बस्ती। शरीर रूपी रथ को जो श्रीकृष्ण के हाथों में सौंप देता है उसे विजयश्री मिलती है। सुदामा ने ईश्वर से निरपेक्ष प्रेम किया तो उन्होंने सुदामा को अपना लिया और अपने जैसा वैभवशाली भी बना दिया। मनुष्य का शरीर ही वह कुरुक्षेत्र है जहां निवृत्ति और प्रवृत्ति का युद्ध होता रहता है। जीव जब ईश्वर से प्रेम करता है तो ईश्वर जीव को भी ईश्वर बना देते हैं। यह सद्विचार कथा व्यास विद्याधर भारद्वाज ने सिविल लाइंस में विनोद प्रकाश शुक्ल के आवास पर चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में भगवान कृष्ण महिमा का गान करते हुए व्यक्त किया।
सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि पति यदि धन, संपत्ति, सुख-सुविधा दे और पत्नी ऐसे पति की सेवा करे तो इसके आश्चर्य क्या है, धन्य हैं सुदामा की पत्नी सुशीला जिन्होंने भूखे रहकर भी दरिद्र पति को भी परमेश्वर मानकर सेवा करती रही। भगवान कृष्ण ने जो संपत्ति कुबेर के पास भी नही है उसे सुदामा को दिया। सारा विश्व श्रीकृष्ण का वंदन करता है और वे एक दरिद्र ब्राह्मण और उनकी पत्नी सुदामा का वंदन करते हैं। इस अवसर पर अरविंद पाल, अरुणा सिंह पाल, भानु प्रताप शुक्ल, विनोद प्रकाश शुक्ल, नवीन शुक्ल, पुनीत शुक्ल, सत्य प्रकाश शुक्ल, विनय शुक्ल, अभिनव पांडेय, अभय दुबे, सीपी मौजूद रहे।