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Basti News: हरैया के तत्कालीन तहसीलदार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति, लेखपाल निलंबित
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हरैया/बस्ती। हरैया तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम खैरी ओझा में सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जे की शिकायत पर भ्रामक और तथ्यहीन आख्या प्रस्तुत करने के गंभीर मामले में पुनः जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई से राजस्व हल्के में हड़कंप मच गया है। उप जिलाधिकारी हरैया उमाकांत तिवारी ने तत्कालीन तहसीलदार अभयराज के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को संस्तुति रिपोर्ट भेज दी है। इसके साथ ही, इस प्रकरण में घोर लापरवाही और उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के आरोपी क्षेत्रीय लेखपाल हेमनाथ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामला जनसुनवाई समाधान प्रणाली आजीआरएस संख्या 40018526001344 से जुड़ा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव के पत्र 9 जून का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता राम सुंदर ओझा ने गांव की विभिन्न सरकारी गाटा संख्याओं पर अवैध कब्जे की स्पष्ट शिकायत की थी। जिसे राजस्व टीम ने बिना स्थलीय परीक्षण के ही खारिज करने का कुत्सित प्रयास किया। शिकायतकर्ता रामसुन्दर ओझा के अनुसार खैरी ओझा ग्रामसभा की इन कीमती भूमि पर ग्रामीणों का कब्जा है। जिसे हटाने के लिए वह विगत तीन वर्षों से शिकायती पत्र दे रहे थे।
अवैध कब्जे की शिकायत पर जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बुलाए जाने पर उपस्थित न होने तथा शिकायत में गाटा संख्या का उल्लेख न होने का आधार बनाकर शिकायत निस्तारण की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। इस संबंध में एसडीएम उमाकांत तिवारी ने बताया कि तत्कालीन तहसीलदार ने बिना पर्यवेक्षण और बिना शिकायत के बिंदुओं का संज्ञान लिए सरसरी तौर पर जांच आख्या अग्रसारित कर मामला स्पेशल क्लोज कर दिया। यह कृत्य उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन है।
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शासन की मंशा के विपरीत काम करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। बताया कि जांच आख्या का परीक्षण करने पर लेखपाल हेमनाथ की कमियां पाई गईं। जिसके कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जिसमें शिकायती पत्र में गाटा संख्या दर्ज होने के बावजूद रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता ने कोई संख्या नहीं दी। बिना पर्याप्त स्थल निरीक्षण और तथ्य परीक्षण के मनमुताबिक फर्जी आख्या तैयार की। शिकायत 13 जनवरी 2026 की थी, जबकि रिपोर्ट को सही दिखाने के लिए 28 अक्तूबर 2025 का पुराना स्पॉट मेमो संलग्न कर दिया गया। उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के लिए तथ्य विरुद्ध व भ्रामक रिपोर्ट तैयार कर शासन की छवि धूमिल की।
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विभागीय जांच शुरू, नायब तहसीलदार बने जांच अधिकारी
एसडीएम हरैया की ओर से जारी आदेश के अनुसार निलंबित लेखपाल हेमनाथ को निलंबन अवधि के दौरान तहसील हरैया के रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय से संबद्ध किया गया है। पूरे प्रकरण की गहन विभागीय जांच के लिए नायब तहसीलदार गौर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान लेखपाल को नियमों के अधीन केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। बशर्ते वह किसी अन्य व्यापार या व्यवसाय में न लगे हों।
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पुरानी रंजिश का दिया हवाला, ऐसे खुली पोल
