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Basti News: निजी अस्पताल में इंजेक्शन लगने के बाद प्रसूता की मौत, परिजनों ने किया हंगामा

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 12:38 AM IST
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Pregnant woman dies after being injected in a private hospital, family members create ruckus
मृतका अलका वर्मा, की फाइल फोटो स्रोत परिजन
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बस्ती। कोतवाली थाना क्षेत्र के जिगना चौराहे के पास संचालित एक निजी हॉस्पिटल में प्रसूता को इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। यहां से उसे रेफर कर दिया गया। हॉयर सेंटर ले जाते समय महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। परिजन शव लेकर अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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पुलिस के अनुसार, अलका वर्मा (28) पत्नी बृजेश चौधरी निवासी ग्राम जगदीशपुर मंझरिया को परिजनों ने प्रसव पीड़ा होने पर जिगिना स्थित निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। आरोप है कि प्रसव के बाद सोमवार रात हॉस्पिटल की एक स्टॉफ ने इंजेक्शन लगाया, इसके बाद प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। हालत खराब होने पर प्रसूता को रेफर कर दिया गया और परिजन आनन-फानन में हॉयर सेंटर लेकर पहुंचे, वहां जांच के बाद चिकित्सक ने बताया कि महिला की मौत हो चुकी है।
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मौत की बात सुनते ही परिजन भड़क उठे और शव लेकर सीधे हॉस्पिटल पहुंच गए और कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि अप्रशिक्षित स्टॉफ के गलत इंजेक्शन लगाने के कारण मौत हुई है। डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह ने बताया कि घटना की जानकारी हुई है, अभी कोई शिकायत नहीं मिली है। घटना की जानकारी ली जा रही है। मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच में जुटी रही।
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सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जांच पूरी होने तक अस्पताल की आईपीडी और ओपीडी सेवा पर रोक लगा दी गई है।
नोडल अधिकारी डॉ. एसबी सिंह के अनुसार, अस्पताल का पंजीकरण है। वहीं लोगों ने कहा है कि लगातार निजी अस्पतालों में मरीजों की मौत हो रही है। इस पर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। बताया गया कि मुंडेरवा स्थित अस्पताल का मामला शांत नहीं हुआ कि, चार ही दिन में दूसरी घटना हुई।
अमृत अस्पताल सील, दो कर्मी गिरफ्तार, संचालक और डॉक्टर फरार : बस्ती। मुंडेरवा स्थित अमृत अस्पताल में महिला की मृत्यु मामले में अब तक दो कर्मी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं, अस्पताल के संचालक डॉ. मनीष श्रीवास्तव अभी तक फरार बताए जा रहे हैं। पंजीकरण जिस डॉक्टर के नाम पर है, डॉ. प्रतिभा शर्मा भी मौके से गायब थीं। अब पुलिस दोनों की तलाश में है। बताया गया कि 14 मई रात में लोहदर निवासी अनिल चौधरी अपनी पत्नी को खुजली की शिकायत होने पर भर्ती किए थे। सुबह मौत होने पर वहां हंगामा हुआ। आरोप था कि तीन इंजेक्शन गलत लगा दिए थे, जिसके बाद मौत हुई थी।
मामले में पुलिस ने संचालक समेत अन्य पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए अब तक दो कर्मी गिरफ्तार किए गए हैं। वहीं, अस्पताल सील है। जांच में पता चला है कि 30 अप्रैल 2026 को अस्पताल का पंजीयन समाप्त हो गया है। आवेदन है, मगर अभी तक नवीनीकरण नहीं हुआ है। फिर भी अस्पताल संचालित होता रहा है, जिसको लेकर अब विभाग पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, तीन सदस्यीय कमेटी अलग से जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है।
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