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Basti News: लू के थपेड़ों से लाल हो रहे चेहरे, तल्ख धूप में झुलस रही बदन
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गर्मी से राहत पाने के लिए बदन को ढककर सड़क पर चलते लोग। संवाद
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बस्ती। इस बार शुरूआत में ही गर्मी ने प्रचंड रूप अख्तियार कर लिया है। दिन में तापमान 42 डिग्री तक चढ़ रहा है। गर्म पछुआ हवा पूरे दिन चल रही है। दिन में लू के थपेड़ों से चेहरे लाल पड़ जा रहे हैं। तल्ख धूप में पड़ने पर बदन झुलस रही है। गर्मी का प्रकोप रात में भी कम नहीं हो रहा है। दोपहर में तो सड़कों पर सन्नाटा छाया हुआ है। सुबह दस बजे के बाद से ही लोगों का घर से निकलना दुश्वार हो जा रहा है।
इधर एक सप्ताह से गर्मी ने जनजीवन व्याकुल कर दिया है। दोपहर 12 बजे के बाद पारा 42 से 43 डिग्री के बीच रिकार्ड हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना हैं कि सामान्य तौर 35 से 40 डिग्री तक ही तापमान सहने योग्य होता है। इससे अधिक तापमान सेहत के लिए नुकसानदेह होता है। तापमान बढ़ने से धूप में खड़े वाहन पूरी तरह गर्म हो जा रहे हैं। कंकरीट के मकान-दुकान सभी गर्म हो जा रहे हैं। शहर की कॉलोनियों में बिना एसी वाले मकान में रहना दुश्वार हो गया है।
पर्यावरण विद् प्रोफेसर प्रमोद पांडेय का कहना हैं कि पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ कर बसावट बढ़ाने का ही यह नतीजा है। शहरी क्षेत्र का लगातार विस्तार होने से जलाशय और हरियाली नष्ट होती गई। जबकि यह दोनों प्रकृति के मित्र है। अब बिना हरियाली के कॉलोनियों में तापमान नियंत्रण का कोई उपाय नहीं है। जिससे कंकरीट के मकान गर्म हो जा रहे हैं। इसका असर रात तक बरकरार है। घरों में कूलर, पंखा चलाने के बाद गर्मी का एहसास किया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे और भारी पड़ सकते हैं। तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। इसके बाद हल्की राहत के संकेत जरूर है, लेकिन तब तक लू जैसे हालात बनना तय माना जा रहा है। यानी आने वाले दो दिन निर्णायक होंगे। गर्मी का असर अब साफ तौर पर जनजीवन पर दिखने लगा है। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा है। दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक और ठेला चलाने वाले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। स्कूल से लौटते बच्चे और बुजुर्ग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों में उल्टी, चक्कर, कमजोरी और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ने लगे हैं।
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अब गलियों में भी नहीं मिल रही राहत
अभी एक से डेढ़ दशक पहले तक जिन गलियों में गर्मी के सीजन में थोड़ी राहत मिलती थी अब वहां भी तपिश खड़ा नहीं होने दे रही है। गांधीनगर के राकेश जायसवाल बताते हैं कि पहले गांधीनगर त्रिपाठी गली, बाटा गली में गर्मी के सीजन में दोपहर के समय बहुत लोग राहत के लिए आकर रुक जाते थे। यहां कुछ ठंडा महसूस होता था। मगर अब घर-दुकान में एसी लग गई है। एसी से निकलने वाली गर्म हवाओं से इन गलियों की तासीर गर्म हो गई है। अब लोग भीषण गर्मी में यहां सुकून नहीं महसूस कर रहे हैं।
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दिन-रात की गर्मी से शरीर को खतरा
दिन की तपिश के बाद अगर रात भी गर्म रहे तो शरीर के लिए खतरा दोगुना हो जाता है। शहर में इन दिनों आधी रात के बाद भी तापमान ऊंचा बना हुआ है, जिससे शरीर का कूलिंग सिस्टम अस्तव्यस्त हो चुका है। यही वजह है कि लोग रात भर पसीने में भीगते, करवट बदलते और सुबह थके हुए उठ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के एमडी मेडिसिन डॉ. रजत पांडेय बताते हैं कि गर्मी के इस पैटर्न का सीधा असर शरीर की रिकवरी प्रक्रिया पर पड़ता है। आम तौर पर रात में तापमान गिरने पर शरीर खुद को ठंडा करता है, लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो अंदरूनी तापमान बना रहता है। इससे डिहाइड्रेशन, थकान और चिड़चिड़ापन तेजी से बढ़ने लगता है। गर्म रातें दिन की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं, क्योंकि शरीर को आराम और रिकवरी का मौका ही नहीं मिलता। नींद पूरी न होने से दिमाग और शरीर दोनों पर असर पड़ता है, एकाग्रता घटती है, सिरदर्द बढ़ता है और दिनभर सुस्ती बनी रहती है।
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बचाव के प्रमुख उपाय
- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
- सिर को गमछा, टोपी या छाते से ढकें, हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
