कई इलाकों में ऑटोमेटिक सिस्टम लगाने का दावा किया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। वार्डों में लगी लाइटों को समय पर बंद करने वाला कोई नहीं है, जिससे न केवल बिजली की बर्बादी हो रही है, बल्कि लगातार जलने के कारण ये उपकरण भी जल्द खराब हो रहे हैं। कई जगह निगम की ओर से स्ट्रीट लाइटों के लिए 10-10 लाइटों के लिए एक बाॅक्स लगाया गया है जो जिसे आसपास के लोग खोलते व बंद करते है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा निगम के कोष और शहर की विद्युत व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है।
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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी लाखों रुपये की लागत से लगी है लाइटें
- शहर के सुंदर बनाने के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के पॉश इलाकों में लाखों रुपये की लागत से स्ट्रीट लगी हुई है। हालांकि जलाने बुझाने के लिए सिस्टम लगा हुआ है।
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बिजली के साथ सोलर लाइट भी दिनभर जल रही
- बिजली से चलने वाली लाइटों के साथ ही सोलर से चलने वाली लाइट भी दिनभर जलती रहती है। लगातार जलने के कारण ये लाइटे भी जल्दी खराब होती है। लेकिन लाइट लगाने के बाद इस ओर कोई ध्यान नहीं देता।
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बयान
- दिन के लाइट न जले किसका ध्यान रखा जाता है। जिन जगह लाइट जल रही है उन जगह दिखवाकर ठीक कराया जाएगा। - अजित सिंह, अवर अभियंता
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नगर निगम के आंकड़ों पर बात करें तो स्ट्रीट लाइट के बिल पर ही हर महीने करीब दो से ढाई करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। दिन में लाइटें जलने के कारण यह बिल और भी भारी-भरकम हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि प्रकाश विभाग में 10 स्थाई कर्मचारियों की तैनाती होने के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह संविदा कर्मियों के भरोसे चल रही है। निगम ने भले ही कई इलाकों में ऑटोमेटिक सिस्टम लगाने का दावा किया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। वार्डों में लगी लाइटों को समय पर बंद करने वाला कोई नहीं है, जिससे न केवल बिजली की बर्बादी हो रही है, बल्कि लगातार जलने के कारण ये उपकरण भी जल्द खराब हो रहे हैं। कई जगह निगम की ओर से स्ट्रीट लाइटों के लिए 10-10 लाइटों के लिए एक बाॅक्स लगाया गया है जो जिसे आसपास के लोग खोलते व बंद करते है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिसका सीधा खामियाजा निगम के कोष और शहर की विद्युत व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है।
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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी लाखों रुपये की लागत से लगी है लाइटें
- शहर के सुंदर बनाने के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के पॉश इलाकों में लाखों रुपये की लागत से स्ट्रीट लगी हुई है। हालांकि जलाने बुझाने के लिए सिस्टम लगा हुआ है।
बिजली के साथ सोलर लाइट भी दिनभर जल रही
- बिजली से चलने वाली लाइटों के साथ ही सोलर से चलने वाली लाइट भी दिनभर जलती रहती है। लगातार जलने के कारण ये लाइटे भी जल्दी खराब होती है। लेकिन लाइट लगाने के बाद इस ओर कोई ध्यान नहीं देता।
बयान
- दिन के लाइट न जले किसका ध्यान रखा जाता है। जिन जगह लाइट जल रही है उन जगह दिखवाकर ठीक कराया जाएगा। - अजित सिंह, अवर अभियंता