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Basti News: टोकन लेने में छूट रहा पसीना, सिलिंड के लिए कतारों में बीता दिन

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2026 01:12 AM IST
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Sweating to get tokens, days spent in queues for cylinders
स्टेशन रोड गैस एजेंसी पर काउंटर पर पहुंचने की जद्दोजहद करती भीड़। संवाद
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बस्ती। रसोई गैस का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। रविवार को गैस एजेंसियों के खुलने से पहले ही लंबी लाइन लग गई। लोग कामकाज छोड़ सिलिंडर के लिए लाइन लगाने पहुंच रहे हैं। तल्ख धूप में लोग पूरे दिन खड़े होकर अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस दौरान बुकिंग और डिलीवरी की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने में काफी देर लग रही है। इससे उपभोक्ता और तबाह हो रहे हैं।
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शहर के स्टेशन रोड स्थित एजेंसी रोजाना की अपेक्षा रविवार को ज्यादा भीड़ देखी गई। सड़क के किनारे लाइन लगाकर लोग धूप में खड़े रहे। कुछ लोग सिलिंडर सिर पर रखकर बारी आने की प्रतीक्षा कर रहे थे, वहीं कुछ उपभोक्ता सिलिंडर पर बैठे हुए थे। महिलाएं खुद घर बार छोड़ सिलिंडर के लिए एजेंसी पर पहुंचकर लाइन लगा रही है। मालवीय मार्ग, पटेल चौक, सिविल लाइंस, कटरा, अस्पताल चौराहा स्थित विभिन्न कंपनियों के अधिकृत गैस एजेंसियों पर सुबह आठ बजते ही उपभोक्ता उमड़ पड़े।
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नौ बजे के बाद एजेंसियां खुलनी शुरू हुई तो बाहर लंबी कतार लग गई। लोग खाली सिलिंडरों के साथ लाइन में लगे रहे। इस दौरान एजेंसियाें पर गहमागहमी का माहौल भी बना रहा। एक साथ दो-तीन काउंटर संचालित होने के बाद भी भीड़ नियंत्रित नहीं हो रही है। डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी करने में 10 से 15 मिनट लग रहे हैं। इस दौरान बुकिंग नंबर के आधार पर लोगों को टोकन दिया जा रहा है। जब तक उपभोक्ता के मोबाइल पर ओटीपी नहीं आ रहा है तब तक टोकन नहीं मिल रहा है। इस प्रक्रिया में काफी देर हो रही है।
शहरी क्षेत्र के उपभोक्ता रितेश कुमार ने बताया कि उनके घर पर तीन दिन से गैस नहीं है। ऑनलाइन बुकिंग किए थे डिलिवरी का मैसेज आने के बाद भी सिलिंडर नहीं पहुंचा है। दौड़कर एजेंसी पर आना पड़ रहा है। वहीं सुभावती देवी ने कहा कि कड़ी धूप में लाइन लगाने के दौरान चक्कर आ रहा है। फिर भी सिलिंडर घर ले जाने की मजबूरी में बारी की प्रतीक्षा कर रही हूं। वहीं अवधराज ने कहा कि कंपनियों का यह सिस्टम गलत है। इससे उपभोक्ता तबाह हो रहे हैं।
एक व्यक्ति को कूपन देने में 10 से 15 मिनट लग रहे हैं। इसी वजह से भीड़ बढ़ रही है। एजेंसी और प्रशासन की ओर से होम डिलीवरी के किए गए दावे फेल नजर आ रहे हैं। दस प्रतिशत भी होम डिलीवरी नहीं की जा रही है।
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सप्लाई इंस्पेक्टर की निगरानी में बंट रहा सिलिंडर
कुछ एजेंसियों पर सप्लाई इंस्पेक्टर और पुलिस की निगरानी में सिलिंडर बंटवाया जा रहा है। लाइन में लगे उपभोक्ताओं को उनके बुकिंग नंबर पर टोकन दिलवाया जा रहा है। एजेंसी पर तैनात पूर्ति निरीक्षक सिलिंडरों के आवक और वितरण का लेखा जोखा भी चेक कर रहे हैं। इसके अलावा डीएसओ की टीम भी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण कर रही है। बावजूद इसके भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को दस हजार सिलिंडरों की आपूर्ति भी हुई हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि जितने सिलिंडर आ रहे हैं उससे ज्यादा उपभोक्ता लाइन में हैं। जिससे होम डिलीवरी की नौबत ही नहीं आ रही है। एजेंसी पर से ही सिलिंडरों की बिक्री हो जा रही है। होम डिलीवरी के लिए सिलिंडर नहीं बच रहा है।
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नौकरी पेशा वाले परेशान
होम डिलीवरी न होने से नौकरी पेशा वाले लोग सिलिंडर के लिए परेशान हैं। उपभोक्ता ओम सागर ने बताया कि वह गैर जनपद में नौकरी करते हैं। परिवार बस्ती रहता है, बच्चे अभी छोटे हैं। सिलिंडर भरवाने के लिए उन्हें छुट्टी लेकर आना पड़ा है। तीन दिन से लगातार परेशान होने के बाद भी सिलिंडर नहीं मिल पाया है। वहीं अमित कुमार बताते हैं कि बुकिंग करने के बाद घर पर सिलिंडर नहीं पहुंच रहा है। प्राइवेट कंपनी की नौकरी है। बहुत अनुरोध के बाद छुट्टी मिली है। तब आकर गैस एजेंसी पर लाइन लगाए हैं।
कोट
रसोई गैस सिलिंडरों की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। उपभोक्ताओं को रसोई गैस का संकट नहीं होने दिया जाएगा। अफवाह के चलते लोग एजेंसी पर पहुंचकर जरूरत से ज्यादा सिलिंडर ले रहे हैं। उपभोक्ताओं से अपील हैं कि वह एजेंसी पर आना बंद करें ताकि होम डिलीवरी की व्यवस्था सुचारू की जा सकें।
विपिन कुमार शुक्ल, डीएसओ।
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