जांच रिपोर्ट के अनुसार, लेखपाल ने मामले को रफा-दफा करने के लिए यह दलील दी थी कि शिकायतकर्ता ने पहले गाटा संख्या-22 चकमार्ग भूमि पर शौचालय निर्माण की शिकायत की थी। उस शिकायत के खारिज होने से क्षुब्ध होकर आवेदक ने यह नई शिकायत की है, इसलिए इसे निरस्त किया जाए। हालांकि, जब उच्चाधिकारियों ने मूल आवेदन देखा तो साफ हो गया कि लेखपाल और तहसीलदार ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए मामले को ''''स्पेशल क्लोज'''' की श्रेणी में डाल दिया था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद तहसील के अन्य अधिकारी व कर्मचारियों में हड़कंप व्याप्त है।
मामला जनसुनवाई समाधान प्रणाली आजीआरएस संख्या 40018526001344 से जुड़ा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव के पत्र 9 जून का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए थे। जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता राम सुंदर ओझा ने गांव की विभिन्न सरकारी गाटा संख्याओं पर अवैध कब्जे की स्पष्ट शिकायत की थी। जिसे राजस्व टीम ने बिना स्थलीय परीक्षण के ही खारिज करने का कुत्सित प्रयास किया। शिकायतकर्ता रामसुन्दर ओझा के अनुसार खैरी ओझा ग्रामसभा की इन कीमती भूमि पर ग्रामीणों का कब्जा है। जिसे हटाने के लिए वह विगत तीन वर्षों से शिकायती पत्र दे रहे थे।
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अवैध कब्जे की शिकायत पर जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बुलाए जाने पर उपस्थित न होने तथा शिकायत में गाटा संख्या का उल्लेख न होने का आधार बनाकर शिकायत निस्तारण की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई थी। इस संबंध में एसडीएम उमाकांत तिवारी ने बताया कि तत्कालीन तहसीलदार ने बिना पर्यवेक्षण और बिना शिकायत के बिंदुओं का संज्ञान लिए सरसरी तौर पर जांच आख्या अग्रसारित कर मामला स्पेशल क्लोज कर दिया। यह कृत्य उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन है।
शासन की मंशा के विपरीत काम करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। बताया कि जांच आख्या का परीक्षण करने पर लेखपाल हेमनाथ की कमियां पाई गईं। जिसके कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जिसमें शिकायती पत्र में गाटा संख्या दर्ज होने के बावजूद रिपोर्ट में लिखा कि शिकायतकर्ता ने कोई संख्या नहीं दी। बिना पर्याप्त स्थल निरीक्षण और तथ्य परीक्षण के मनमुताबिक फर्जी आख्या तैयार की। शिकायत 13 जनवरी 2026 की थी, जबकि रिपोर्ट को सही दिखाने के लिए 28 अक्तूबर 2025 का पुराना स्पॉट मेमो संलग्न कर दिया गया। उच्चाधिकारियों को गुमराह करने के लिए तथ्य विरुद्ध व भ्रामक रिपोर्ट तैयार कर शासन की छवि धूमिल की।
विभागीय जांच शुरू, नायब तहसीलदार बने जांच अधिकारी
एसडीएम हरैया की ओर से जारी आदेश के अनुसार निलंबित लेखपाल हेमनाथ को निलंबन अवधि के दौरान तहसील हरैया के रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय से संबद्ध किया गया है। पूरे प्रकरण की गहन विभागीय जांच के लिए नायब तहसीलदार गौर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान लेखपाल को नियमों के अधीन केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा। बशर्ते वह किसी अन्य व्यापार या व्यवसाय में न लगे हों।
पुरानी रंजिश का दिया हवाला, ऐसे खुली पोल
जांच रिपोर्ट के अनुसार, लेखपाल ने मामले को रफा-दफा करने के लिए यह दलील दी थी कि शिकायतकर्ता ने पहले गाटा संख्या-22 चकमार्ग भूमि पर शौचालय निर्माण की शिकायत की थी। उस शिकायत के खारिज होने से क्षुब्ध होकर आवेदक ने यह नई शिकायत की है, इसलिए इसे निरस्त किया जाए। हालांकि, जब उच्चाधिकारियों ने मूल आवेदन देखा तो साफ हो गया कि लेखपाल और तहसीलदार ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए मामले को ''''स्पेशल क्लोज'''' की श्रेणी में डाल दिया था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद तहसील के अन्य अधिकारी व कर्मचारियों में हड़कंप व्याप्त है।