- पर्याप्त पानी, नींबू पानी, छाछ, ओआरएस लें, खाली पेट घर से न निकलें।
- धूप में ज्यादा देर तक न रहें, बीच-बीच में आराम करें।
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, सोने से पहले पर्याप्त पानी पीएं।
- भारी और मसालेदार भोजन से बचें, कमरे में हवा का क्रॉस वेंटिलेशन रखें।
- हल्के सूती कपड़े पहनें, जरूरत हो तो गीले कपड़े/ठंडे पानी से शरीर ठंडा करें।
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इधर एक सप्ताह से गर्मी ने जनजीवन व्याकुल कर दिया है। दोपहर 12 बजे के बाद पारा 42 से 43 डिग्री के बीच रिकार्ड हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना हैं कि सामान्य तौर 35 से 40 डिग्री तक ही तापमान सहने योग्य होता है। इससे अधिक तापमान सेहत के लिए नुकसानदेह होता है। तापमान बढ़ने से धूप में खड़े वाहन पूरी तरह गर्म हो जा रहे हैं। कंकरीट के मकान-दुकान सभी गर्म हो जा रहे हैं। शहर की कॉलोनियों में बिना एसी वाले मकान में रहना दुश्वार हो गया है।
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पर्यावरण विद् प्रोफेसर प्रमोद पांडेय का कहना हैं कि पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ कर बसावट बढ़ाने का ही यह नतीजा है। शहरी क्षेत्र का लगातार विस्तार होने से जलाशय और हरियाली नष्ट होती गई। जबकि यह दोनों प्रकृति के मित्र है। अब बिना हरियाली के कॉलोनियों में तापमान नियंत्रण का कोई उपाय नहीं है। जिससे कंकरीट के मकान गर्म हो जा रहे हैं। इसका असर रात तक बरकरार है। घरों में कूलर, पंखा चलाने के बाद गर्मी का एहसास किया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटे और भारी पड़ सकते हैं। तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। इसके बाद हल्की राहत के संकेत जरूर है, लेकिन तब तक लू जैसे हालात बनना तय माना जा रहा है। यानी आने वाले दो दिन निर्णायक होंगे। गर्मी का असर अब साफ तौर पर जनजीवन पर दिखने लगा है। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा है। दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक और ठेला चलाने वाले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। स्कूल से लौटते बच्चे और बुजुर्ग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। अस्पतालों में उल्टी, चक्कर, कमजोरी और डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ने लगे हैं।
अब गलियों में भी नहीं मिल रही राहत
अभी एक से डेढ़ दशक पहले तक जिन गलियों में गर्मी के सीजन में थोड़ी राहत मिलती थी अब वहां भी तपिश खड़ा नहीं होने दे रही है। गांधीनगर के राकेश जायसवाल बताते हैं कि पहले गांधीनगर त्रिपाठी गली, बाटा गली में गर्मी के सीजन में दोपहर के समय बहुत लोग राहत के लिए आकर रुक जाते थे। यहां कुछ ठंडा महसूस होता था। मगर अब घर-दुकान में एसी लग गई है। एसी से निकलने वाली गर्म हवाओं से इन गलियों की तासीर गर्म हो गई है। अब लोग भीषण गर्मी में यहां सुकून नहीं महसूस कर रहे हैं।
दिन-रात की गर्मी से शरीर को खतरा
दिन की तपिश के बाद अगर रात भी गर्म रहे तो शरीर के लिए खतरा दोगुना हो जाता है। शहर में इन दिनों आधी रात के बाद भी तापमान ऊंचा बना हुआ है, जिससे शरीर का कूलिंग सिस्टम अस्तव्यस्त हो चुका है। यही वजह है कि लोग रात भर पसीने में भीगते, करवट बदलते और सुबह थके हुए उठ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के एमडी मेडिसिन डॉ. रजत पांडेय बताते हैं कि गर्मी के इस पैटर्न का सीधा असर शरीर की रिकवरी प्रक्रिया पर पड़ता है। आम तौर पर रात में तापमान गिरने पर शरीर खुद को ठंडा करता है, लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो अंदरूनी तापमान बना रहता है। इससे डिहाइड्रेशन, थकान और चिड़चिड़ापन तेजी से बढ़ने लगता है। गर्म रातें दिन की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं, क्योंकि शरीर को आराम और रिकवरी का मौका ही नहीं मिलता। नींद पूरी न होने से दिमाग और शरीर दोनों पर असर पड़ता है, एकाग्रता घटती है, सिरदर्द बढ़ता है और दिनभर सुस्ती बनी रहती है।
बचाव के प्रमुख उपाय
- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें।
- सिर को गमछा, टोपी या छाते से ढकें, हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें।
- पर्याप्त पानी, नींबू पानी, छाछ, ओआरएस लें, खाली पेट घर से न निकलें।
- धूप में ज्यादा देर तक न रहें, बीच-बीच में आराम करें।
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें, सोने से पहले पर्याप्त पानी पीएं।
- भारी और मसालेदार भोजन से बचें, कमरे में हवा का क्रॉस वेंटिलेशन रखें।
- हल्के सूती कपड़े पहनें, जरूरत हो तो गीले कपड़े/ठंडे पानी से शरीर ठंडा करें।

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