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राज्यसभा चुनाव 2026: कौन हैं श्रुति गंगवार, जिन्हें भाजपा ने बनाया उम्मीदवार; रुहेलखंड से खेला बड़ा दांव

Mon, 05 Oct 2026 04:57 PM IST
Mukesh Kumar अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Mon, 05 Oct 2026 04:57 PM IST
सार

भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए बरेली की श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है। वह बरेली से आठ बार के सांसद रहे संतोष गंगवार की बेटी हैं। संतोष गंगवार वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल हैं। श्रुति युवा उद्यमी हैं। जानिए इनके बारे में... 

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Who is Shruti Gangwar who has been nominated by the BJP for rajysabha elections
भाजपा उम्मीदवार श्रुति गंगवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए बरेली की श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाकर न सिर्फ संतोष गंगवार परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का रास्ता खोला है, बल्कि उद्यमिता, तकनीक, बैंकिंग और समाजसेवा के क्षेत्र में काम कर चुकी एक नई पीढ़ी के चेहरे को राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश का अवसर दिया है। झारखंड के राज्यपाल और बरेली से आठ बार सांसद रहे संतोष गंगवार की बेटी श्रुति वर्तमान में अर्बन कोऑपरेटिव बैंक बरेली की चेयरपर्सन हैं। भाजपा की ओर से सोमवार को घोषित उत्तर प्रदेश के आठ प्रत्याशियों में उनका नाम शामिल है। राज्यसभा चुनाव 16 अक्तूबर को होना है।

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आईआईटी रुड़की से की इंजीनियरिंग 
श्रुति गंगवार की प्रोफाइल को देखें तो उनकी राजनीतिक पहचान केवल पारिवारिक विरासत तक सीमित नहीं है। आईआईटी रुड़की से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और आईआईएम बंगलूरू से एंटरप्रेन्योरशिप मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद उन्होंने आईटी क्षेत्र में करियर शुरू किया। इंफोसिस से पेशेवर सफर की शुरुआत करने के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर काम किया।
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जब स्टार्टअप शब्द नया था, तब शुरू किया उद्यम
श्रुति की उद्यमी पहचान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव 2012 रहा। उनके अनुसार, उस दौर में उन्होंने बंगलूरू में शिक्षा और आईटी क्षेत्र से जुड़ा एडटेक स्टार्टअप शुरू किया। इसके बाद 2016 में नोएडा में आईटी सर्विसेज कंपनी स्थापित की। इसका फोकस रोजगार सृजन के साथ छोटे शहरों से आने वाले युवाओं और महिलाओं को अवसर देने पर रहा।

आज उनके अनुसार कंपनी करीब 250 युवाओं को रोजगार दे रही है और महिलाओं की भागीदारी को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही वजह है कि उनकी राजनीतिक प्रोफाइल में उद्यमिता और महिला सशक्तीकरण को भी प्रमुखता से रखा जा रहा है।

बैंकिंग में तकनीक और वित्तीय समावेशन पर जोर
श्रुति गंगवार का बरेली से संस्थागत जुड़ाव अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के जरिए मजबूत हुआ। अगस्त 2024 में वह बैंक की चेयरपर्सन निर्विरोध चुनी गई थीं। इससे पहले अपनी मां सौभाग्यवती गंगवार के निधन के बाद वह बैंक के निदेशक मंडल में निर्विरोध चुनी गई थीं।

बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी श्रुति गंगवार चेयरपर्सन के रूप में दर्ज हैं। बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में उन्होंने डिजिटल वित्त, वित्तीय समावेशन, साइबर सुरक्षा और सदस्य शिक्षा को भविष्य की प्राथमिकताओं में रखा है।

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बैंक ने हाल में छोटे व्यापारियों, फेरी वालों और कम आय वाले लोगों के लिए माइक्रो क्रेडिट योजना भी शुरू की है। बैंक की ओर से बताया गया कि योजना में छोटे कारोबारियों को आय प्रमाण के बिना ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है।

22 हजार विद्यार्थियों तक शिक्षा की पहल
श्रुति की प्रोफाइल का एक अन्य पक्ष समाजसेवा है। उनके अनुसार बाल शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अब तक 22 हजार से अधिक स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। ग्रामीण और शहरी स्कूलों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा के लिए वाटर कूलर और वाटर टैंक भी स्थापित कराए गए।

