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Basti News: बदलते मौसम का सेहत पर असर जुकाम-बुखार से टूट रहा बदन
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जिला अस्पताल में चिकित्सीय परामर्श के लिए ओपीडी में पहुंचे मरीज संवाद
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बस्ती। सर्दी में बच्चे कोल्ड डायरिया, जुकाम, खांसी की चपेट में आ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों के बाल रोग विभागों में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ी है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में 150 से ज्यादा बीमार बच्चे पहुंचे। इसके अलावा जनरल ओपीडी में भी वायरल बुखार के मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। जांच में पता चला कि बुखार वाले रोगियों का बदन टूट रहा है। वहीं, बच्चे जकड़न से परेशान हैं।
जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में बच्चों को दिखाने के लिए कतार लगी रही। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने बताया कि इस समय चल रही ठंडी हवाओं के संपर्क में आते ही बच्चे खांसी और जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें बुखार भी आ रहा है। इससे कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ है। कई बच्चे कोल्ड डायरिया के मिल रहे, जिन्हें प्रारंभिक उपचार देते हुए भर्ती किया जा रहा है।
बताया कि परामर्श और उपचार में देरी होने पर बच्चों के फेफड़ों पर प्रभाव पड़ता है और स्थिति गंभीर हो सकती है। अधिकतर बच्चे मौसम जनित बीमारियों से ग्रसित रहे। बताया कि बच्चे इन दिनों डायरिया, निमोनिया के साथ ही सर्दी-जुकाम की समस्या से परेशान हैं। ठंड के दौरान धूप निकलने पर मां बच्चे की मालिश करती हैं। यह गलत है क्योंकि ठंड में धूप लेने से शरीर को राहत तो मिलती है पर छोटे बच्चों की मालिश करना घातक साबित हो रहा है।
मालिश के दौरान बच्चों को धूप के साथ ठंडी हवा भी लगती है, जो उन्हें नुकसान पहुंचाती है। मेडिसिन विभाग में डॉ. रामजी सोनी ने परामर्श दिया।
बताया कि बुजुर्ग और जवान भी बदलते मौसम के चलते वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। एसआईसी जिला अस्पताल डॉ. खालिद रिजवान अहमद ने बताया कि शुक्रवार को 847 पर्चे बने। अधिकांश मेडिसिन और बाल रोग विभाग के थे।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में बच्चों को दिखाने के लिए कतार लगी रही। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने बताया कि इस समय चल रही ठंडी हवाओं के संपर्क में आते ही बच्चे खांसी और जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें बुखार भी आ रहा है। इससे कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ है। कई बच्चे कोल्ड डायरिया के मिल रहे, जिन्हें प्रारंभिक उपचार देते हुए भर्ती किया जा रहा है।
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बताया कि परामर्श और उपचार में देरी होने पर बच्चों के फेफड़ों पर प्रभाव पड़ता है और स्थिति गंभीर हो सकती है। अधिकतर बच्चे मौसम जनित बीमारियों से ग्रसित रहे। बताया कि बच्चे इन दिनों डायरिया, निमोनिया के साथ ही सर्दी-जुकाम की समस्या से परेशान हैं। ठंड के दौरान धूप निकलने पर मां बच्चे की मालिश करती हैं। यह गलत है क्योंकि ठंड में धूप लेने से शरीर को राहत तो मिलती है पर छोटे बच्चों की मालिश करना घातक साबित हो रहा है।
मालिश के दौरान बच्चों को धूप के साथ ठंडी हवा भी लगती है, जो उन्हें नुकसान पहुंचाती है। मेडिसिन विभाग में डॉ. रामजी सोनी ने परामर्श दिया।
बताया कि बुजुर्ग और जवान भी बदलते मौसम के चलते वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। एसआईसी जिला अस्पताल डॉ. खालिद रिजवान अहमद ने बताया कि शुक्रवार को 847 पर्चे बने। अधिकांश मेडिसिन और बाल रोग विभाग के थे।
