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Bhadohi News: रजिस्टर में दौड़ रही संचारी रोग नियंत्रण अभियान की 1430 टीमें
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वेदमनपुर में बस्ती के बीच भरा घरों का गंदा पानी। संवाद
- फोटो : Archive
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ज्ञानपुर। जनपद में संचारी रोग नियंत्रण अभियान सिर्फ रजिस्टर में चल रहा है। 546 गांवों में 30 दिन तक चलने वाले अभियान का 15 दिन बीत गया है। अभियान की सफलता के लिए 1430 टीमें बनाई गई हैं। अमर उजाला की टीम बुधवार को चकापुर, मलियापुर, अदनपुर, तयूरी, बासदेवपुर, कटका, चौरी, गोपीपुर, कडोर, करियावां आदि गांवों में संचारी रोग नियंत्रण अभियान में लगी टीमों को खोजने के लिए पहुंची। किसी भी गांव में टीम का कोई भी सदस्य नहीं मिला। ग्रामीण क्षेत्र के महाराजगंज बाजार और माधोसिंह में गंदगी और गर्मी बढ़ने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। हर दिन लगभग 50 लोगों की मलेरिया जांच हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बीते साल डेंगू और मलेरिया के 13 मरीज मिले थे। इस साल अभी तक सिर्फ एक मरीज मिला है। वहीं, 200 लोगों की मलेरिया की जांच रोज हो रही है।
फॉगिंग के लिए बजट नहीं, एंटी लार्वा का होता है छिड़काव
सीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के लिए अलग से बजट नहीं आता है। फॉगिंग के लिए भी बजट अलग से नहीं आता है। जिस गांव में डेंगू, मलेरिया के मरीज मिलते हैं वहां विभाग एंटी लार्वा का छिड़काव कराता है। विशेष जरूरत पड़ने पर फॉगिंग कराई जाती है। एक घंटे फॉगिंग कराने पर 1500 रुपये खर्च होते हैं।
फॉगिंग के लिए हर साल कागजों में खर्च किए जाते हैं 54.46 लाख
546 ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत निधि के मद में 10 हजार रुपये हर गांव में हर साल संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफल बनाने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के जॉइंट खाते में शासन की ओर से धनराशि भेजी जाती है। इस बजट से गांव में फॉगिंग, एंटी लार्वा का छिड़काव कराना होता है। 546 ग्राम पंचायतों में फॉगिंग के लिए हर साल 54.46 लाख रुपये खर्च होते हैं। यह बजट पूरे साल भर का होता है। साल में तीन बार अभियान चलता है।
बीते 5 साल में मिले डेंगू मरीज
साल - डेंगू - मलेरिया
2021 - 39 - 58
2022 - 101- 22
2023 - 208 - 11
2024 - 40 - 16
2025 - 13 - 13
2026 - 00 - 01
अभियान को सफल में बनाने इनकी भूमिका
- जिले की आबादी 18 से 20 लाख
- जिले में कुल 546 गांव
- अभियान में लगी 1430 टीमें
- मॉनीटरिंग के लिए लगाए गए 181 पर्यवेक्षक
- 11 विभाग का समावेश
गांव में अभी तक टीम नहीं आई है। आशा कार्यकर्ता कभी-कभी गांवों में दिखाई देती हैं। संक्रामक रोगों के बारे में कोई क्या जानेगा।-- नरेश निवासी चकजुरानी
ऐसा कोई अभियान चलता है कि कोई जानता ही नहीं है। टीम को गांवों में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। ताकि लोग सफाई के लिए सचेत रहें। - प्रदीप दुबे निवासी बनकट
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के लिए रैली नहीं निकाली गई है। तबियत खराब होने पर गांव के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाते हैं। - सूर्यबली यादव निवासी पर्वतपुर
गांवों में फॉगिंग, दवाओं का छिड़काव नहीं किया जाता है। संक्रमित बीमारी होने का डर गांव के लोगों में बना रहता है। - आशीष दुबे निवासी वेदमनपुर।
गांव में डेंगू और मलेरिया के मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग फॉगिंग कराता है। गांवों में आशा और एएनएम की ड्यूटी लगी है। उनकी जिम्मेदारी है लोगों को जाकर जागरूक करना। इसकी मॉनीटरिंग की जाती है। अभियान पूरा होने पर समीक्षा होगी। - डॉ. एसके चक, सीएमओ।
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फॉगिंग के लिए बजट नहीं, एंटी लार्वा का होता है छिड़काव
सीएमओ डॉ. एसके चक ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के लिए अलग से बजट नहीं आता है। फॉगिंग के लिए भी बजट अलग से नहीं आता है। जिस गांव में डेंगू, मलेरिया के मरीज मिलते हैं वहां विभाग एंटी लार्वा का छिड़काव कराता है। विशेष जरूरत पड़ने पर फॉगिंग कराई जाती है। एक घंटे फॉगिंग कराने पर 1500 रुपये खर्च होते हैं।
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फॉगिंग के लिए हर साल कागजों में खर्च किए जाते हैं 54.46 लाख
546 ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत निधि के मद में 10 हजार रुपये हर गांव में हर साल संचारी रोग नियंत्रण अभियान को सफल बनाने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के जॉइंट खाते में शासन की ओर से धनराशि भेजी जाती है। इस बजट से गांव में फॉगिंग, एंटी लार्वा का छिड़काव कराना होता है। 546 ग्राम पंचायतों में फॉगिंग के लिए हर साल 54.46 लाख रुपये खर्च होते हैं। यह बजट पूरे साल भर का होता है। साल में तीन बार अभियान चलता है।
बीते 5 साल में मिले डेंगू मरीज
साल - डेंगू - मलेरिया
2021 - 39 - 58
2022 - 101- 22
2023 - 208 - 11
2024 - 40 - 16
2025 - 13 - 13
2026 - 00 - 01
अभियान को सफल में बनाने इनकी भूमिका
- जिले की आबादी 18 से 20 लाख
- जिले में कुल 546 गांव
- अभियान में लगी 1430 टीमें
- मॉनीटरिंग के लिए लगाए गए 181 पर्यवेक्षक
- 11 विभाग का समावेश
गांव में अभी तक टीम नहीं आई है। आशा कार्यकर्ता कभी-कभी गांवों में दिखाई देती हैं। संक्रामक रोगों के बारे में कोई क्या जानेगा।
ऐसा कोई अभियान चलता है कि कोई जानता ही नहीं है। टीम को गांवों में जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। ताकि लोग सफाई के लिए सचेत रहें। - प्रदीप दुबे निवासी बनकट
संचारी रोग नियंत्रण अभियान के लिए रैली नहीं निकाली गई है। तबियत खराब होने पर गांव के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाते हैं। - सूर्यबली यादव निवासी पर्वतपुर
गांवों में फॉगिंग, दवाओं का छिड़काव नहीं किया जाता है। संक्रमित बीमारी होने का डर गांव के लोगों में बना रहता है। - आशीष दुबे निवासी वेदमनपुर।
गांव में डेंगू और मलेरिया के मरीज मिलने पर स्वास्थ्य विभाग फॉगिंग कराता है। गांवों में आशा और एएनएम की ड्यूटी लगी है। उनकी जिम्मेदारी है लोगों को जाकर जागरूक करना। इसकी मॉनीटरिंग की जाती है। अभियान पूरा होने पर समीक्षा होगी। - डॉ. एसके चक, सीएमओ।