भारत सेवा ट्रस्ट के माध्यम से पिछले करीब 16 वर्षों से मोतियाबिंद और नेत्र परीक्षण शिविरों के आयोजन का दावा भी उनकी प्रोफाइल में किया गया है। इन शिविरों के जरिये हजारों लोगों को निशुल्क जांच और उपचार उपलब्ध कराने की बात कही गई है। दिल्ली में रहते हुए बरेली के गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के उपचार और संबंधित संस्थानों के बीच समन्वय में भी उनकी भूमिका बताई जाती है।

2004 से चुनावी राजनीति से जुड़ाव
राजनीति में श्रुति की सक्रियता भी नई नहीं बताई जाती। उनके अनुसार 2004, 2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने भाजपा के अभियानों में भाग लिया। 2019 में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ क्षेत्र में अभियान चलाया और 2022 के विधानसभा चुनाव में बरेली लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभाओं में संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी की।

हाल के दिनों में भी उनकी सक्रियता बढ़ी है। एक अक्तूबर को बहेड़ी में कार्यक्रम के दौरान वह भाजपा नेत्री और अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरपर्सन के रूप में सार्वजनिक कार्यक्रम में मौजूद थीं। वहां उन्होंने युवतियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता पर जोर दिया था।

संतोष गंगवार की विरासत से मिली राजनीतिक जमीन
श्रुति गंगवार के राजनीतिक सफर को उनके पिता संतोष गंगवार की पृष्ठभूमि से अलग करके देखना मुश्किल है। संतोष गंगवार बरेली से आठ बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। वर्तमान में वह झारखंड के राज्यपाल हैं। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उन्हें बैंक का मुख्य प्रवर्तक और संरक्षक दर्ज किया गया है।

यही वजह है कि राज्यसभा टिकट को बरेली की राजनीति में केवल एक नए चेहरे की एंट्री के रूप में नहीं देखा जा रहा। यह संतोष गंगवार की चार दशक से अधिक लंबी राजनीतिक विरासत में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।

हालांकि श्रुति की अपनी प्रोफाइल में उद्यमिता, बैंकिंग और समाजसेवा का अलग ट्रैक दिखाई देता है। राज्यसभा प्रत्याशी बनने के बाद अब यही अनुभव उनकी राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान का आधार बनेगा।

2027 से पहले महिला और युवा चेहरे का संदेश
उत्तर प्रदेश में भाजपा की राज्यसभा सूची में श्रुति गंगवार के साथ पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत भी महिला चेहरों में शामिल हैं। आठ नामों में श्रुति का चयन बरेली के लिए विशेष महत्व रखता है।

राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर उनके चयन के तीन पहलू दिखाई देते हैं—पहला, बरेली में संतोष गंगवार परिवार की राजनीतिक मौजूदगी को बनाए रखना; दूसरा, महिला नेतृत्व को आगे लाना; और तीसरा, उद्यमिता और तकनीकी पृष्ठभूमि वाले चेहरे को राष्ट्रीय राजनीति में स्थान देना। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की सीधी रणनीति कहना अभी भाजपा के आधिकारिक बयान के अभाव में जल्दबाजी होगी, लेकिन राज्यसभा टिकट ने बरेली की राजनीति में श्रुति की भूमिका को निश्चित रूप से पहले से कहीं बड़ा कर दिया है।

अब विरासत के साथ अपनी राजनीतिक पहचान की परीक्षा
संतोष गंगवार की बेटी होना श्रुति के लिए मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि है, लेकिन राज्यसभा में उनकी पहचान उनकी अपनी सक्रियता और मुद्दों पर निर्भर करेगी। उद्यमिता में तकनीक और रोजगार, बैंकिंग में वित्तीय समावेशन और समाजसेवा में शिक्षा-स्वास्थ्य-इन तीन क्षेत्रों का अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन की अलग तस्वीर पेश करता है।

बरेली की राजनीति में अब सवाल यह नहीं रह गया है कि गंगवार परिवार की अगली पीढ़ी सक्रिय राजनीति में आएगी या नहीं। राज्यसभा प्रत्याशी घोषित होने के बाद यह अध्याय शुरू हो चुका है। संतोष गंगवार ने बरेली की लोकसभा राजनीति में जिस लंबे दौर का नेतृत्व किया, श्रुति गंगवार उसी विरासत को उच्च सदन के रास्ते नई पीढ़ी और नए पेशेवर अनुभवों के साथ आगे ले जाने की तैयारी में हैं।
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