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Basti News: करोड़ों खर्च कर भी नहीं बदली कंपनीबाग चौराहे की तस्वीर, रोज सज रहा फुटपाथ
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कंपनीबाग चौराहे के पास सड़क पर अतिक्रमण। संवाद
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बस्ती। शहर के कंपनीबाग चौराहा को सुंदर बनाने की मुहिम कारगर नहीं हो पा रही है। बीडीए और पीडब्ल्यूडी ने मिलकर इस चौराहे के चौड़ीकरण करोड़ों से अधिक रुपये खर्च कर दिए हैं। अभी गुरुगोविंद सिंह स्मारक स्थल का निर्माण चल ही रहा है। बावजूद इसके अतिक्रमण के चलते यह चौराहा बदरंग दिख रहा है। कंपनीबाग चौराहे से सिविल लाइंस की तरफ बाएं पटरी पर फल विक्रेताओं का सड़क तक कब्जा है।
जानकार बताते हैं कि दुकान लगाने के बदले जिम्मेदार इनसे अच्छी खासी वसूली कर रहे हैं। इसी वजह से चौराहे पर मौजूद रहने वाली यातायात और सिविल पुलिस भी इन्हें रोकती टोकती नहीं है। जबकि ठेलों पर लाइंस से फल की दुकान लगने के कारण आवागमन रोजाना बाधित हो रहा है। इसी रास्ते जिले के आला अफसरों का भी अपने आवास पर जाना होता है। बावजूद इसके यहां अतिक्रमण के चलते सड़क सिकुड़ी हुई है। केवल वीवीआईपी मूवमेंट होने पर सिविल लाइंस चौकी की पुलिस ठेलों को हटवा कर रास्ता साफ करा देती है।
इसके बाद फिर स्थिति जस की तस बन जाती है। राहगीर जसवंत कुमार ने बताया कि कंपनीबाग चौराहा चौड़ा किए जाने से एक तरफ अच्छा लगने लगा हैं। मगर जैसे ही सिविल लाइंस की तरफ देखिए तो लगता है कि कोई ग्रामीण कस्बे का चौराहा है। क्योंकि यहां सड़क ऊंची हो गई है और फुटपाथ नीचे हैं। फुटपाथ पर लाइंस से फल के ठेले लगे रहते हैं। उसके आगे अवैध रूप से टैक्सी स्टैंड भी बन गया है। जिससे सड़क सिकुड़कर आधी हो गई है।
इन ठेलों पर ग्राहक और ऑटो टैक्सियों में सवारी भरने की होड़ के चलते यहां अक्सर जाम की स्थिति है। जिले के आला अफसर भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। उनकी गाड़ियां अतिक्रमण के चलते जाम में फंस जाती है। इस दौरान यातायात एवं सिविल पुलिस सक्रिय होती है। जैसे ही अफसरों की गाड़ियां निकलती हैं फिर सभी शांत हो जाते हैं। आम पब्लिक जाम से जूझते रहते हैं।
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लड़खड़ाने के बाद अक्सर ठेलों से भिड़ जा रहे बाइक सवार
कंपनीबाग से सिविल लाइंस की तरफ बढ़ने पर ठेलों की भरमार होने के कारण बाइक सवार अक्सर लड़ाखड़कर उससे भिड़ जाते हैं। फल विक्रेता समूह बनाकर उलटे बाइक सवारों से ही झगड़ने लगते हैं। पुलिस भी कुछ नहीं बोलती है। स्कूटी सवार प्रियंका ने बताया कि सड़क और फुटपाथ पर ठेला लगाना उचित नहीं है। यहां तो बहुत संभलकर चलना पड़ता है। आवागमन का दबाव जब अधिक रहता हैं तो वाहन किनारे करने के दौरान ठेलों से टकराने का खतरा रहता है। पुलिस की इसमें मिलीभगत रहती है। इसीलिए अतिक्रमणकारी सड़क तक ठेला लगाना अपना अधिकार समझते हैं।
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बीडीए ने बनाया नया नाला और पीडब्ल्यूडी ने सड़क
कंपनीबाग चौराहे को चमकाना जिला प्रशासन का ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसीलिए बीडीए ने 33 करोड़ की लागत से चौराहे पर दोनों तरफ नए नाला का निर्माण कराया गया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने चौराहे का दायरा बढ़ाकर सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा किया। वर्तमान में यहां गुरुगोविंद सिंह स्मारक भी पीडब्ल्यूडी की ओर से बनवाया जा रहा है। इसके बाद भी मृदा परीक्षण विभाग कार्यालय से लेकर बीडीए कार्यालय तक सड़क के किनारे अतिक्रमण खत्म नहीं कराया गया।
