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Bareilly News: बिजली बिल और कनेक्शन विवाद पर छह साल बाद फैसला, उपभोक्ता आयोग ने खारिज की याचिका

Sat, 15 Aug 2026 12:49 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sat, 15 Aug 2026 12:49 AM IST
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Verdict delivered after six years in electricity bill and connection dispute; Consumer Commission dismisses petition.
बरेली। करीब छह साल पुराने 11.33 लाख रुपये के बिजली बिल और कनेक्शन विवाद में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने परिवादी की याचिका खारिज कर दी। आयोग ने कहा कि बिजली चोरी के आरोप, असेसमेंट बिल और विद्युत अधिनियम के तहत होने वाली कार्रवाई से जुड़े मामलों की सुनवाई उपभोक्ता आयोग के क्षेत्राधिकार में नहीं आती। आयोग ने परिवादियों की ओर से मांगी गई 7,63,713 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग भी स्वीकार नहीं की।
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हजियापुर, मॉडल टाउन निवासी मेहरवान सिंह और विक्रम सिंह ने अपने पिता सतपाल सिंह और पोती प्रीति पाल कौर के संबंध में विद्युत कनेक्शन को लेकर यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। बताया गया कि प्रीति पाल कौर के नाम घरेलू विद्युत कनेक्शन था। पूर्व में अपर सिविल जज प्रथम के 20 नवंबर 2003 के निर्णय के आधार पर विद्युत बिल को पांच किलोवाट के घरेलू विद्युत भार के अनुरूप संशोधित किए जाने का दावा किया गया था।
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इसके बाद विद्युत निगम की ओर से विद्युत अधिभार रिडक्शन फीस और मीटर शुल्क जमा कराया गया। परिवादियों के अनुसार फरवरी 2014 तक 7,10,363 रुपये का बिल बकाया बताया गया। आरोप था कि अनुरोध के बावजूद विभाग ने रिडक्शन फीस और मीटर सिक्योरिटी की राशि बिल में समायोजित नहीं की और बिल संशोधित नहीं किया। इसके बाद मार्च 2019 तक बकाया राशि बढ़कर करीब 11,33,153 रुपये हो गई।
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28 मार्च 2019 को विभागीय जांच के दौरान विद्युत चोरी का मामला भी सामने आया। चेकिंग रिपोर्ट में ट्रांसफार्मर से केबल डालकर बिजली चोरी किए जाने का आरोप लगाया गया। इस संबंध में विक्रम सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आयोग ने निष्कर्ष दिया कि मामला विद्युत चोरी, असेसमेंट और विद्युत कनेक्शन से जुड़ी विभागीय कार्रवाई से संबंधित है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता आयोग को सुनवाई का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है। आयोग ने परिवाद को निरस्त करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का आदेश दिया।
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