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Bhadohi News: 10 साल पुरानी एक्सरे मशीनें हुईं बेदम, हड्डी की दिखती है धंुधली तस्वीर
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औराई ट्रामा सेंटर में लगी पोर्टेबल एक्सरे मशीन। संवाद
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ज्ञानपुर। जिले की छह सीएचसी में से चार पर लगी पोर्टेबल एक्सरे मशीनें अब अपनी उपयोगिता खोती नजर आ रही हैं। करीब 10 वर्ष पहले शासन से आई ये मशीनें अब एक्सरे कम और धुंधली रिपोर्ट ज्यादा दे रही हैं। रिपोर्ट में हड्डी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। गोपीगंज सीएचसी पर मैनुअल एक्सरे मशीन है, जिसकी रिपोर्ट समझना कठिन होता है। वहीं, सुरियावां सीएचसी पर एक्सरे मशीन नहीं है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हमारी टीम ने बुधवार को जिले के छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे मशीनों की स्थिति का जायजा लिया। डीघ सीएचसी में पोर्टेबल मशीन है, जहां बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को एक्सरे होते हैं। यहां के एक्सरे टेक्नीशियन सोमवार, मंगलवार और बुधवार को भानीपुर में सेवाएं देते हैं।
भानीपुर सीएचसी में डिजिटल एक्सरे मशीन है, लेकिन पिछले 10 दिनों से एक्सरे फिल्म उपलब्ध नहीं है। मरीज मोबाइल से रिपोर्ट की फोटो लेकर इलाज करा रहे हैं। कुछ एक्सरे फिल्म उपलब्ध हैं, जिन्हें विशेष व्यक्तियों को दिए जाने की बात सामने आई।
सुरियावां सीएचसी पर करीब आठ वर्ष पहले डिजिटल एक्सरे मशीन भेजी गई थी, लेकिन इंस्टॉल न होने के कारण वह खराब हो गई। यह मशीन जिला अस्पताल से सुरियावां इस उद्देश्य से भेजी गई थी कि लोगों को इसका लाभ मिल सके, लेकिन अब तक उपयोग में नहीं आ सकी और धूल फांक रही है।
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रोजाना 20 से 25 मरीजों को एक्सरे की जरूरत पड़ती है। उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां एक एक्सरे के लिए 250 से 300 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
औराई ट्रॉमा सेंटर, भदोही में एक्सरे मशीन है, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में मरीज भर्ती नहीं होते, इसलिए वहां एक्सरे नहीं किए जाते। भदोही में मशीन अक्सर खराब रहती है। इसकी सुध लेने वाले जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं।
इनसेट: मैनुअल मशीन की रिपोर्ट नहीं आती साफ
गोपीगंज सीएचसी में मैनुअल एक्सरे मशीन है, लेकिन इसकी रिपोर्ट स्पष्ट नहीं आती। एक्सरे फिल्म की तस्वीर साफ नहीं होती। ऐसे में मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है। यह हाईवे स्थित सीएचसी है, जहां रोजाना ओपीडी के अलावा दो-चार दुर्घटना के मरीज भी पहुंचते हैं।
इनसेट: इन बीमारियों में पड़ती है एक्सरे की जरूरत
हड्डी फ्रैक्चर, चोट, जोड़ों में गैप, हड्डी में क्रैक, छाती और फेफड़ों की बीमारी, टीबी, अस्थमा, फेफड़ों में पानी, पेट की समस्या, आंत में ब्लॉकेज, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, अर्थराइटिस, कमर दर्द तथा जबड़े से जुड़ी समस्याओं में एक्सरे की जरूरत पड़ती है।
इनसेट: सुरियावां में चार दिन से सेलेक्ट्रा मशीन खराब
सुरियावां सीएचसी में चार दिनों से सेलेक्ट्रा मशीन खराब है। इसके कारण सीवीसी सहित अन्य जांच बंद हैं। मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। दो महीने पहले भी मशीन खराब हुई थी, जिसे बाद में ठीक कराया गया था।
इस मशीन से लिवर, एलएफटी, किडनी फंक्शन, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल और कोलेस्ट्रॉल सहित अन्य जांच होती हैं। मरीज अशोक कुमार, शंभूनाथ, सुरेंद्र और राधा ने बताया कि मशीन खराब होने के कारण बाहर जांच करानी पड़ रही है, जहां 400 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
वहीं अधीक्षक डॉ. आनंद स्वरूप ने दावा किया कि मशीन दो दिनों से खराब है। टेक्नीशियन को सूचना दे दी गई है।
प्रतिक्रिया
बाइक से गिर गया था। पैर में दर्द बना हुआ था। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने बाहर एक्सरे कराने के लिए कहा, क्योंकि सीएचसी पर व्यवस्था नहीं है। - सुरेंद्र कुमार, निवासी चकिया:
हाथ में सूजन और दर्द की दवा लेने आया था। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने एक्सरे कराने की सलाह दी। बाहर से एक्सरे लिख दिया गया, क्योंकि सीएचसी पर एक्सरे नहीं होता। - गुड्डू, निवासी महुआपुर
चार सीएचसी पर डिजिटल एक्सरे मशीन लगाने की मांग शासन से की गई थी, जिसकी स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही मशीनें लगाई जाएंगी। सुरियावां में भी नई एक्सरे मशीन लगाई जाएगी। पहले की अपेक्षा स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हुई हैं। - डॉ. एसके चक, सीएमओ:
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भानीपुर सीएचसी में डिजिटल एक्सरे मशीन है, लेकिन पिछले 10 दिनों से एक्सरे फिल्म उपलब्ध नहीं है। मरीज मोबाइल से रिपोर्ट की फोटो लेकर इलाज करा रहे हैं। कुछ एक्सरे फिल्म उपलब्ध हैं, जिन्हें विशेष व्यक्तियों को दिए जाने की बात सामने आई।
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सुरियावां सीएचसी पर करीब आठ वर्ष पहले डिजिटल एक्सरे मशीन भेजी गई थी, लेकिन इंस्टॉल न होने के कारण वह खराब हो गई। यह मशीन जिला अस्पताल से सुरियावां इस उद्देश्य से भेजी गई थी कि लोगों को इसका लाभ मिल सके, लेकिन अब तक उपयोग में नहीं आ सकी और धूल फांक रही है।
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रोजाना 20 से 25 मरीजों को एक्सरे की जरूरत पड़ती है। उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जहां एक एक्सरे के लिए 250 से 300 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
औराई ट्रॉमा सेंटर, भदोही में एक्सरे मशीन है, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में मरीज भर्ती नहीं होते, इसलिए वहां एक्सरे नहीं किए जाते। भदोही में मशीन अक्सर खराब रहती है। इसकी सुध लेने वाले जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं।
इनसेट: मैनुअल मशीन की रिपोर्ट नहीं आती साफ
गोपीगंज सीएचसी में मैनुअल एक्सरे मशीन है, लेकिन इसकी रिपोर्ट स्पष्ट नहीं आती। एक्सरे फिल्म की तस्वीर साफ नहीं होती। ऐसे में मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है। यह हाईवे स्थित सीएचसी है, जहां रोजाना ओपीडी के अलावा दो-चार दुर्घटना के मरीज भी पहुंचते हैं।
इनसेट: इन बीमारियों में पड़ती है एक्सरे की जरूरत
हड्डी फ्रैक्चर, चोट, जोड़ों में गैप, हड्डी में क्रैक, छाती और फेफड़ों की बीमारी, टीबी, अस्थमा, फेफड़ों में पानी, पेट की समस्या, आंत में ब्लॉकेज, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, अर्थराइटिस, कमर दर्द तथा जबड़े से जुड़ी समस्याओं में एक्सरे की जरूरत पड़ती है।
इनसेट: सुरियावां में चार दिन से सेलेक्ट्रा मशीन खराब
सुरियावां सीएचसी में चार दिनों से सेलेक्ट्रा मशीन खराब है। इसके कारण सीवीसी सहित अन्य जांच बंद हैं। मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। दो महीने पहले भी मशीन खराब हुई थी, जिसे बाद में ठीक कराया गया था।
इस मशीन से लिवर, एलएफटी, किडनी फंक्शन, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल और कोलेस्ट्रॉल सहित अन्य जांच होती हैं। मरीज अशोक कुमार, शंभूनाथ, सुरेंद्र और राधा ने बताया कि मशीन खराब होने के कारण बाहर जांच करानी पड़ रही है, जहां 400 से 600 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
वहीं अधीक्षक डॉ. आनंद स्वरूप ने दावा किया कि मशीन दो दिनों से खराब है। टेक्नीशियन को सूचना दे दी गई है।
प्रतिक्रिया
बाइक से गिर गया था। पैर में दर्द बना हुआ था। ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने बाहर एक्सरे कराने के लिए कहा, क्योंकि सीएचसी पर व्यवस्था नहीं है। - सुरेंद्र कुमार, निवासी चकिया:
हाथ में सूजन और दर्द की दवा लेने आया था। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने एक्सरे कराने की सलाह दी। बाहर से एक्सरे लिख दिया गया, क्योंकि सीएचसी पर एक्सरे नहीं होता। - गुड्डू, निवासी महुआपुर
चार सीएचसी पर डिजिटल एक्सरे मशीन लगाने की मांग शासन से की गई थी, जिसकी स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही मशीनें लगाई जाएंगी। सुरियावां में भी नई एक्सरे मशीन लगाई जाएगी। पहले की अपेक्षा स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हुई हैं। - डॉ. एसके चक, सीएमओ: