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स्टेडियम घोटाला : 10 लाख की वित्तीय अनियमितता उजागर, जांच अभी जारी
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बस्ती। शहीद सत्यवान सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण, ड्रेनेज सिस्टम और मिट्टी पटाई आदि कार्य में अनियमितता पकड़ी गई है। प्रारंभिक जांच में स्टेडियम में करीब 10 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। हालांकि, अभी जांच जारी है। इससे लग रहा है कि बड़ा खुलासा होगा।
बता दें कि बस्ती स्टेडियम में पिछले दो साल से कार्य चल रहा है। आरोप है कि गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। इस पर खिलाड़ियों ने ही शिकायत दर्ज कराई थी। मामला शासन स्तर पर पहुंचा तो आनन-फानन में उप निदेशक खेल को बस्ती आना पड़ा। उन्होंने अभिलेख समेत अन्य कार्यों की जांच की, जिसमें गड़बड़ी पकड़ी गई हैं।
शहीद सत्यवान सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं में पूर्व में करीब नौ करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। दो मद से हॉस्टल, बैडमिंटन हॉल और स्टेडियम का निर्माण होना है, मगर अधिकांश कार्य अधूरे हैं और कार्यदायी संस्था यूपी आरएनएसएस के तहत कार्य पूर्ण दिखाकर हैंडओवर करवा दिया गया है। जानकारों का कहना है कि निर्माण एजेंसी बिना कार्य पूर्ण किए ही विभागीय स्तर पर कार्य पूर्ण दिखवाने में खेल किया गया है।
प्रकरण का संज्ञान खेल निदेशालय ने लिया, इसके बाद उप निदेशक खेल विभाग मुद्रीका पाठक बस्ती पहुंचीं और मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर रही हैं। प्रकरण में जांच के साथ परियोजनाओं का निरीक्षण किया और वास्तविक स्थिति, वित्तीय लेनदेन व जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की।
उप निदेशक ने 10 साल से बंद पड़े स्टोर रूम का ताला तोड़वाकर देखा। वहीं, एक परियोजना छात्रावास है जिसे हैंडओवर भी कर दिया गया है, जबकि मौके पर कई खामियां मिली हैं।
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बता दें कि बस्ती स्टेडियम में पिछले दो साल से कार्य चल रहा है। आरोप है कि गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। इस पर खिलाड़ियों ने ही शिकायत दर्ज कराई थी। मामला शासन स्तर पर पहुंचा तो आनन-फानन में उप निदेशक खेल को बस्ती आना पड़ा। उन्होंने अभिलेख समेत अन्य कार्यों की जांच की, जिसमें गड़बड़ी पकड़ी गई हैं।
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शहीद सत्यवान सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेल सुविधाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं में पूर्व में करीब नौ करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। दो मद से हॉस्टल, बैडमिंटन हॉल और स्टेडियम का निर्माण होना है, मगर अधिकांश कार्य अधूरे हैं और कार्यदायी संस्था यूपी आरएनएसएस के तहत कार्य पूर्ण दिखाकर हैंडओवर करवा दिया गया है। जानकारों का कहना है कि निर्माण एजेंसी बिना कार्य पूर्ण किए ही विभागीय स्तर पर कार्य पूर्ण दिखवाने में खेल किया गया है।
प्रकरण का संज्ञान खेल निदेशालय ने लिया, इसके बाद उप निदेशक खेल विभाग मुद्रीका पाठक बस्ती पहुंचीं और मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर रही हैं। प्रकरण में जांच के साथ परियोजनाओं का निरीक्षण किया और वास्तविक स्थिति, वित्तीय लेनदेन व जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की।
उप निदेशक ने 10 साल से बंद पड़े स्टोर रूम का ताला तोड़वाकर देखा। वहीं, एक परियोजना छात्रावास है जिसे हैंडओवर भी कर दिया गया है, जबकि मौके पर कई खामियां मिली हैं।

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