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Basti News: आर्द्रभूमि के रूप में छह बड़े तालाब चिह्नित...जलाशयों को सुरक्षित करने की पहल
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बस्ती। गिरते हुए भूजल स्तर को रोकने व उसे संरक्षित करने की पहल शुरू हो गई है। छह और बड़े तालाब को आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण वन बनाने की तैयारी है। इससे प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों के प्रवास के साथ ही संरक्षण प्रदान करके उसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की तैयारी है।
वेटलैंड संरक्षण के लिए चंदो, भुइला, पचवस, जसोवर, चौरी और मढ़नी तालाब चुना गया है। विभाग के अनुसार, वेटलैंड का मतलब होता है ऐसी जमीन, जो पूर्ण या आंशिक रूप से पानी से भरा होता है। पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए वेटलैंड की भूमिका अहम होती है। प्रवासी पक्षियों के रहने के लिहाज से भी यह जगह काफी अनुकूल होती है। जलीय जीव जंतुओं के लिए भी वेटलैंड संरक्षण का काम करते हैं। इसी को देखते हुए जिले में आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए शासन ने सार्थक पहल करते हुए कदम उठाया है।
यहां से मांगे गए आर्द्रभूमियों के अधिसूचनाओं के प्रस्ताव पर छह तालाबों को संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। बताया गया कि जलाशयों के संरक्षण की दिशा में तेजी ला दी गई है। जिले में चंदो, भुइला, पचवस, जसोवर, चौरी और मढ़नी ताल का अलग ही पहचान हैं। यहां विदेशी पक्षियों की चहचहाहट गूंजती है। इन जलाशयों की प्राकृतिक संरचना और जल धारण क्षमता को सुरक्षित रखने के लिए शासन विशेष कार्ययोजना तैयार कर रहा है। नम व आर्द्र क्षेत्रों पर अवैध कब्जों को रोकने के लिए वन विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्य वन संरक्षक एवं राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव नीरज कुमार के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक जनपद को कम से कम एक आर्द्रभूमि का प्रस्ताव अधिसूचना के लिए अनिवार्य रूप से भेजना होगा। चयन प्रक्रिया में उन जलाशयों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज, बाढ़ नियंत्रण और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डीएफओ डॉ. शिरीन सिद्दीकी का कहना है कि छह तालाबों का चयन किया गया है। जल संरक्षण के साथ अन्य कार्य होंगे।
तालाबों के विकास पर विभाग का फोकस है। वन कार्ययोजना बनाकर शासन में भेजा गया है। बजट आने पर और कार्य कराया जाएगा।
शिरीन सिद्दीकी, डीएफओ, बस्ती।
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वेटलैंड संरक्षण के लिए चंदो, भुइला, पचवस, जसोवर, चौरी और मढ़नी तालाब चुना गया है। विभाग के अनुसार, वेटलैंड का मतलब होता है ऐसी जमीन, जो पूर्ण या आंशिक रूप से पानी से भरा होता है। पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए वेटलैंड की भूमिका अहम होती है। प्रवासी पक्षियों के रहने के लिहाज से भी यह जगह काफी अनुकूल होती है। जलीय जीव जंतुओं के लिए भी वेटलैंड संरक्षण का काम करते हैं। इसी को देखते हुए जिले में आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए शासन ने सार्थक पहल करते हुए कदम उठाया है।
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यहां से मांगे गए आर्द्रभूमियों के अधिसूचनाओं के प्रस्ताव पर छह तालाबों को संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। बताया गया कि जलाशयों के संरक्षण की दिशा में तेजी ला दी गई है। जिले में चंदो, भुइला, पचवस, जसोवर, चौरी और मढ़नी ताल का अलग ही पहचान हैं। यहां विदेशी पक्षियों की चहचहाहट गूंजती है। इन जलाशयों की प्राकृतिक संरचना और जल धारण क्षमता को सुरक्षित रखने के लिए शासन विशेष कार्ययोजना तैयार कर रहा है। नम व आर्द्र क्षेत्रों पर अवैध कब्जों को रोकने के लिए वन विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्य वन संरक्षक एवं राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के सदस्य सचिव नीरज कुमार के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक जनपद को कम से कम एक आर्द्रभूमि का प्रस्ताव अधिसूचना के लिए अनिवार्य रूप से भेजना होगा। चयन प्रक्रिया में उन जलाशयों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज, बाढ़ नियंत्रण और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डीएफओ डॉ. शिरीन सिद्दीकी का कहना है कि छह तालाबों का चयन किया गया है। जल संरक्षण के साथ अन्य कार्य होंगे।
तालाबों के विकास पर विभाग का फोकस है। वन कार्ययोजना बनाकर शासन में भेजा गया है। बजट आने पर और कार्य कराया जाएगा।
शिरीन सिद्दीकी, डीएफओ, बस्ती।
