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Bhadohi News: खाड़ी देशों के बीच छिड़े युद्ध से 80 फीसदी द्विपक्षीय कालीन कारोबार होगा प्रभावित
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भदोही नगर के एक कालीन गोदाम में रखे कालीन और काम करते मजदूर। स्रोत- संवाद
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भदोही। अमेरिकी टैरिफ से उबरे निर्यातकों के सामने अब एक नई परेशानी ने दस्तक दी है। खाड़ी देशों के बीच छिड़े युद्ध ने निर्यातकों को चिंता में डाल दिया है। वर्तमान में भले ही भारतीय कालीनों के निर्यात पर कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन युद्ध अगर लंबा खिंचता है तो निश्चित तौर पर इसका असर कारोबार पर देखने को मिलेगा। इसमें खरीदार देशों में पैनिक स्थिति होने पर 80 फीसदी द्विपक्षीय कारोबार प्रभावित होने की संभावना है। वहीं, कई अहम रास्ते प्रभावित होने के साथ अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले कारपेट एक्स्पो पर भी चिंता के बादल मंडराने लगे हैं।
भारतीय कालीन की सबसे अधिक मांग अमेरिका और जर्मनी में होती है। यह दोनों देश फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से नहीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध का हिस्सा बने हुए हैं। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के वाइस चेयरमैन असलम महबूब का कहना है कि निर्यातक अभी-अभी अमेरिकी टैरिफ के बोझ से निकले हैं। अगले महीने में नई दिल्ली में होेने वाले कारपेट एक्स्पो में निर्यातकों ने यह उम्मीद लगाई है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी खरीदार आएंगे, क्योंकि बीते मेले में टैरिफ के असर के कारण खरीदारों ने दूरी बनाई थी। अब एक बार फिर से जिस तरह की स्थितियां बन रही है। उससे कहीं न कहीं कालीन व्यापारियों में यह चिंता बढ़ रही है कि युद्ध के असर से खरीदार कहीं नई दिल्ली के मेले से भी दूरी न बना लें। बताया कि अमेरिका हमारे निर्यात 60 फीसदी हिस्सेदार है। अगर जर्मनी और अन्य यूरोपिय देशों को जोड़ लिया जाए तो यह 80 फीसदी तक पहुंचा जाता है। अब आने वाले दिनों में युद्ध की स्थिति से व्यापार पर भी इसका असर देखा जा सकेगा।
प्रमुख शिपिंग एजेंट अशोक अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल कार्गो पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन यदि युद्ध लंबा खिंचा तो दिक्कतें आ सकती है। युद्ध के चलते कई अहम हवाई रास्तों को बंद या डायवर्ट कर दिया गया है। निकट भविष्य में भारत आन वाले खरीदार अथवा भारत से विदेश जाने वाले निर्यातकों के दौरों पर असर पड़ सकता है। भारतीय कालीनों का बड़ा हिस्सा समुद्री रास्ते से निर्यात किया जाता है। वहीं, मामूली मात्रा में कालीन एयर कार्गो से भेजे जाते हैं। ऐसे फ्लाइट्स या कारगो रद होने से लोगों को समय पर आपूर्ति कर पाना मुश्किल होगी। यदि होगा तो हवाई अड्डों अथवा बंदरगाहों पर माल डंप करने की मजबूरी आ सकती है।
निर्यातकों ने नई दिल्ली कारपेट एक्सपो की शुरू कर दी है तैयारी
अगले महीने 11 से 14 अप्रैल तक नई दिल्ली में इंडिया कारपेट एक्सपो होना है। निर्यातकों ने तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन इरान इस्राइल-अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध से विदेशी खरीदारों का आगमन प्रभावित हो सकता है। कई निर्यातकों का कहना है कि इस युद्ध को केवल अमेरिका, इस्राइल और अन्य खाड़ी देश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि चीन, रूस, कोरिया ने इरान का पक्ष लेने की बात कही है। वहीं, जर्मनी, फ्रांस जैसे देश हमेशा से अमेरिका साथ देते रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचा तो विश्व के देश अमेरिका और इरान के पक्ष में लामबंद होना शुरू कर देंगे, जो कारोबार के नजरिए से शुभ संकेत नहीं होगा।
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भारतीय कालीन की सबसे अधिक मांग अमेरिका और जर्मनी में होती है। यह दोनों देश फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से नहीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध का हिस्सा बने हुए हैं। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के वाइस चेयरमैन असलम महबूब का कहना है कि निर्यातक अभी-अभी अमेरिकी टैरिफ के बोझ से निकले हैं। अगले महीने में नई दिल्ली में होेने वाले कारपेट एक्स्पो में निर्यातकों ने यह उम्मीद लगाई है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी खरीदार आएंगे, क्योंकि बीते मेले में टैरिफ के असर के कारण खरीदारों ने दूरी बनाई थी। अब एक बार फिर से जिस तरह की स्थितियां बन रही है। उससे कहीं न कहीं कालीन व्यापारियों में यह चिंता बढ़ रही है कि युद्ध के असर से खरीदार कहीं नई दिल्ली के मेले से भी दूरी न बना लें। बताया कि अमेरिका हमारे निर्यात 60 फीसदी हिस्सेदार है। अगर जर्मनी और अन्य यूरोपिय देशों को जोड़ लिया जाए तो यह 80 फीसदी तक पहुंचा जाता है। अब आने वाले दिनों में युद्ध की स्थिति से व्यापार पर भी इसका असर देखा जा सकेगा।
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प्रमुख शिपिंग एजेंट अशोक अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल कार्गो पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन यदि युद्ध लंबा खिंचा तो दिक्कतें आ सकती है। युद्ध के चलते कई अहम हवाई रास्तों को बंद या डायवर्ट कर दिया गया है। निकट भविष्य में भारत आन वाले खरीदार अथवा भारत से विदेश जाने वाले निर्यातकों के दौरों पर असर पड़ सकता है। भारतीय कालीनों का बड़ा हिस्सा समुद्री रास्ते से निर्यात किया जाता है। वहीं, मामूली मात्रा में कालीन एयर कार्गो से भेजे जाते हैं। ऐसे फ्लाइट्स या कारगो रद होने से लोगों को समय पर आपूर्ति कर पाना मुश्किल होगी। यदि होगा तो हवाई अड्डों अथवा बंदरगाहों पर माल डंप करने की मजबूरी आ सकती है।
निर्यातकों ने नई दिल्ली कारपेट एक्सपो की शुरू कर दी है तैयारी
अगले महीने 11 से 14 अप्रैल तक नई दिल्ली में इंडिया कारपेट एक्सपो होना है। निर्यातकों ने तैयारी भी शुरू कर दी थी, लेकिन इरान इस्राइल-अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध से विदेशी खरीदारों का आगमन प्रभावित हो सकता है। कई निर्यातकों का कहना है कि इस युद्ध को केवल अमेरिका, इस्राइल और अन्य खाड़ी देश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि चीन, रूस, कोरिया ने इरान का पक्ष लेने की बात कही है। वहीं, जर्मनी, फ्रांस जैसे देश हमेशा से अमेरिका साथ देते रहे हैं। युद्ध लंबा खिंचा तो विश्व के देश अमेरिका और इरान के पक्ष में लामबंद होना शुरू कर देंगे, जो कारोबार के नजरिए से शुभ संकेत नहीं होगा।
