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Basti News: व्यवस्था बीमार, भर्ती मरीजों को डाॅक्टर का इंतजार
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जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज, दुर्गंध से परेशानी संवाद
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बस्ती। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत में सुधार नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर वार्डों तक में अव्यवस्था के बीच इलाज हो रहा है। इससे बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
वार्ड भर्ती मरीजों का 24 घंटे में चिकित्सक सिर्फ एक बार ही हाल-चाल ले रहे। रात में तो कोई पूछने वाला भी नहीं होता है। वार्ड में गंदगी से उठती दुर्गंध से सांस लेना भी दूभर है। तमाम मरीज बेड पर नाक पर रुमाल रखकर लेटने को मजबूर दिखे।
बता दें कि सुबह 11 बजे तक मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों का चेकअप चिकित्सक ने नहीं किया था। जो मरीज इमरजेंसी में सुबह सात बजे भर्ती हुए थे, वे 10 बजे के अंदर ही मेडिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिए गए। मरीजों का कहना था कि सिर्फ ड्रिप लगाने के बाद चिकित्सक झांकने तक नहीं आ रहे हैं। चिल्ड्रेन वार्ड में 24 बेड पर 31 मरीज 11 बजे तक भर्ती मिले। वहीं, अस्पताल परिसर के आवास में रहने वाले चिकित्सक नौ बजे के बाद ओपीडी में पहुंच रहे हैं। प्रशिक्षुओं से मरीजों को ड्रिप और सूई लगवाई जा रही है और स्टाफ नर्स रजिस्टर मेंटेन कर रही हैं। सफाई व्यवस्था इतनी खराब है कि वार्ड में घुसते ही उठती दुर्गंध बाहर निकल जाने को विवश कर रही।
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अस्पताल में न तो फिनाइल से सफाई की जा रही है न ही कूलर में पानी भरा जा रहा है। टॉयलेट की गंदगी से लोग और परेशान दिखे। वहीं, दो दिन से इस वार्ड में पानी न आने से तीमारदार, मरीज के साथ कर्मी भी परेशान दिखे। हाथ धुलने के लिए उन्हें दूसरे वार्ड तक जाना पड़ रहा था। बताया कि दो दिन से पानी नहीं आ रहा है, इससे शौचालय में गंदगी फैल गई है। ड्यूटी रूम का एसी खराब होने से कर्मी भी पसीने से तरबतर दिखे। तीमारदारों ने बताया कि बेहतर इलाज कराने की आस में जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को निराशा मिल रही है। सआईसी के लगातार माॅनिटरिंग के बावजूद चिकित्सकों पर असर नहीं पड़ रहा है।
तीमारदारों का कहना है कि गंदगी के बीच परोसा जाने वाला खाना भी हजम नहीं होता, उल्टी हो जा रही है। एइसके अलावा साढ़े 11 बजे चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चे के तीमारदार रेखा ने बताया कि दो दिन हो गए, डॉक्टर देखने तक नहीं आए। सिर्फ दवा, सूई के लिए स्टाफ नर्स काउंटर पर बुलाती हैं। बताते हैं कि कभी डॉक्टर आए भी तो इतनी जल्दी में होते हैं कि कोई बात सुनने को तैयार नहीं होते।
वार्ड भर्ती मरीजों का 24 घंटे में चिकित्सक सिर्फ एक बार ही हाल-चाल ले रहे। रात में तो कोई पूछने वाला भी नहीं होता है। वार्ड में गंदगी से उठती दुर्गंध से सांस लेना भी दूभर है। तमाम मरीज बेड पर नाक पर रुमाल रखकर लेटने को मजबूर दिखे।
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बता दें कि सुबह 11 बजे तक मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीजों का चेकअप चिकित्सक ने नहीं किया था। जो मरीज इमरजेंसी में सुबह सात बजे भर्ती हुए थे, वे 10 बजे के अंदर ही मेडिकल वार्ड में शिफ्ट कर दिए गए। मरीजों का कहना था कि सिर्फ ड्रिप लगाने के बाद चिकित्सक झांकने तक नहीं आ रहे हैं। चिल्ड्रेन वार्ड में 24 बेड पर 31 मरीज 11 बजे तक भर्ती मिले। वहीं, अस्पताल परिसर के आवास में रहने वाले चिकित्सक नौ बजे के बाद ओपीडी में पहुंच रहे हैं। प्रशिक्षुओं से मरीजों को ड्रिप और सूई लगवाई जा रही है और स्टाफ नर्स रजिस्टर मेंटेन कर रही हैं। सफाई व्यवस्था इतनी खराब है कि वार्ड में घुसते ही उठती दुर्गंध बाहर निकल जाने को विवश कर रही।
अस्पताल में न तो फिनाइल से सफाई की जा रही है न ही कूलर में पानी भरा जा रहा है। टॉयलेट की गंदगी से लोग और परेशान दिखे। वहीं, दो दिन से इस वार्ड में पानी न आने से तीमारदार, मरीज के साथ कर्मी भी परेशान दिखे। हाथ धुलने के लिए उन्हें दूसरे वार्ड तक जाना पड़ रहा था। बताया कि दो दिन से पानी नहीं आ रहा है, इससे शौचालय में गंदगी फैल गई है। ड्यूटी रूम का एसी खराब होने से कर्मी भी पसीने से तरबतर दिखे। तीमारदारों ने बताया कि बेहतर इलाज कराने की आस में जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को निराशा मिल रही है। सआईसी के लगातार माॅनिटरिंग के बावजूद चिकित्सकों पर असर नहीं पड़ रहा है।
तीमारदारों का कहना है कि गंदगी के बीच परोसा जाने वाला खाना भी हजम नहीं होता, उल्टी हो जा रही है। एइसके अलावा साढ़े 11 बजे चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चे के तीमारदार रेखा ने बताया कि दो दिन हो गए, डॉक्टर देखने तक नहीं आए। सिर्फ दवा, सूई के लिए स्टाफ नर्स काउंटर पर बुलाती हैं। बताते हैं कि कभी डॉक्टर आए भी तो इतनी जल्दी में होते हैं कि कोई बात सुनने को तैयार नहीं होते।