कोट
नाला और सड़क निर्माण करके कंपनीबाग चौराहे को चौड़ा कराया गया है। नए सिरे से यहां गुरु गोविंद सिंह चौक भी बन रहा है। अब इस चौराहे पर या यहां से निकलने वाली सड़कों पर अतिक्रमण नहीं रहने दिया जाएगा। इसके जल्द ही अभियान शुरू करवाया जाएगा।
प्रतिपाल सिंह चौहान, एडीएम।
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जानकार बताते हैं कि दुकान लगाने के बदले जिम्मेदार इनसे अच्छी खासी वसूली कर रहे हैं। इसी वजह से चौराहे पर मौजूद रहने वाली यातायात और सिविल पुलिस भी इन्हें रोकती टोकती नहीं है। जबकि ठेलों पर लाइंस से फल की दुकान लगने के कारण आवागमन रोजाना बाधित हो रहा है। इसी रास्ते जिले के आला अफसरों का भी अपने आवास पर जाना होता है। बावजूद इसके यहां अतिक्रमण के चलते सड़क सिकुड़ी हुई है। केवल वीवीआईपी मूवमेंट होने पर सिविल लाइंस चौकी की पुलिस ठेलों को हटवा कर रास्ता साफ करा देती है।
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इसके बाद फिर स्थिति जस की तस बन जाती है। राहगीर जसवंत कुमार ने बताया कि कंपनीबाग चौराहा चौड़ा किए जाने से एक तरफ अच्छा लगने लगा हैं। मगर जैसे ही सिविल लाइंस की तरफ देखिए तो लगता है कि कोई ग्रामीण कस्बे का चौराहा है। क्योंकि यहां सड़क ऊंची हो गई है और फुटपाथ नीचे हैं। फुटपाथ पर लाइंस से फल के ठेले लगे रहते हैं। उसके आगे अवैध रूप से टैक्सी स्टैंड भी बन गया है। जिससे सड़क सिकुड़कर आधी हो गई है।
इन ठेलों पर ग्राहक और ऑटो टैक्सियों में सवारी भरने की होड़ के चलते यहां अक्सर जाम की स्थिति है। जिले के आला अफसर भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। उनकी गाड़ियां अतिक्रमण के चलते जाम में फंस जाती है। इस दौरान यातायात एवं सिविल पुलिस सक्रिय होती है। जैसे ही अफसरों की गाड़ियां निकलती हैं फिर सभी शांत हो जाते हैं। आम पब्लिक जाम से जूझते रहते हैं।
लड़खड़ाने के बाद अक्सर ठेलों से भिड़ जा रहे बाइक सवार
कंपनीबाग से सिविल लाइंस की तरफ बढ़ने पर ठेलों की भरमार होने के कारण बाइक सवार अक्सर लड़ाखड़कर उससे भिड़ जाते हैं। फल विक्रेता समूह बनाकर उलटे बाइक सवारों से ही झगड़ने लगते हैं। पुलिस भी कुछ नहीं बोलती है। स्कूटी सवार प्रियंका ने बताया कि सड़क और फुटपाथ पर ठेला लगाना उचित नहीं है। यहां तो बहुत संभलकर चलना पड़ता है। आवागमन का दबाव जब अधिक रहता हैं तो वाहन किनारे करने के दौरान ठेलों से टकराने का खतरा रहता है। पुलिस की इसमें मिलीभगत रहती है। इसीलिए अतिक्रमणकारी सड़क तक ठेला लगाना अपना अधिकार समझते हैं।
बीडीए ने बनाया नया नाला और पीडब्ल्यूडी ने सड़क
कंपनीबाग चौराहे को चमकाना जिला प्रशासन का ड्रीम प्रोजेक्ट था। इसीलिए बीडीए ने 33 करोड़ की लागत से चौराहे पर दोनों तरफ नए नाला का निर्माण कराया गया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने चौराहे का दायरा बढ़ाकर सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा किया। वर्तमान में यहां गुरुगोविंद सिंह स्मारक भी पीडब्ल्यूडी की ओर से बनवाया जा रहा है। इसके बाद भी मृदा परीक्षण विभाग कार्यालय से लेकर बीडीए कार्यालय तक सड़क के किनारे अतिक्रमण खत्म नहीं कराया गया।
कोट
नाला और सड़क निर्माण करके कंपनीबाग चौराहे को चौड़ा कराया गया है। नए सिरे से यहां गुरु गोविंद सिंह चौक भी बन रहा है। अब इस चौराहे पर या यहां से निकलने वाली सड़कों पर अतिक्रमण नहीं रहने दिया जाएगा। इसके जल्द ही अभियान शुरू करवाया जाएगा।
प्रतिपाल सिंह चौहान, एडीएम।