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Basti News: योग प्रोटोकाल अभ्यास के साथ सात दिवसीय बोधि पथ कार्यशाला शुरू
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योग प्रोटोकाल का अभ्यास कराते गरुणध्वज पांडेय स्रोत आयोजक
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बस्ती। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ एवं संस्कृति विभाग,उत्तर प्रदेश के सहयोग से युवा विकास समिति की ओर से मंगलवार को सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण विषय पर आयोजित ग्रीष्मकालीन बोधि पथ साप्ताहिक कार्यशाला का आयोजन मिश्रौलिया में हुआ। योगाचार्य गरुणध्वज पांडेय ने कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को योग प्रोटोकाल का अभ्यास कराया।
उन्होंने कहा यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है। बुद्ध का जन्म लुंबिनी के वनों में हुआ, उन्हें ज्ञान बोधगया के बोधि वृक्ष के नीचे मिला, उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ के मृगदाव (हिरणों के जंगल) में दिया और उनका महापरिनिर्वाण कुशीनगर के साल के वृक्षों के बीच हुआ,जो खुद प्रकृति की छांव में जिया और विलीन हो गया, उनका मार्ग प्रकृति को नुकसान पहुंचाने की इजाजत कैसे दे सकता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ नवीन सिंह नें सभी उपस्थित युवाओं के साथ सतत एवंपर्यावरण-सुरक्षित भविष्य के निर्माण को लेकर बेहद सार्थक और व्यावहारिक विचार-विमर्श किया। बबिता गौतम ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से पर्यावरणीय अभियानों से सीधे जुड़ने और व्यक्ति-से-व्यक्ति संवाद के माध्यम से जन भागीदारी बढ़ाने का पुरजोर आह्वान किया।
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संजय कुमार गौतम ने जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गंभीरता पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों एवं नवाचारी समाधानों की तत्काल आवश्यकता है। 30 प्रतिभागियों के लिए संचालित इस सात दिवसीय कार्यशाला में युवाओं के बीच आर्ट पेंटिंग प्रतियोगिता, जातक कथाओं पर परिचर्चा, कविता पाठ के साथ वैचारिक और रचनात्मक सत्रों का आयोजन किया जायेगा।
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उन्होंने कहा यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है। बुद्ध का जन्म लुंबिनी के वनों में हुआ, उन्हें ज्ञान बोधगया के बोधि वृक्ष के नीचे मिला, उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ के मृगदाव (हिरणों के जंगल) में दिया और उनका महापरिनिर्वाण कुशीनगर के साल के वृक्षों के बीच हुआ,जो खुद प्रकृति की छांव में जिया और विलीन हो गया, उनका मार्ग प्रकृति को नुकसान पहुंचाने की इजाजत कैसे दे सकता है।
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विशिष्ट अतिथि डॉ नवीन सिंह नें सभी उपस्थित युवाओं के साथ सतत एवंपर्यावरण-सुरक्षित भविष्य के निर्माण को लेकर बेहद सार्थक और व्यावहारिक विचार-विमर्श किया। बबिता गौतम ने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से पर्यावरणीय अभियानों से सीधे जुड़ने और व्यक्ति-से-व्यक्ति संवाद के माध्यम से जन भागीदारी बढ़ाने का पुरजोर आह्वान किया।
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संजय कुमार गौतम ने जलवायु परिवर्तन की बढ़ती गंभीरता पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों एवं नवाचारी समाधानों की तत्काल आवश्यकता है। 30 प्रतिभागियों के लिए संचालित इस सात दिवसीय कार्यशाला में युवाओं के बीच आर्ट पेंटिंग प्रतियोगिता, जातक कथाओं पर परिचर्चा, कविता पाठ के साथ वैचारिक और रचनात्मक सत्रों का आयोजन किया जायेगा।