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Basti News: नेपाल का जेन-जी मॉडल...पारंपरिक सियासत को युवाओं की चुनौती

संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 08 Mar 2026 01:39 AM IST
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Nepal's Gen-G model... the youth's challenge to traditional politics
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में जेन-जी नेतृत्व के उभार पर संवैधानिक मुहर लगने के बाद वहां की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। इस बदलाव की गूंज भारत के पड़ोसी राज्यों, खासकर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच रही है। युवाओं की मुद्दा केंद्रित और डिजिटल फर्स्ट राजनीति, पारंपरिक जाति और धर्म आधारित सियासत को चुनौती देती नजर आ रही है।
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राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नेपाल में उभरी यह नई राजनीतिक शैली आने वाले समय में यूपी की राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है। युवा मतदाताओं का बढ़ता प्रभाव और सोशल मीडिया का विस्तार राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर सकता है।
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दरअसल, नेपाल में युवा नेताओं ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को सिर्फ प्रचार का माध्यम नहीं बल्कि जनसंवाद का प्रभावी मंच बना लिया है। रोजगार, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक विमर्श को चुनौती दी। नेपाली राजनीति को करीब से समझने वाले डॉ. अखिलेश प्रसाद के अनुसार, युवाओं ने सीधे जनता से संवाद की ऐसी शैली अपनाई, जिसने राजनीति में नई ऊर्जा पैदा की।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. शुभेंदु त्रिपाठी कहते हैं कि नेपाल का यह नया सियासी मॉडल बताता है कि युवा नेतृत्व अगर संगठित हो जाए तो पारंपरिक राजनीतिक संरचनाओं को चुनौती देकर सत्ता तक पहुंच सकता है। उधर, यूपी की राजनीति लंबे समय से जातिगत और धर्म आधारित समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। हालांकि बदलते सामाजिक और डिजिटल माहौल में युवा मतदाता इस पैटर्न को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेन के जरिये युवाओं तक मुद्दा-केंद्रित संदेश पहुंचाना अब राजनीतिक दलों की मजबूरी बनता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यूपी में भी युवा नेताओं और युवा मतदाताओं की ऊर्जा सही दिशा में संगठित हो जाए तो आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है। डिजिटल जागरूकता, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे युवाओं के लिए अहम बनते जा रहे हैं और यही विषय भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
समाजशास्त्री डॉ. रघुवर पांडेय बताते हैं कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद यूपी की राजनीति में अक्सर धर्म, जाति और वर्ग से जुड़े विवादित मुद्दे ही प्रमुखता से सामने आते हैं। कटाक्ष, भड़काऊ टिप्पणियां और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप सोशल मीडिया बहस का हिस्सा बन जाते हैं। इसके विपरीत नेपाल में युवाओं ने सोशल मीडिया को रोजगार, शिक्षा, भ्रष्टाचार और पारदर्शिता जैसे विषयों से जोड़कर सकारात्मक राजनीतिक संवाद का माध्यम बनाया।
विश्लेषकों के अनुसार, अगर यूपी में भी सोशल मीडिया का उपयोग इसी तरह मुद्दा-केंद्रित और रचनात्मक तरीके से होने लगे तो आने वाले समय में चुनावी विमर्श का स्वरूप बदल सकता है। नेपाल में हुए बदलाव यह संकेत देते हैं कि जब युवा नेतृत्व और युवा मतदाता एक साथ सक्रिय होते हैं, तो पारंपरिक राजनीति की दिशा भी बदल सकते हैं।
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